फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया “सोना न खरीदने” जैसी अपील के बाद सोशल मीडिया पर एक पुराना राजनीतिक दावा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक कथित 1967 की अखबार कटिंग शेयर की जा रही है। इस दावे के जरिए कहा जा रहा है कि इंदिरा गांधी ने भी आर्थिक संकट के दौरान लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी, लेकिन जांच में यह दावा फर्जी पाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कथित “द हिंदू” अखबार की कटिंग 6 जून 1967 की बताई जा रही है, जिसमें इंदिरा गांधी के नाम से “सोना न खरीदने” की अपील का दावा किया गया है। लेकिन खुद अखबार “द हिंदू” ने इस कटिंग को पूरी तरह फर्जी और डिजिटल रूप से एडिटेड बताया है और स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई पेज उनके आर्काइव में मौजूद नहीं है। अखबार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। तथ्य यह है कि 1960 के दशक में भारत विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक दबाव से गुजर रहा था, लेकिन उस समय सोना खरीदने पर ऐसी कोई राष्ट्रीय स्तर की औपचारिक रोक या सार्वजनिक अपील नहीं की गई थी। इस विवाद के बीच बीजेपी नेताओं द्वारा भी इस कथित कटिंग को शेयर किए जाने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस दावे का हवाला देते हुए पीएम मोदी की अपील का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि आज की आर्थिक अपील को ऐतिहासिक रूप से गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि अतीत में भी आर्थिक अनुशासन की बातें होती रही हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैक्ट-चेक और राजनीतिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
The Gold Story: सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल

The Gold Story:नई दिल्ली । देश में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संसाधनों के सीमित उपयोग और सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर की गई अपील के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बयान के बाद जहां विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक स्थिति और नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी इसे लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है। प्रधानमंत्री द्वारा लगातार दो दिनों तक पेट्रोल-डीजल के सीमित इस्तेमाल और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील को कई लोग एहतियाती कदम मान रहे हैं, लेकिन व्यापारिक वर्ग का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक अपीलों का सीधा असर बाजार की गतिविधियों और लोगों की खरीदारी की मानसिकता पर पड़ता है। खासकर ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि सोना-चांदी की खरीद को लेकर पैदा हुई आशंका बाजार में मंदी ला सकती है। राजनीतिक मोर्चे पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही हो, तो सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच अचानक इस तरह की अपीलें आने से असमंजस की स्थिति पैदा होती है और इसका असर आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों पर भी पड़ता है। STOCK MARKET TODAY: शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा वहीं, सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के रुख पर नाराज़गी जाहिर की है। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि देशभर में लाखों परिवार इस उद्योग पर निर्भर हैं और यदि बाजार में खरीदारी कम होती है, तो इसका असर सीधे रोजगार और छोटे कारोबारियों की आय पर पड़ेगा। उनका मानना है कि किसी भी बड़े फैसले या सार्वजनिक संदेश से पहले उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी। व्यापारियों का यह भी कहना है कि ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों में सोना-चांदी की खरीदारी लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रही है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता बाजार की गति को प्रभावित कर सकती है। इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि यदि जनता से बार-बार त्याग और खर्च कम करने की अपील की जा रही है, तो यह देश की आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है। विपक्ष ने इसे आम लोगों पर मानसिक दबाव बनाने वाला कदम बताया है। Pakistan Russia Relations: रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते हालांकि, सरकार की ओर से इन तमाम आशंकाओं को खारिज किया गया है। केंद्रीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि नागरिकों से केवल संसाधनों के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की गई है, ताकि ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके। फिलहाल, इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारिक जगत में भी नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर आगे क्या रुख अपनाती है और बाजार में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।
मंगलवार व्रत के नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा हनुमान जी का आशीर्वाद

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है। इस दिन भक्त व्रत रखकर बजरंगबली की पूजा करते हैं और जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में शक्ति, साहस और सफलता लाता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि व्रत में नियमों का पालन न किया जाए तो उसका पूरा फल नष्ट भी हो सकता है। व्रत की सही विधि क्या है?व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान से होती है। इसके बाद साफ लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। फिर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाया जाता है। उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और पान के पत्तों की माला अर्पित की जाती है। भोग के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी चढ़ाना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जप और मंगलवार व्रत कथा का पाठ करना जरूरी होता है। मंगलवार व्रत में जरूर बचें इन गलतियों सेधार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ नियमों का पालन न करने से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है:– व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया हैप्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिएमानसिक और शारीरिक पवित्रता बनाए रखना जरूरी हैव्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया हैदिनभर निराहार रहकर संयम रखना चाहिए शाम की पूजा के बाद ही गेहूं और गुड़ से बना सादा भोजन करना उचित माना जाता है, उसमें भी नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। आस्था और संयम का प्रतीक है मंगलवार व्रतमंगलवार व्रत केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त पूरी निष्ठा और नियमों के साथ हनुमान जी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से भय, संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
Celina Jaitly Divorce Case: सेलिना जेटली की दर्दभरी कहानी: बेटे की मौत, रिश्तों में तनाव और अब बच्चों के लिए कानूनी लड़ाई

