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Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

cm mohan yadav

HIGHLIGHTS: भाजपा ने तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार की घोषणा कर राजनीतिक माहौल बदल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही तीसरी सीट को लेकर आत्मविश्वास जताया था। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई। नामांकन विवाद के बाद कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर सवाल उठे। राज्यसभा चुनाव ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस और चर्चा को जन्म दिया।  Rajya Sabha Election: भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने दो उम्मीदवारों की घोषणा के बाद तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारकर राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही संकेत दिया था कि राज्यसभा की तीसरी सीट भी भाजपा के खाते में जा सकती है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई और विपक्षी दल कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठने लगे। 7.8% जीडीपी ग्रोथ ने दिखाई ताकत, पर अर्थव्यवस्था के सामने बनी चुनौतियां भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार की घोषणा कर बढ़ाया दबाव भाजपा ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित करने के बाद तीसरे प्रत्याशी की घोषणा की। इस फैसले को पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सार्वजनिक रूप से विश्वास जताया था कि तीसरी सीट पर भी भाजपा की स्थिति मजबूत रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम ने चुनावी समीकरणों को बदल दिया और विपक्ष पर अतिरिक्त दबाव बना दिया। 1G और 2G से कई कदम आगे 3G इथेनॉल, खाद्य संकट की चिंता खत्म कर स्वच्छ ऊर्जा को देगा नई दिशा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर उठे सवाल कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गया था। हालांकि उनके नामांकन को लेकर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा का आरोप है कि नामांकन से संबंधित दस्तावेजों में एक पुराने कानूनी मामले की जानकारी पूरी तरह प्रस्तुत नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा हुआ और नामांकन प्रक्रिया चर्चा का विषय बन गई। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है। कांग्रेस की रणनीति पर विपक्ष और सियासी गलियारों में चर्चा नामांकन विवाद सामने आने के बाद कांग्रेस की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। नामांकन दाखिल करने के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसके बावजूद दस्तावेजों को लेकर विवाद पैदा होने से विपक्षी दलों को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिला। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में उम्मीदवारों और दस्तावेजों की गहन जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। DATIYA CONGRESS PROTEST: गैस महंगी होने पर कांग्रेस का चुलाह प्रदर्शन, 29 रूपए बढ़ने पर लोगों ने जताया विरोध! भाजपा ने इसे संगठन और तैयारी की जीत बताया भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी ने पूरे चुनावी प्रक्रिया के दौरान तैयारी और रणनीति पर विशेष ध्यान दिया। भाजपा इस घटनाक्रम को अपने संगठनात्मक समन्वय और राजनीतिक सतर्कता का उदाहरण बता रही है। पार्टी का दावा है कि चुनाव केवल संख्या बल से नहीं, बल्कि बेहतर योजना और तैयारी से भी प्रभावित होते हैं। मोहन यादव के नेतृत्व पर फिर हुई चर्चा इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और राजनीतिक प्रबंधन की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा समर्थक इसे उनकी दूरदर्शिता और संगठनात्मक क्षमता का परिणाम बता रहे हैं। वहीं विपक्ष इस मामले को अलग नजरिए से देख रहा है। राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों पर बहस शुरू कर दी है। आगे क्या होगा, इस पर टिकी हैं निगाहें राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ सभी राजनीतिक दलों की नजरें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। यह मामला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक रणनीति, संगठनात्मक क्षमता और चुनावी प्रबंधन की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

