ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा, नई 125 दिन की गारंटी वाली योजना की चर्चा तेज

नई दिल्ली ।ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को लेकर हाल ही में सामने आए एक दावे ने देशभर में चर्चा को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि मौजूदा रोजगार गारंटी प्रणाली की जगह एक नए ढांचे को लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को पहले से अधिक दिनों तक रोजगार की गारंटी देने का प्रस्ताव सामने आया है। इस कथित बदलाव में रोजगार की अवधि को बढ़ाकर 125 दिन करने की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को और मजबूत बनाने का दावा किया जा रहा है। इस कथित योजना के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अस्थायी मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक स्थायी आधार देना बताया जा रहा है। इसमें गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास, जल संरक्षण, कृषि कार्यों को बढ़ावा देने और सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों पर अधिक ध्यान देने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इस बदलाव के लिए एक बड़ा बजट निर्धारित किया गया है, ताकि रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सके। हालांकि इन दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में इस तरह का कोई नया कानून या अधिनियम लागू किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ग्रामीण रोजगार की मौजूदा व्यवस्था एक स्थापित कानून के तहत संचालित होती है, जो लंबे समय से देश के ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान कर रही है। इस प्रणाली में किसी बड़े बदलाव के लिए संसद की प्रक्रिया, कानूनी मंजूरी और औपचारिक अधिसूचना आवश्यक होती है। लेकिन इस कथित नए ढांचे को लेकर ऐसी किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है। इसी कारण विशेषज्ञ इस तरह की खबरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि रोजगार से जुड़ी योजनाएं सीधे तौर पर करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी बदलाव की जानकारी केवल प्रमाणिक और आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही मानी जानी चाहिए। बिना पुष्टि के फैलने वाली जानकारी अक्सर भ्रम पैदा करती है और लोगों के बीच गलतफहमी को जन्म देती है। ग्रामीण विकास नीतियों का उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिल सके, ताकि शहरों की ओर पलायन कम हो। ऐसे में किसी भी नई योजना या सुधार का असली प्रभाव तभी समझा जा सकता है जब वह पूरी तरह लागू हो और उसके परिणाम सामने आएं। फिलहाल यह मामला दावों और चर्चाओं के बीच बना हुआ है, और जब तक किसी आधिकारिक घोषणा या ठोस दस्तावेज के माध्यम से इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे केवल एक अपुष्ट जानकारी के रूप में ही देखा जा सकता है।
LPG कनेक्शन धारकों के लिए चेतावनी, सरकार ने शुरू की सख्त जांच, सब्सिडी बंद होने का खतरा

नई दिल्ली । देश में रसोई गैस यानी LPG सब्सिडी को लेकर सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है, जिसका सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब सब्सिडी पाने की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त और निगरानी आधारित हो गई है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा, जबकि आय सीमा से अधिक कमाई करने वाले लोगों की सब्सिडी बंद की जा सकती है। नए सिस्टम के तहत उपभोक्ताओं की आय की जांच इनकम टैक्स रिकॉर्ड और परिवार के वित्तीय डेटा के आधार पर की जा रही है। इसके लिए डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, जिसमें आधार, पैन और गैस कनेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में जोड़ा जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी का लाभ गलत या अपात्र लोगों तक न पहुंचे और सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सके। जानकारी के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं या उनके परिवार की सालाना टैक्सेबल आय एक निश्चित सीमा से अधिक है, उन्हें अलर्ट संदेश भेजे जा रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी जानकारी समय पर अपडेट करने और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करने के लिए कहा गया है। यदि तय समय सीमा के भीतर जवाब या अपडेट नहीं दिया जाता है, तो उनकी सब्सिडी अस्थायी या स्थायी रूप से बंद की जा सकती है। सरकार की LPG सब्सिडी योजना मूल रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए शुरू की गई थी, ताकि उन्हें रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने लोगों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील भी की थी, जिसमें कई सक्षम परिवारों ने इसका लाभ लेना बंद कर दिया था। अब सरकार इस प्रक्रिया को और अधिक तकनीकी और सख्त तरीके से लागू कर रही है। नए सिस्टम में परिवार के अन्य सदस्यों की आय को भी जांच के दायरे में शामिल किया जा रहा है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में परिवार आर्थिक रूप से पात्र है या नहीं। इसके लिए विभिन्न डेटाबेस को एकीकृत किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत लाभ उठाने की संभावना को खत्म किया जा सके। जिन उपभोक्ताओं को इस तरह के अलर्ट मिले हैं, उन्हें अपने KYC दस्तावेज और आय से जुड़ी जानकारी को अपडेट करने की सलाह दी जा रही है। यह प्रक्रिया अधिकतर डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकती है, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सब्सिडी बंद होने के बाद भी उपभोक्ता बाजार मूल्य पर सिलेंडर खरीद सकते हैं। कुल मिलाकर यह कदम सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और सब्सिडी को सही हाथों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह की डिजिटल जांच प्रणाली और अधिक व्यापक हो सकती है, जिससे सरकारी सहायता योजनाएं अधिक प्रभावी और लक्षित बन सकें।
क्या हंता वायरस भारत में पहुंच चुका है? डॉक्टरों ने बताया सच्चाई और सावधानियां..