Celina Jaitly Divorce Case: नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Celina Jaitly एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। फिल्मों से लंबे समय से दूर रहने वाली सेलिना इन दिनों अपने वैवाहिक विवाद, बच्चों की कस्टडी और निजी संघर्षों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में उन्होंने अपने पति पीटर हाग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और कानूनी लड़ाई शुरू की है। सेलिना ने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि बीते कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार कई निजी दुख झेले हैं। उन्होंने अपने बेटे शमशेर को जन्म के कुछ समय बाद ही खो दिया था। बच्चे को एक दुर्लभ हृदय संबंधी बीमारी थी, जिसके इलाज के लिए उन्होंने कई विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ली, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वह अपने बेटे को बचा नहीं सकीं। इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। बेटे की मौत के कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया था। लगातार हुए इन पारिवारिक हादसों ने उनके जीवन को गहरे दुख में डाल दिया। इसके बाद उनकी मां का निधन भी हो गया, जिससे सेलिना पूरी तरह अकेली और भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करने लगीं। TAMIL NEW MOVIE: साउथ सिनेमा में बढ़ा उत्साह, दशकों बाद साथ दिखेंगे रजनीकांत-कमल हासन, तृषा भी बन सकती हैं हिस्सा इसी बीच उनके वैवाहिक रिश्ते में भी तनाव बढ़ता गया। सेलिना ने आरोप लगाया कि शादी के दौरान उन्हें मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर उन्हें अपमानित किया गया और रिश्ते में लगातार तनाव बना रहा। उनके अनुसार, हालात इतने खराब हो गए थे कि उन्हें अपना घर छोड़कर भारत लौटना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं, जहां उन्हें अपने बच्चों से दूर रहना पड़ा। अब वह अपने बच्चों की कस्टडी और उनसे मिलने के अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। सेलिना का कहना है कि एक मां के लिए अपने बच्चों से दूर रहना सबसे बड़ा दर्द होता है और यही संघर्ष इस समय उनकी जिंदगी का सबसे कठिन हिस्सा है। हाल ही में साझा किए गए एक भावुक वीडियो में सेलिना अपने दिवंगत बेटे शमशेर की कब्र के पास नजर आईं। वीडियो में वह बेटे की कब्र को साफ करते हुए भावुक दिखाई दीं। इस दृश्य ने उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया। कई लोगों ने उनके साहस और संघर्ष की सराहना की है। सेलिना ने यह भी कहा कि वह अब अपने अधिकारों और बच्चों के भविष्य के लिए मजबूती से खड़ी हैं। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने अपने जीवन में आए इस कठिन दौर को बेहद दर्दनाक बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह अपने बच्चों के लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया में है और इसकी जांच जारी है। वहीं, सेलिना जेटली की यह कहानी केवल एक अभिनेत्री के संघर्ष की नहीं, बल्कि एक मां के दर्द, टूटते रिश्तों और अपने बच्चों के लिए लड़ने के साहस की कहानी बन गई है।
TAMIL NEW MOVIE: साउथ सिनेमा में बढ़ा उत्साह, दशकों बाद साथ दिखेंगे रजनीकांत-कमल हासन, तृषा भी बन सकती हैं हिस्सा