7.8% जीडीपी ग्रोथ ने दिखाई ताकत, पर अर्थव्यवस्था के सामने बनी चुनौतियां

  राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा गत सप्ताह जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। यह दर पिछली तिमाही के लगभग समान है और इसके साथ एक सकारात्मक आश्चर्य भी जुड़ा हुआ है। दरअसल राॅयटर्स के अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण ने 7.2 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया था। इस प्रकार वित्त वर्ष 26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अस्थायी अनुमान अब 7.7 फीसदी है जो पिछले वर्ष दर्ज 7.1 फीसदी से काफी अधिक है। वर्ष की दूसरी छमाही में अपेक्षित सुस्ती नहीं आई। आंशिक रूप से इसका कारण राष्ट्रीय खातों में एक साथ चल रही आधार वर्ष में बदलाव की प्रक्रिया हो सकती है जिसमें स्थिर मूल्य गणनाओं के लिए आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया। इस बदलाव ने अन्य कुछ प्रणालीगत परिवर्तनों के साथ जीडीपी के स्तर को कम किया लेकिन वृद्धि दर को अधिक सुचारु और ऊंचा कर दिया। इन परिवर्तनों का प्रभाव बहस का विषय बन सकता है। पहले भी सांख्यिकीय पद्धति में बदलावों के साथ ऐसा हुआ है। खासकर क्योंकि नॉमिनल जीडीपी केवल 8.9 फीसदी बढ़ा है जो यह दर्शाता है कि अपेक्षा से कम जीडीपी डिफ्लेटर (नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी के बीच का अनुपात) ने इन विश्व-स्तरीय आंकड़ों को सहारा दिया। लेकिन यह भी ध्यान देना चाहिए कि सकारात्मक मांग प्रभाव पिछले सितंबर में संशोधित जीएसटी दर संरचना से और पहले दी गई आयकर राहत से लगातार सामने आते रहे। क्षेत्रवार आंकडों के मुताबिक चौथी तिमाही में वृद्धि अपेक्षाकृत व्यापक रही। सेवाएं 9 फीसदी से अधिक बढ़ीं और विनिर्माण 10 फीसदी से अधिक। निजी उपभोग की वृद्धि पिछले तिमाही से कुछ कम होकर 7.6 फीसदी रही लेकिन सकल स्थिर पूंजी निर्माण की 8.2 फीसदी वृद्धि के साथ मिलकर यह पर्याप्त रही। ध्यान रहे कि ये आंकड़े विशेष रूप से प्रभावशाली हैं क्योंकि फरवरी के अंत में खाड़ी संकट शुरू हुआ था जिससे तिमाही के एक-तिहाई हिस्से पर गंभीर वैश्विक दबाव पड़ा। सरकार ने अपने जिन कदमों के जरिये तेल कीमतों में वृद्धि के सबसे बुरे प्रभावों से अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिश की वे भी इस संदर्भ में मददगार रहे। यद्यपि ऐसा बचाव हमेशा नहीं चल सकता। प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए कुछ खर्च नियंत्रण का आह्वान किया है तथा संकेत दिया है कि आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि वर्तमान तिमाही और शायद जुलाई-सितंबर तिमाही भी चौथी तिमाही जैसी ही मजबूती दिखाएगी। एनएसओ के वृद्धि अनुमान जारी होने से कुछ घंटे पहले ही भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते चालू वित्त वर्ष में वृद्धि 6.6 फीसदी तक ही रह सकती है जो पहले के 6.9 फीसदी अनुमान से कम है। मुद्रास्फीति के जोखिम भी मौजूद हैं। खासतौर पर माॅनसून के कमजोर रहने की आशंका के चलते। भारत हमेशा वैश्विक ईंधन कीमतों के ऊंचे होने पर संघर्ष करता रहा है और कमजोर माॅनसून के प्रभाव से भी जूझता रहा है। यदि दोनों चुनौतियां एक साथ असर डालें तो यह गंभीर समस्या होगी। रिजर्व बैंक चिंतित है कि ऊंची ऊर्जा कीमतें और वैश्विक आपूर्ति अवरोध पहले से ही अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे ईंधन कीमतों का असर व्यापक अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा वैसे-वैसे ये प्रभाव और तीव्र होंगे। इन चुनौतियों के बीच यह सौभाग्य है कि भारत साल की शुरुआत अपेक्षाकृत ऊंची वृद्धि के साथ कर रहा है। अब यह तो समय ही बताएगा कि घरेलू मजबूती कितनी टिकाऊ रहती है। लेकिन सरकार को वैश्विक उथल-पुथल के बीच वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ठोस और स्थायी सुधारों पर अमल करना होगा ताकि भारत की आर्थिक ढाल मजबूत हो सके।

WWDC 2026 में ऐपल का बड़ा AI दांव, जेमिनी की ताकत से बदला Siri; iPhone 11 तक पहुंचेगा iOS 27 अपडेट