नई दिल्ली । हाल ही में वैश्विक स्तर पर कुछ संक्रमण मामलों की खबरों के बाद Hantavirus को लेकर आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या यह वायरस भारत में भी प्रवेश कर चुका है और क्या यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने इस विषय पर स्थिति को स्पष्ट करते हुए लोगों को राहत दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में भारत में हंता वायरस के फैलने जैसी कोई स्थिति नहीं है। न तो देश में इसके बड़े स्तर पर मामले सामने आए हैं और न ही किसी प्रकार की महामारी जैसी स्थिति बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जानकारी और सावधानी ही सबसे प्रभावी उपाय है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यह वायरस नया नहीं है और लंबे समय से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके मामले दर्ज होते रहे हैं। यह मुख्य रूप से उन जानवरों, विशेषकर चूहों और कृंतकों के माध्यम से फैलता है, जो संक्रमण के वाहक माने जाते हैं। इनसे संपर्क या उनके द्वारा दूषित स्थानों के संपर्क में आने पर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इस वायरस से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाता है कि यह शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में यह फेफड़ों पर असर डाल सकता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई और गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं कुछ परिस्थितियों में यह किडनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे शरीर में रक्तचाप और अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि आमतौर पर यह वायरस इंसान से इंसान में बहुत सीमित परिस्थितियों में ही फैलता है, जिससे इसके व्यापक प्रसार की संभावना कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे कोविड जैसी तेजी से फैलने वाली बीमारी की श्रेणी में नहीं रखा जाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के किसी भी संक्रमण से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता है। घरों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखना, भोजन को सुरक्षित रखना और चूहों जैसे वाहकों से दूरी बनाना आवश्यक है। इसके अलावा हाथ धोने और बुनियादी स्वच्छता आदतों का पालन करने से भी संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल चिकित्सा विशेषज्ञों का एकमत मत है कि भारत में हंता वायरस को लेकर किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। ऐसे में लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय विश्वसनीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए और किसी भी तरह की अनावश्यक चिंता से बचना चाहिए।
धनपुरी में मंदिर के पास खंभे से लटका मिला युवक का शव, इलाके में सनसनी

शहडोल, मध्यप्रदेश: शहडोल जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब खेर माता मंदिर के पास स्थित छोटी तालिया इलाके में एक युवक का शव खंभे से लटका मिला। सुबह टहलने निकले स्थानीय लोगों ने शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद धनपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मृतक की पहचान पुरानी बस्ती धनपुरी निवासी बबलू कोल (21) के रूप में हुई है, जो मजदूरी का काम करता था। परिजनों के अनुसार, बबलू रविवार रात घर से निकला था, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटा। अगली सुबह उसका शव मिलने की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया और परिजन मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल से नहीं मिला सुसाइड नोट पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना है, लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इसी कारण मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं और मौत के कारणों को लेकर संशय बना हुआ है। पुलिस ने शव को खंभे से नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस जांच में जुटी, कई एंगल पर पड़ताधनपुरी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस परिजनों से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि युवक की मानसिक स्थिति कैसी थी और उसकी अंतिम गतिविधियां क्या थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना देर रात की हो सकती है क्योंकि सुबह मंदिर की ओर जाने वाले लोगों ने शव देखा। कुछ लोग इसे आत्महत्या मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संदिग्ध घटना बता रहे हैं। इलाके में दहशत का माहौघटना के बाद इलाके में डर और तनाव का माहौल है। मंदिर के आसपास होने के कारण लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है ताकि सच सामने आ सके।
ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड

नई दिल्ली । आज के बदलते दौर में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऑफिस जाकर काम करने की पारंपरिक व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक नए मॉडल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां घर से काम करना या कहीं से भी काम करने की आजादी लोगों के लिए एक नया विकल्प बनता जा रहा है। इस बदलाव के बीच चर्चा तब और तेज हो गई जब वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने आया, जिसमें इसे सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया गया। इस नए कामकाज के मॉडल में यह माना जा रहा है कि अगर लोग रोजाना ऑफिस जाने की बजाय घर से काम करें, तो इससे ट्रैफिक कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इससे उन लोगों को फायदा मिल सकता है जिन्हें परिवार की जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़नी पड़ती है, खासकर महिलाएं, जो घर से ही काम करके करियर को आगे बढ़ा सकती हैं। वर्क फ्रॉम होम और रिमोट वर्क को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर होता है। वर्क फ्रॉम होम आमतौर पर उसी कंपनी के लिए घर से काम करने की सुविधा होती है, जहां कर्मचारी का ऑफिस पहले से होता है, जबकि रिमोट वर्क में व्यक्ति किसी भी जगह से काम कर सकता है और किसी एक निश्चित स्थान से जुड़ा नहीं होता। यह मॉडल पूरी तरह लोकेशन-इंडिपेंडेंट माना जाता है। इस बदलाव के साथ छात्रों और युवाओं के लिए नौकरी के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। डिजिटल दौर में कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया हैंडलिंग, ऑनलाइन ट्यूशन और बेसिक डेटा वर्क जैसी नौकरियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए घर से ही शुरुआत की जा सकती है और धीरे-धीरे अनुभव के साथ बेहतर अवसर भी मिलते हैं। हालांकि इस बढ़ते ट्रेंड के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। घर से काम करने में कई बार एकांत महसूस होता है और काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा तकनीकी समस्याएं जैसे इंटरनेट या बिजली की दिक्कत भी काम को प्रभावित कर सकती हैं। सबसे बड़ी चिंता वर्क फ्रॉम होम के नाम पर होने वाले फ्रॉड को लेकर भी है। कई बार फर्जी कंपनियां आकर्षक कमाई के वादे करके लोगों से पैसे मांगती हैं या गलत तरीके से नौकरी का लालच देती हैं। इसलिए किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में हाइब्रिड मॉडल यानी ऑफिस और घर दोनों का मिश्रण अधिक देखने को मिल सकता है। यह बदलाव जहां एक तरफ सुविधा और लचीलापन लेकर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सतर्कता और समझदारी की भी जरूरत को बढ़ा रहा है।
हरियाणा के छात्र ने खोजे UPI के 3 खतरनाक बग, साइबर फ्रॉड रोकने के लिए बनाया नया सिक्योर सिस्टम