TAMIL NEW MOVIE: नई दिल्ली । तमिल सिनेमा में इन दिनों एक ऐसी फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है, जिसने फैंस की उत्सुकता को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। वजह सिर्फ एक बड़ी स्टारकास्ट नहीं, बल्कि दो दिग्गज सुपरस्टार्स का लंबे समय बाद एक साथ आना है। अब इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसने फिल्म को लेकर उत्साह को और बढ़ा दिया है। चर्चा है कि लोकप्रिय अभिनेत्री तृषा कृष्णन भी इस मेगा प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकती हैं। फिल्म को लेकर पहले ही दर्शकों के बीच जबरदस्त माहौल बना हुआ है, क्योंकि इसमें रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। दोनों सितारों ने अपने करियर में अलग-अलग कई ऐतिहासिक फिल्में दी हैं, लेकिन लंबे समय बाद एक ही स्क्रीन पर उनकी वापसी को लेकर फैंस बेहद उत्साहित हैं। अब अगर तृषा कृष्णन भी इस फिल्म से जुड़ती हैं, तो यह प्रोजेक्ट और भी भव्य बन सकता है। इंडस्ट्री में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि फिल्म के लिए अभिनेत्री से बातचीत जारी है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी तरह की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि निर्माता इस फिल्म को तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्मों में शामिल करने की तैयारी में हैं। फिल्म के निर्देशक इस प्रोजेक्ट को बेहद बड़े स्तर पर तैयार करने में जुटे हुए हैं। कहानी, लोकेशन, तकनीकी टीम और कलाकारों के चयन पर तेजी से काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि फिल्म का विजुअल स्केल और प्रस्तुति दर्शकों को एक बिल्कुल अलग सिनेमाई अनुभव देने वाली है। इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया और फिल्म जगत में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की भी है कि आखिर मुख्य भूमिका किस सुपरस्टार की होगी। दोनों दिग्गज कलाकारों की लोकप्रियता इतनी बड़ी है कि फैंस लगातार इस बात को लेकर अपनी राय दे रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म की असली ताकत इसकी स्टारकास्ट नहीं, बल्कि इन कलाकारों का एक साथ आना है, जो इसे खास बना रहा है। तृषा कृष्णन का नाम सामने आने के बाद फिल्म के प्रति दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। अभिनेत्री पहले भी कई बड़े सितारों के साथ सफल फिल्में दे चुकी हैं और उनकी मौजूदगी इस प्रोजेक्ट में एक नया आकर्षण जोड़ सकती है। फैंस अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह साफ हो सके कि वह इस फिल्म का हिस्सा बनेंगी या नहीं। फिल्म की शूटिंग को लेकर भी तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इसकी शूटिंग शुरू हो सकती है और इसके लिए बड़े स्तर पर सेट तथा तकनीकी व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।
STOCK MARKET TODAY: शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

STOCK MARKET TODAY: नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की करीब ₹15 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स में 1500 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे फिसल गया। बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई, आयात बिल और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है। Sheopur Adivasi Protest: बिजली-पानी की मांग को लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण इसके साथ ही भारतीय रुपये में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। रुपये की कमजोरी का असर विदेशी फंड्स के रिटर्न पर पड़ता है, जिसके कारण वे बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। बड़े वैश्विक फंड जोखिम कम करने के लिए लगातार भारतीय इक्विटी से दूरी बना रहे हैं। इसका असर खासतौर पर बड़े शेयरों और बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिला, जहां भारी बिकवाली दर्ज की गई। बाजार में गिरावट को और तेज करने में डेरिवेटिव एक्सपायरी का भी बड़ा योगदान रहा। कमजोर सेंटीमेंट के बीच ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन घटानी शुरू कर दी, जिससे अचानक वॉलेटिलिटी बढ़ गई और बाजार में गिरावट और गहरी हो गई। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। निवेशकों को डर है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। हालांकि कमोडिटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में कुछ मजबूती जरूर देखने को मिली, क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों का इन कंपनियों को लाभ मिल सकता है। IRCTC Recruitment: आईआरसीटीसी में 49 पदों पर भर्ती का बड़ा अवसर, हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के लिए वॉक-इन इंटरव्यू घोषित बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार दबाव वाले दौर में है और निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की जरूरत है। उनका कहना है कि ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों पर लंबी अवधि के नजरिए से ध्यान देना चाहिए। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही तय करेगा कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या गिरावट का दबाव और बढ़ेगा।
Sheopur Adivasi Protest: बिजली-पानी की मांग को लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण

HIGHLIGHTS: बिजली-पानी की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण आदिवासी ग्रामीणों ने गेट पर बैठकर किया प्रदर्शन पीएम आवास मिलने के बाद भी बस्ती में नहीं बिजली महिलाएं 2 किलोमीटर दूर से ला रहीं पानी प्रशासन ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन Sheopur Adivasi Protest: मध्यप्रदेश। श्योपुर जिले की कराहल तहसील के मजरा हनुमानखेड़ा के आदिवासी ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन किया। बता दें कि प्रदर्शन की सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर रुपेश उपाध्याय मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। पंजाब से अमेरिका पहुंचे परिवार के बेटे ने रचा इतिहास, 176 छात्रों का पूरा एजुकेशन लोन चुकाकर बने मिसाल पीएम आवास मिले, लेकिन बिजली नहीं ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान तो बन गए हैं, लेकिन अब तक बिजली के खंभे और डीपी नहीं लगाई गई। बिजली न होने के कारण परिवारों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में रोशनी नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत.. 2 किलोमीटर दूर मिल रहा पानी बस्ती में पेयजल संकट भी लगातार बना हुआ है। महिलाओं को भीषण गर्मी में दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की व्यवस्था नहीं होने से मजदूरी और घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। महिलाओं और बच्चों ने प्रशासन को बताया कि पहले फसल कटने के बाद बिजली लाइन विस्तार का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव प्रशासन ने दिया समाधान का आश्वासन धरने के दौरान ग्रामीणों ने जल्द बिजली और पानी की व्यवस्था शुरू करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल किशोर, खन्ना और बचनू आदिवासी सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। अपर कलेक्टर ने ग्रामीणों को समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया।
Pakistan Russia Relations: रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते

Pakistan Russia Relations: नई दिल्ली। पाकिस्तान और रूस के बीच तेजी से बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ऊर्जा संकट, तेल व्यापार और सैन्य सहयोग को लेकर दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। रूस में पाकिस्तान के राजदूत Faisal Niaz Tirmizi ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान एक बार फिर रूस से बड़े पैमाने पर तेल आयात बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इस बयान के बाद क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच रूसी तेल आयात बढ़ाने की योजना पर काम शुरू किया है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में सस्ता रूसी तेल इस्लामाबाद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान ने पहली बार रूस से सस्ते तेल खरीदने की पहल तत्कालीन प्रधानमंत्री Imran Khan के कार्यकाल में की थी। इमरान खान की मॉस्को यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत तेज हुई थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में पाकिस्तान ने रूस को रियायती दरों पर कच्चे तेल का पहला आधिकारिक ऑर्डर दिया। जून 2023 में रूसी कच्चे तेल की पहली खेप कराची बंदरगाह पहुंची थी, जिसमें करीब 45 हजार मीट्रिक टन यूराल क्रूड शामिल था। खास बात यह रही कि पाकिस्तान ने इस तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर की बजाय चीनी युआन में किया था। सस्ते हवाई सफर का सुनहरा अवसर: Indigo ने लॉन्च किया ‘ग्रेट कनेक्शंस फेस्ट’, टिकट और एक्स्ट्रा सर्विस पर भारी छूट हालांकि बाद में पाकिस्तान ने रूसी तेल आयात धीमा कर दिया था। इसकी बड़ी वजह रूसी क्रूड का भारी होना और खाड़ी देशों की तुलना में ट्रांसपोर्ट लागत ज्यादा होना बताया गया। लेकिन अब वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान फिर से रूस की ओर झुकता दिखाई दे रहा है। सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रक्षा और सैन्य सहयोग में भी रूस और पाकिस्तान के संबंध मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और सुरक्षा सहयोग पहले से जारी हैं। यही कारण है कि रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को भारत के लिए रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पारंपरिक रूप से भारत का करीबी सहयोगी रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक राजनीति में मॉस्को अब दक्षिण एशिया में अपने विकल्प भी मजबूत करना चाहता है। वहीं पाकिस्तान अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस के साथ रिश्ते गहरे करने में जुटा है। हालांकि भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी अब भी बेहद मजबूत मानी जाती है, लेकिन पाकिस्तान और रूस के बढ़ते संपर्कों ने क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है।
सस्ते हवाई सफर का सुनहरा अवसर: Indigo ने लॉन्च किया ‘ग्रेट कनेक्शंस फेस्ट’, टिकट और एक्स्ट्रा सर्विस पर भारी छूट