नई दिल्ली । वैश्विक टेक्नोलॉजी उद्योग की निगाहें इस वर्ष आयोजित डेवलपर सम्मेलन पर टिकी थीं और कंपनी ने अपनी नई घोषणाओं के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उसके उत्पादों और सेवाओं का प्रमुख आधार बनने वाली है। सम्मेलन के दौरान सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अपडेट पेश किए गए, जिनमें सबसे अधिक चर्चा कंपनी के वर्चुअल असिस्टेंट सिरी और नए ऑपरेटिंग सिस्टम iOS 27 को लेकर रही। कंपनी ने अपने एआई असिस्टेंट सिरी को पहले की तुलना में अधिक उन्नत और संवादात्मक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई तकनीकी साझेदारी के माध्यम से सिरी अब उपयोगकर्ताओं की भाषा, संदर्भ और विजुअल इनपुट को बेहतर तरीके से समझ सकेगा। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अधिक स्वाभाविक और सटीक अनुभव प्रदान करना है। नई क्षमताओं के साथ सिरी विभिन्न ऐप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेगा और जटिल अनुरोधों को भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर पाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई के विस्तार के बावजूद उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, एआई आधारित सेवाओं का विकास इस तरह किया गया है कि व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित रहे और डेटा का उपयोग केवल आवश्यक अनुरोधों को पूरा करने तक सीमित हो। यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दुनिया भर में एआई और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो रही है। सम्मेलन में पेश किए गए नए एआई फीचर्स को विभिन्न एप्लिकेशनों में भी एकीकृत किया गया है। मैसेजिंग सेवाओं में अब बुद्धिमान रिप्लाई सुझाव उपलब्ध होंगे, जबकि फोन से संबंधित सुविधाओं में बातचीत के दौरान अन्य ऐप्स से आवश्यक संदर्भ प्राप्त करने की क्षमता जोड़ी गई है। इन सुधारों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लिए मल्टीटास्किंग को अधिक सहज और उत्पादक बनाना है। कार्यक्रम की एक अन्य बड़ी घोषणा iOS 27 रही। कंपनी का दावा है कि यह अब तक का सबसे व्यापक और प्रदर्शन-केंद्रित अपडेट है। नए संस्करण का लाभ पुराने मॉडलों तक पहुंचाने की रणनीति के तहत iPhone 11 और उसके बाद लॉन्च किए गए कई डिवाइसों को भी यह अपडेट मिलेगा। इससे बड़ी संख्या में मौजूदा उपयोगकर्ताओं को बिना नया उपकरण खरीदे नई सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रदर्शन सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नई तस्वीरों के लोड होने की गति बढ़ाने, फाइल शेयरिंग को अधिक तेज बनाने और मल्टीटास्किंग को बेहतर करने के लिए सिस्टम स्तर पर कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अधिक तेज और सुचारु अनुभव प्रदान करना है। फोटो एडिटिंग के क्षेत्र में भी कंपनी ने नए एआई टूल्स पेश किए हैं। नए फीचर्स की मदद से तस्वीरों के फ्रेम, एंगल और अनुपात को अधिक सहजता से बदला जा सकेगा। उपयोगकर्ता एआई की सहायता से तस्वीरों के दृश्य क्षेत्र का विस्तार कर सकेंगे और आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त बैकग्राउंड भी जोड़ सकेंगे। यह कदम कंटेंट क्रिएटर्स और मोबाइल फोटोग्राफी पसंद करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। इसके अलावा इंटरफेस डिजाइन में भी बदलाव किए गए हैं। लिक्विड ग्लास डिजाइन को अधिक अनुकूलन योग्य बनाया गया है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी पसंद के अनुसार विजुअल एलिमेंट्स को नियंत्रित कर सकेंगे। वहीं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स को भी मजबूत किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर पहले से अधिक नियंत्रण मिलेगा। इन घोषणाओं के साथ कंपनी ने यह संकेत दिया है कि उसका अगला चरण एआई, प्राइवेसी और उपयोगकर्ता अनुभव के संतुलित विकास पर केंद्रित रहेगा।