नई दिल्ली। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के तलवाना खेड़ी गांव के बीटेक कंप्यूटर साइंस छात्र अंकित ठाकुर ने साइबर ठगी की एक घटना के बाद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उनके पिता, जो पेशे से ड्राइवर हैं, के साथ 20 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी, जिसके बाद अंकित ने UPI सिस्टम की गहराई से स्टडी शुरू की। रिसर्च के दौरान अंकित ने दावा किया कि उन्होंने UPI सिस्टम में तीन गंभीर तकनीकी खामियां (बग्स) खोजी हैं। इनमें क्रोम इंटेंट वल्नरेबिलिटी शामिल है, जिसके जरिए फर्जी वेबसाइट्स बिना अनुमति पेमेंट ऐप खोल सकती हैं। दूसरी खामी ऑथेंटिकेशन बाईपास से जुड़ी है, जिससे कुछ मामलों में लॉक और बायोमेट्रिक सिक्योरिटी को दरकिनार किया जा सकता है। तीसरी और सबसे गंभीर खामी ऑडियो हाईजैक बताई गई है, जिसमें बैकग्राउंड में चल रहे फर्जी ऐप्स यूजर को गलत निर्देश देकर ठगी के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इन खामियों को समझने के बाद अंकित ने एक वैकल्पिक और अधिक सुरक्षित UPI सिस्टम और मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने का दावा किया है। उनका कहना है कि यह नया सिस्टम न केवल साइबर फ्रॉड को रोक सकता है, बल्कि गलत ट्रांजेक्शन से होने वाले नुकसान को भी कम करेगा। अंकित ने अपनी तकनीक को पेटेंट करने की बजाय इसे भारत सरकार को मुफ्त देने की पेशकश की है, ताकि देशभर के UPI यूजर्स को सुरक्षित डिजिटल पेमेंट अनुभव मिल सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ सुरक्षा रिपोर्ट्स गूगल के सिक्योरिटी सिस्टम तक भी भेजी हैं, जिनमें से एक खामी को पहले ही ठीक किया जा चुका है। अंकित का कहना है कि अगर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सहयोग करें तो इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तर पर साइबर अपराध रोकने में किया जा सकता है और डिजिटल इंडिया को और सुरक्षित बनाया जा सकता है
साइबर सुरक्षा अलर्ट: फोटो लीक या अकाउंट हैक हो जाए तो घबराएं नहीं, ये आसान तरीके बचाएंगे आपकी डिजिटल पहचान

नई दिल्ली। नैशनल टेक्नॉलजी डे के मौके पर साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेटर शुभम त्रिपाठी ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में फोटो लीक होना या सोशल मीडिया अकाउंट हैक होना आम खतरा बन चुका है, लेकिन सही कदम उठाकर इससे बचा और नुकसान कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले अपनी पर्सनल फोटो और वीडियो को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें प्राइवेट गैलरी या हिडन फोल्डर में रखना चाहिए और सोशल मीडिया अकाउंट को लॉक करके रखना जरूरी है ताकि अनजान लोग पहुंच न बना सकें। अगर फोटो या वीडियो लीक हो जाए तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग सिस्टम का इस्तेमाल करें और अलग-अलग अकाउंट्स से रिपोर्ट कर उसे जल्दी हटवाया जा सकता है, वहीं stopncii.org जैसी वेबसाइट पर बिना पहचान बताए भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। इसके अलावा cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर गृह मंत्रालय की मदद से कंटेंट हटवाया जा सकता है और गंभीर मामलों में नजदीकी साइबर सेल से भी सहायता ली जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार अकाउंट हैक होने से बचने के लिए Two-Factor Authentication (2FA) जरूर ऑन करें, जिससे पासवर्ड लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। अगर अकाउंट हैक हो जाए तो इंस्टाग्राम या अन्य प्लेटफॉर्म के “/hacked” रिकवरी पेज के जरिए वीडियो KYC और पहचान वेरिफिकेशन करके अकाउंट वापस पाया जा सकता है।
फेसबुक से शुरू हुआ प्यार, बना खौफनाक मर्डर केस: एक महिला और तीन मर्दों की सनसनीखेज कहानी

नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश: सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती और रिश्तों का उलझा जाल नरसिंहपुर में एक खौफनाक हत्या तक पहुंच गया। फेसबुक के जरिए बने प्रेम संबंधों, पुराने रिश्तों की जलन और बढ़ती नजदीकियों ने मिलकर ऐसी साजिश रची, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। मामला रीना किरार नाम की महिला से जुड़ा है, जो अपने पति से अलग रह रही थी। इसी दौरान उसकी फेसबुक पर राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी वीरू जाट से दोस्ती हुई। बातचीत धीरे-धीरे बढ़ी और वीरू का उसके घर आना-जाना भी शुरू हो गया। लेकिन इसी बीच कहानी में एक और मोड़ तब आया, जब रीना के पुराने प्रेमी अरुण पटेल को इस नए रिश्ते की जानकारी लगी। अरुण पटेल और रीना के बीच पहले से प्रेम संबंध थे और अरुण ही उसके घर का खर्च भी उठा रहा था। लेकिन रीना की बढ़ती नजदीकियां वीरू जाट से उसे नागवार गुजरीं। गुस्से और जलन में उसने रीना के साथ मिलकर एक खतरनाक साजिश रच डाली। योजना के तहत वीरू जाट को नरसिंहपुर के साईंखेड़ा इलाके में स्थित घर पर बुलाया गया। वहां पहले से तैयार प्लान के मुताबिक उस पर बेसबॉल बैट से बेरहमी से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद शव को रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र में टेडिया पुल के नीचे फेंक दिया गया, ताकि पहचान और शक दोनों से बचा जा सके। हालांकि पुलिस की त्वरित जांच में यह पूरा मामला खुल गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रीना किरार, उसके प्रेमी अरुण पटेल और उनके एक सहयोगी हरणाम किरार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हत्या प्रेम संबंधों में पैदा हुई रंजिश और ईर्ष्या का नतीजा थी। रीना ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि पुराने और नए रिश्तों के बीच टकराव ने इस वारदात को जन्म दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला और उसके सहयोगियों ने हत्या को हादसा दिखाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सबूतों और पूछताछ के आधार पर पूरा षड्यंत्र उजागर हो गया। यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्तों और उनमें छिपे खतरों को उजागर करता है, जहां एक क्लिक ने जिंदगी और मौत के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया।
Vivo T5 Pro: 9020mAh बैटरी और 144Hz डिस्प्ले के साथ आया पावरफुल स्मार्टफोन