नई दिल्ली । गर्मियों की छुट्टियों का सीजन शुरू होने से पहले हवाई यात्रियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। एयरलाइन कंपनी Indigo ने अपने यात्रियों के लिए एक विशेष ट्रैवल ऑफर लॉन्च किया है, जिसके तहत घरेलू और इंटरनेशनल कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर आकर्षक छूट दी जा रही है। इस ऑफर का उद्देश्य यात्रियों को कम खर्च में सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा का मौका देना है। नई योजना के तहत घरेलू कनेक्टिंग फ्लाइट्स के टिकट की शुरुआती कीमत 3999 रुपये रखी गई है, जबकि इंटरनेशनल यात्रा के लिए शुरुआती किराया 9999 रुपये तय किया गया है। यह ऑफर खासतौर पर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जो छुट्टियों के दौरान परिवार या दोस्तों के साथ यात्रा की योजना बना रहे हैं। एयरलाइन ने केवल टिकट किराए में ही राहत नहीं दी है, बल्कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई अतिरिक्त सेवाओं पर भी विशेष छूट की घोषणा की है। इसमें फास्ट फॉरवर्ड जैसी सेवाएं कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे एयरपोर्ट प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया जा सके। इसके अलावा इमरजेंसी XL सीट्स भी रियायती दरों पर उपलब्ध होंगी, ताकि यात्रियों को ज्यादा आरामदायक सफर का अनुभव मिल सके। यह ऑफर केवल कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर लागू किया गया है। यानी वे यात्री जो किसी गंतव्य तक पहुंचने के लिए एक से अधिक उड़ानों का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। डायरेक्ट फ्लाइट्स को इस ऑफर में शामिल नहीं किया गया है। बुकिंग के लिए एक सीमित समय तय किया गया है, जिसके दौरान यात्री अपने टिकट रिजर्व कर सकते हैं। वहीं यात्रा की अवधि को भी कई महीनों तक रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें। एयरलाइन का मानना है कि इस पहल से यात्रियों को बजट फ्रेंडली यात्रा विकल्प मिलेगा और समर ट्रैवल सीजन में उनकी योजना बनाना आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छुट्टियों के मौसम में यात्रा की मांग तेजी से बढ़ती है, ऐसे में एयरलाइन कंपनियां आकर्षक ऑफर के जरिए यात्रियों को लुभाने की कोशिश करती हैं। इस तरह की योजनाएं यात्रियों को पहले से यात्रा प्लान करने के लिए भी प्रेरित करती हैं। इसके साथ ही एयरलाइन ने बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अन्य सुविधाजनक विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं, जिससे यात्री घर बैठे आसानी से टिकट बुक कर सकें।
America Disaster Management: ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान

America Disaster Management: नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए पूर्व नेवी सील अधिकारी कैमरन हैमिल्टन को संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी यानी फ़ेमा की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यही कैमरन हैमिल्टन एक साल पहले एजेंसी के अस्थायी प्रमुख पद से हटा दिए गए थे। अब उनकी वापसी ने अमेरिकी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। व्हाइट हाउस की ओर से सोमवार को हैमिल्टन के नामांकन की घोषणा की गई। अगर अमेरिकी सीनेट उनकी नियुक्ति को मंजूरी देती है, तो वे आपातकालीन प्रबंधन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया मामलों में ट्रंप प्रशासन के सबसे अहम सलाहकारों में शामिल होंगे। उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के साथ मिलकर अमेरिका की आपदा प्रबंधन रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। कैमरन हैमिल्टन पूर्व नेवी सील अधिकारी रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों में उनका लंबा अनुभव माना जाता है। हालांकि पिछले साल उन्हें फ़ेमा के कार्यवाहक प्रमुख पद से हटा दिया गया था। उस समय उन्होंने एजेंसी के अस्तित्व और उसकी जरूरत का खुलकर समर्थन किया था, जबकि ट्रंप प्रशासन लगातार फ़ेमा को कमजोर करने या खत्म करने जैसे संकेत दे रहा था। यही वजह थी कि उनके हटाए जाने को लेकर उस समय काफी विवाद भी हुआ था। अब उनकी वापसी ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका में प्राकृतिक आपदाओं, तूफानों और आपात स्थितियों से निपटने को लेकर संघीय एजेंसियों की भूमिका पर बहस तेज है। ट्रंप पहले भी फ़ेमा की कार्यप्रणाली की आलोचना कर चुके हैं और कई मौकों पर यह संकेत दे चुके हैं कि राज्यों को आपदा प्रबंधन में ज्यादा जिम्मेदारी उठानी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हैमिल्टन की दोबारा नियुक्ति ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति का हिस्सा हो सकती है। एक तरफ ट्रंप फ़ेमा में बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना है जो एजेंसी की कार्यप्रणाली को अंदर से समझता है और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में मजबूत अनुभव रखता है। अमेरिका में अब सबकी नजर सीनेट की मंजूरी पर टिकी है। अगर नामांकन को हरी झंडी मिलती है तो कैमरन हैमिल्टन की वापसी अमेरिकी आपदा प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलावों का संकेत मानी जा सकती है।