सुरक्षा का साधन या नया खतरा? AI और सर्विलांस सिस्टम की क्षमताओं ने दुनिया को किया चिंतित

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल निगरानी प्रणालियों और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों के तेजी से विस्तार ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन तकनीकों को कभी नागरिक सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और सार्वजनिक निगरानी का प्रभावी माध्यम माना जाता था, वही अब संभावित साइबर जोखिम और सुरक्षा चुनौतियों का कारण भी बनती दिखाई दे रही हैं। इसी कारण दुनिया के कई देशों में संवेदनशील निगरानी प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर समीक्षा शुरू हो गई है। हाल के वर्षों में CCTV नेटवर्क, फेस रिकग्निशन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और AI आधारित निगरानी प्रणालियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन तकनीकों की मदद से लाखों घंटों की वीडियो रिकॉर्डिंग को कम समय में विश्लेषित किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अपराधियों की पहचान, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इनका व्यापक उपयोग कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यही तकनीकें यदि साइबर हमलों या अनधिकृत पहुंच का शिकार हो जाएं तो गंभीर सुरक्षा जोखिम भी पैदा कर सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक निगरानी प्रणालियां केवल कैमरों तक सीमित नहीं हैं। इनमें क्लाउड स्टोरेज, नेटवर्क सर्वर, सेंसर, संचार उपकरण और AI आधारित विश्लेषण प्रणाली भी शामिल होती हैं। यदि किसी सिस्टम में तकनीकी कमजोरी, सॉफ्टवेयर खामी या साइबर सुरक्षा से जुड़ी चूक मौजूद हो, तो संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच संभव हो सकती है। यही कारण है कि कई देश अब अपने महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। रूस सहित कई देशों में हाल के समय में निगरानी प्रणालियों की सुरक्षा समीक्षा की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ संवेदनशील सुरक्षा नेटवर्क की तकनीकी जांच की गई और उनके डिजिटल ढांचे की मजबूती का मूल्यांकन किया गया। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी महत्वपूर्ण निगरानी प्रणाली को इंटरनेट से जोड़ने के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना आवश्यक हो जाता है, ताकि संभावित साइबर घुसपैठ को रोका जा सके। तकनीकी जानकारों के अनुसार, AI की सबसे बड़ी शक्ति विशाल मात्रा में उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करना है। आधुनिक एल्गोरिदम हजारों कैमरों से प्राप्त वीडियो फुटेज का अध्ययन कर पैटर्न पहचान सकते हैं, गतिविधियों का विश्लेषण कर सकते हैं और संभावित घटनाओं का अनुमान भी लगा सकते हैं। यही क्षमता सुरक्षा एजेंसियों के लिए उपयोगी है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग हो तो यह निजता और सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल CCTV कैमरे ही जोखिम का कारण नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट उपकरण, मोबाइल एप्लिकेशन, डिजिटल संचार माध्यम और अन्य नेटवर्क आधारित प्रणालियां भी साइबर हमलों के लक्ष्य बन सकती हैं। इसलिए अब सुरक्षा का अर्थ केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर सुरक्षा भी उसका अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। दुनिया भर की सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां अब डिजिटल अवसंरचना को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए निवेश बढ़ा रही हैं। एन्क्रिप्शन, मल्टी-लेयर सुरक्षा, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, नेटवर्क मॉनिटरिंग और साइबर ऑडिट जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही AI आधारित सुरक्षा प्रणालियों के उपयोग और नियंत्रण को लेकर भी नए मानक विकसित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में CCTV और AI का उपयोग और अधिक व्यापक होगा, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और गोपनीयता से जुड़े मुद्दों पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। आधुनिक तकनीक जहां सुरक्षा को मजबूत करने का प्रभावी साधन है, वहीं उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण बन गया है।

1G और 2G से कई कदम आगे 3G इथेनॉल, खाद्य संकट की चिंता खत्म कर स्वच्छ ऊर्जा को देगा नई दिशा