नई दिल्ली। अगर आप एक ऐसा स्मार्टफोन ढूंढ रहे हैं जिसमें बैटरी, परफॉर्मेंस और डिस्प्ले तीनों मजबूत हों, तो Vivo T5 Pro एक दमदार विकल्प बनकर सामने आता है। यह फोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जिन्हें लंबे समय तक बैटरी बैकअप और स्मूथ एक्सपीरियंस चाहिए। फोन में 6.83-इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट के साथ बेहद स्मूथ और शार्प विजुअल्स देता है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर और 12GB तक RAM का सपोर्ट मिलता है, जिससे मल्टीटास्किंग और गेमिंग आसान हो जाती है। बैटरी इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जिसमें 9,020mAh की पावरफुल बैटरी दी गई है। यह 90W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है, जिससे फोन जल्दी चार्ज होकर लंबे समय तक चलता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट के साथ) और 2MP डेप्थ सेंसर मिलता है। वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। कुल मिलाकर, यह फोन बैटरी और परफॉर्मेंस चाहने वाले यूजर्स के लिए एक बैलेंस्ड और पावरफुल पैकेज साबित हो सकता है।
चीन ने 6G ट्रायल को दी मंजूरी: 6GHz बैंड पर शुरू होगा टेस्ट, भारत भी रेस में तेज़ी से बढ़ा रहा कदम

नई दिल्ली। चीन ने 6G तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मोबाइल संचार सिस्टम के लिए ट्रायल फ्रीक्वेंसी के उपयोग को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MIIT) ने IMT-2030 (6G) प्रमोशन ग्रुप को 6GHz बैंड पर परीक्षण की अनुमति दी है, जिससे देश के चुनिंदा क्षेत्रों में 6G ट्रायल शुरू किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च को बढ़ावा देना और इसे औद्योगिक स्तर पर विकसित करना है। इन ट्रायल्स में इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) द्वारा निर्धारित प्रमुख फीचर्स जैसे अल्ट्रा-हाई डेटा स्पीड, बेहद कम लेटेंसी, बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड सेंसिंग पर काम किया जाएगा। इस चरण में शोधकर्ता तकनीकी चुनौतियों को हल करने के लिए R&D और वेरिफिकेशन टेस्टिंग करेंगे। चीन का IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप, जिसमें टेलीकॉम कंपनियां, रिसर्च इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटीज शामिल हैं, 6G विकास को तेज करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह कदम 5G और 5G-एडवांस्ड डिप्लॉयमेंट के बाद अगला बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। उधर भारत भी 6G तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, 6G केवल तेज इंटरनेट नहीं होगा, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंट इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा। भारत इस क्षेत्र में पेटेंट और रिसर्च के स्तर पर मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि 6G स्पेक्ट्रम आवंटन और वैश्विक मानकों को लेकर अंतिम निर्णय अभी ITU और 3GPP द्वारा लिया जाना बाकी है। ऐसे में चीन की यह तेज़ प्रगति वैश्विक 6G रेस को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना रही है, जिसमें भारत भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है।