नई दिल्ली । स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में दुनिया तेजी से नए विकल्पों की तलाश कर रही है और इसी क्रम में 3G इथेनॉल तकनीक को जैव ईंधन क्षेत्र की अगली बड़ी क्रांति माना जा रहा है। भारत समेत कई देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन अब तीसरी पीढ़ी की इथेनॉल तकनीक ने ऊर्जा क्षेत्र के सामने नई संभावनाएं खोल दी हैं। यह तकनीक पारंपरिक इथेनॉल उत्पादन से अलग है क्योंकि इसमें खाद्य फसलों की जगह शैवाल, जलीय पौधों और औद्योगिक कचरे का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में उपयोग होने वाला प्रथम पीढ़ी का इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य खाद्य फसलों से तैयार किया जाता है। दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल में कृषि अवशेषों जैसे पराली, भूसा और अन्य जैविक कचरे का उपयोग होता है। हालांकि इन दोनों तकनीकों के सामने उत्पादन लागत, संसाधनों की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में 3G इथेनॉल को अधिक टिकाऊ और भविष्य उन्मुख समाधान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 3G इथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा आधार शैवाल है। शैवाल तेजी से बढ़ने वाला जैविक स्रोत है, जिसे उपजाऊ कृषि भूमि की आवश्यकता नहीं होती। यह खारे पानी, तालाबों, समुद्री तटीय क्षेत्रों और बंजर जमीनों पर भी विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि भूमि पर दबाव कम पड़ता है और खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित नहीं होता। 3G इथेनॉल निर्माण की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले विशेष प्रकार के शैवालों की नियंत्रित परिस्थितियों में खेती की जाती है। इसके बाद उन्हें पानी से अलग कर सुखाया जाता है और उनका जैविक द्रव्यमान एकत्र किया जाता है। अगली प्रक्रिया में शैवाल की कोशिकाओं को तोड़कर उनमें मौजूद स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट निकाले जाते हैं। इन तत्वों का जैविक फर्मेंटेशन कर अल्कोहल तैयार किया जाता है। अंत में शुद्धिकरण और डिस्टिलेशन की प्रक्रिया के बाद उच्च गुणवत्ता वाला इथेनॉल प्राप्त होता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक केवल वैकल्पिक ईंधन तक सीमित नहीं है। 3G इथेनॉल का उपयोग पेट्रोल के साथ मिश्रण के रूप में किया जा सकता है, जिससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा इसे उन्नत जैव ईंधन में परिवर्तित कर विमानन क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह क्षेत्र वर्तमान में कार्बन उत्सर्जन के बड़े स्रोतों में शामिल है, इसलिए हरित ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिक क्षेत्र में भी 3G इथेनॉल की उपयोगिता व्यापक मानी जा रही है। इससे बायोप्लास्टिक, विशेष रसायन और कई पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। साथ ही बिजली उत्पादन में भी इसका उपयोग संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण होगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह तकनीक महत्वपूर्ण मानी जाती है। शैवाल अपने विकास के दौरान वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि 3G इथेनॉल को कम कार्बन उत्सर्जन वाले ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से विकसित किया जाता है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन की चुनौतियों का एक साथ समाधान देने में सक्षम हो सकती है। आने वाले वर्षों में 3G इथेनॉल स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक बन सकता है।

STOCK MARKET TODAY: बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 395 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार खरीदारी

STOCK MARKET TODAY:नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बावजूद मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती तेजी के बाद बाजार में कुछ समय के लिए दबाव देखने को मिला, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने सकारात्मक रुख दिखाया, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि अधिक मजबूत दिखाई दी। कारोबार की शुरुआत उत्साहजनक माहौल में हुई थी। शुरुआती घंटों में प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और चुनिंदा शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई। दोपहर तक बाजार पर दबाव इतना बढ़ गया कि प्रमुख सूचकांक लाल निशान तक पहुंच गए। हालांकि इसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू की, जिससे बाजार में रिकवरी आई और दिन का समापन मजबूती के साथ हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 395 अंकों की बढ़त के साथ 73,918 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 119 अंकों की मजबूती के साथ 23,242 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगभग आधा प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की, जो बाजार में सकारात्मक धारणा को दर्शाता है। Vivo X Fold6 की लाइव फोटो लीक, OnePlus ला रहा नए बजट फोन; पढ़ें दिनभर की बड़ी गैजेट्स खबरें इस कारोबारी सत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन रहा। बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में छोटे और मझोले शेयरों में कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में बढ़ा है और वे बड़े शेयरों के साथ-साथ उभरती कंपनियों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। बाजार में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र ने सबसे अहम भूमिका निभाई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण संबंधित सूचकांक में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज हुई। निजी बैंकिंग शेयरों में भी सकारात्मक रुझान बना रहा। वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने पूरे बाजार की दिशा को मजबूत बनाए रखने में योगदान दिया। पर्यटन, रक्षा, ऑटोमोबाइल और पूंजी बाजार से जुड़े क्षेत्रों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में आई तेजी ने बाजार के व्यापक दायरे को समर्थन दिया। उपभोक्ता उत्पाद, फार्मा, धातु और अवसंरचना क्षेत्र के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार दर्ज किया गया, जिससे बाजार की मजबूती को अतिरिक्त आधार मिला। महिला टी20 वर्ल्ड कप में इन बल्लेबाजों का रहा दबदबा: टॉप-5 रन स्कोरर्स में कोई भारतीय नहीं, हरमनप्रीत टॉप-10 में हालांकि सभी सेक्टर एक जैसी गति से नहीं बढ़े। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुछ कमजोरी देखने को मिली और चुनिंदा आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की बढ़त कुछ हद तक सीमित रही। फिर भी अधिकांश क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बने रहने से कुल मिलाकर बाजार सकारात्मक दिशा में बंद हुआ। व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो विमानन, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों ने प्रमुख बढ़त हासिल की। दूसरी ओर ऊर्जा, आभूषण, बिजली और तकनीकी क्षेत्र की कुछ कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक खरीदारी के चलते बाजार का समग्र रुख मजबूत बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई यह रिकवरी निवेशकों के बेहतर विश्वास और व्यापक हिस्सेदारी का संकेत है। यदि आने वाले सत्रों में यही रुझान जारी रहता है तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल मंगलवार का कारोबार इस बात का संकेत देता है कि निवेशकों की नजर अब केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में भी अवसर तलाशे जा रहे हैं।

Vivo X Fold6 की लाइव फोटो लीक, OnePlus ला रहा नए बजट फोन; पढ़ें दिनभर की बड़ी गैजेट्स खबरें

नई दिल्ली । टेक्नोलॉजी जगत में मंगलवार को कई बड़े अपडेट देखने को मिले। Vivo के आगामी फोल्डेबल स्मार्टफोन Vivo X Fold6 की लाइव तस्वीरें लॉन्च से पहले ऑनलाइन लीक हो गईं, जिससे इसके डिजाइन और कैमरा सेटअप की झलक सामने आई। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि डिवाइस को नए OriginOS 6 Fold के साथ पेश किया जाएगा, जिसमें बेहतर मल्टीटास्किंग और AI आधारित फीचर्स शामिल होंगे। वहीं, OnePlus भारतीय बाजार में अपनी N सीरीज का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 20,000 रुपये से कम कीमत वाले कई स्मार्टफोन लॉन्च कर सकती है, जिससे बजट सेगमेंट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी। दूसरी ओर, Infinix ने Note Edge JBL Edition पेश किया है। इस विशेष संस्करण में JBL ऑडियो फीचर्स के साथ वायरलेस स्पीकर भी दिया जा रहा है। इसकी कीमत 24,999 रुपये रखी गई है। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए TEMPT ने ICY इंस्टेंट कूलिंग पोर्टेबल फैन लॉन्च किया है। यह डिवाइस सेमीकंडक्टर कूलिंग टेक्नोलॉजी के जरिए तेज गर्मी में भी तुरंत ठंडक देने का दावा करता है। इन नए उत्पादों और लीक रिपोर्ट्स ने एक बार फिर स्मार्टफोन और गैजेट्स बाजार में ग्राहकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

DATIYA CONGRESS PROTEST: गैस महंगी होने पर कांग्रेस का चुलाह प्रदर्शन, 29 रूपए बढ़ने पर लोगों ने जताया विरोध!

DATIYA CONGRESS PROTEST

HIGHLIGHTS: चूल्हा जलाकर कांग्रेस का प्रदर्शन गैस सिलेंडर की प्रतीकात्मक अंत्येष्टि महंगाई के खिलाफ नारेबाजी 29 रुपए बढ़ोतरी पर विरोध कीमतें वापस लेने की मांग   DATIYA CONGRESS PROTEST: दतिया। घरेलु रसोई गैस के दाम बढ़ने से कांग्रेस कमेटी मंगलवार को दतिया में अनोखा प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक दांगी बगदा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजगढ़ पीतांबरा चौराहे के पास सड़क किनारे चूल्हा जलाकर रोटी-सब्जी बनाई और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर को फूल-माला पहनाकर जोरदार नारेबाजी की। धूपबत्ती जलाकर बढ़ती महंगाई और गैस की बढ़ी कीमतों के खिलाफ नाराजगी जताई गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ रही गैस कीमतों से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। महिला टी20 वर्ल्ड कप में इन बल्लेबाजों का रहा दबदबा: टॉप-5 रन स्कोरर्स में कोई भारतीय नहीं, हरमनप्रीत टॉप-10 में कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक दांगी बगदा ने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार होने के बावजूद महंगाई पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में हाल ही में 29 रुपए की बढ़ोतरी कर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है। उनका कहना था कि बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। 17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल महिलाओं ने भी जताई नाराजगी महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष गुड्डी जाटव और कांग्रेस नेत्री रेखा अहिरवार ने कहा कि एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आमदनी नहीं बढ़ रही, लेकिन जरूरी सामानों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग की।

RTO Reforms Digitization: डिजिटल परिवहन सेवाओं की ओर बड़ा कदम, ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन ट्रांसफर तक ऑनलाइन व्यवस्था की तैयारी

RTO Reforms Digitization: नई दिल्ली । देशभर के करोड़ों वाहन चालकों को राहत देने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी बढ़ाया जा सकता है। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो बड़ी संख्या में लोगों को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही परिवहन सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में भी व्यापक सुधारों की तैयारी चल रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सरकार ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि को वर्तमान 20 वर्षों से बढ़ाकर वाहन चालक की 50 वर्ष की आयु तक करने की संभावना पर विचार कर रही है। फिलहाल यह प्रस्ताव प्रारंभिक चर्चा के चरण में है और इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। हालांकि, प्रस्ताव को लेकर परिवहन क्षेत्र और आम वाहन चालकों के बीच व्यापक रुचि दिखाई दे रही है। STOCK MARKET TODAY: बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 395 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार खरीदारी वर्तमान व्यवस्था के तहत ड्राइविंग लाइसेंस निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद नवीनीकरण कराना आवश्यक होता है। कई मामलों में लाइसेंस धारकों को अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ मेडिकल प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में समय और संसाधनों की खपत होती है तथा लोगों को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य इस प्रशासनिक बोझ को कम करना और नागरिकों को अधिक सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यदि लाइसेंस की वैधता अवधि बढ़ाई जाती है तो इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि परिवहन विभागों पर भी कार्यभार कम होगा। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक नागरिक-अनुकूल बनाने में सहायक हो सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इससे अधिक सुविधा मिलने की संभावना है। बैंक नहीं बताएंगे ये ट्रिक्स! होम लोन की लागत कम करने के 7 असरदार उपाय.. लाइसेंस नियमों में संभावित बदलाव के साथ-साथ परिवहन मंत्रालय अन्य सेवाओं को भी पूरी तरह ऑनलाइन करने की दिशा में कार्य कर रहा है। वाहन स्वामित्व हस्तांतरण, परमिट नवीनीकरण और विभिन्न प्रकार की अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी की जा रही है। इससे कागजी कार्यवाही में कमी आएगी और लोगों को कार्यालयों में लंबी प्रतीक्षा से राहत मिल सकेगी। नई व्यवस्था लागू होने पर विभिन्न सेवाओं से संबंधित शुल्क भी डिजिटल माध्यमों से जमा किए जा सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रक्रियाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा देना है ताकि नागरिकों को तेज, सरल और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। महिला टी20 वर्ल्ड कप में इन बल्लेबाजों का रहा दबदबा: टॉप-5 रन स्कोरर्स में कोई भारतीय नहीं, हरमनप्रीत टॉप-10 में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भी एक नई प्रणाली पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के रिकॉर्ड में नेगेटिव पॉइंट्स दर्ज किए जा सकते हैं। यदि किसी चालक के खिलाफ बार-बार उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर या लगातार नियम तोड़ने की स्थिति में लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित अथवा रद्द करने का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सरलीकरण और सड़क सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की यह पहल परिवहन क्षेत्र में व्यापक सुधारों का आधार बन सकती है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो इससे नागरिकों को सुविधा मिलने के साथ-साथ जिम्मेदार ड्राइविंग संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा और देश की परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक एवं प्रभावी रूप में विकसित हो सकेगी।

IRCTC ELECTRONIC COOKING: 17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

IRCTC ELECTRONIC COOKING: नई दिल्ली । देश में एलपीजी आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। गैस आधारित कुकिंग पर निर्भरता कम करते हुए अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर बड़े स्तर पर बिजली से संचालित इंडक्शन कुकिंग सिस्टम को अपनाया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण भोजन तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में यात्रियों को मिलने वाली कैटरिंग सेवाओं में किसी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए वैकल्पिक कुकिंग मॉडल लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत खाना गैस की बजाय इंडक्शन स्टोव और अन्य विद्युत उपकरणों की मदद से तैयार किया जा रहा है। DATIYA CONGRESS PROTEST: गैस महंगी होने पर कांग्रेस का चुलाह प्रदर्शन, 29 रूपए बढ़ने पर लोगों ने जताया विरोध! भारतीय रेलवे प्रतिदिन लाखों यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराता है। देशभर में संचालित बड़ी संख्या में ट्रेनों में खानपान सेवाएं दी जाती हैं और प्रतिदिन लगभग 17 लाख यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। इतने बड़े स्तर की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निरंतर ईंधन आपूर्ति आवश्यक होती है। एलपीजी संकट के बीच रेलवे ने समय रहते वैकल्पिक उपायों को लागू कर परिचालन पर असर पड़ने से बचाने की कोशिश की है। रेलवे प्रशासन ने बताया कि एलएचबी पैंट्री कारों में पहले से मौजूद आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं और बेहतर विद्युत प्रणाली को देखते हुए वहां इंडक्शन आधारित खाना पकाने की अनुमति दी गई है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रमुख ट्रेनों में उपयोग किए जाने वाले एलएचबी कोच इस तकनीक के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। इसके कारण चलती ट्रेनों में भी सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भोजन तैयार किया जा सकेगा। भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को मिलेगा सहारा, सन फार्मा की मेगा डील में SBI की एंट्री के संकेत केवल ट्रेनों तक ही नहीं, बल्कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी बिजली आधारित कुकिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न स्टेशन परिसरों में स्थापित फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को इंडक्शन कुकर तथा माइक्रोवेव जैसे उपकरणों का अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भोजन उत्पादन क्षमता बनाए रखने के साथ-साथ गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। रेलवे से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में रेलवे की बड़ी भोजन उत्पादन प्रणाली स्थायी रूप से इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल की ओर बढ़ सकती है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आने वाले समय में लगभग 60 प्रतिशत भोजन तैयारी बिजली आधारित तकनीक पर स्थानांतरित की जा सकती है। इससे ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण होगा और ईंधन आपूर्ति संबंधी जोखिम भी कम होंगे। हादसे ने छीना एक हाथ, हौसले ने दिलाए तीन पैरालंपिक पदक: देवेंद्र झाझरिया की प्रेरक कहानी रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था के लिए देशभर में संचालित क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य भोजन उत्पादन केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने के कारण रेलवे ने प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय भी मजबूत किया है ताकि आवश्यक गैस सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन आधारित कुकिंग न केवल आपूर्ति संकट के समय उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है, बल्कि यह ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता के लिहाज से भी लाभकारी है। रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य की चुनौतियों के बीच सार्वजनिक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।