सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी की टीमों ने पंजाब के लुधियाना और जालंधर, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के कई स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिन परिसरों की तलाशी ली जा रही है उनमें आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। अधिकारियों ने दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच की प्रक्रिया शुरू की है ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
जांच का केंद्र कथित तौर पर हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन बताए जा रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विभिन्न कारोबारी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध धन के उपयोग के संकेत मौजूद हैं या नहीं। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंकिंग दस्तावेजों और अन्य कारोबारी अभिलेखों की भी पड़ताल की जा रही है।
दिल्ली और नोएडा क्षेत्र में भी जांच एजेंसी की टीमें सक्रिय रहीं। यहां कई स्थानों पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। ऐसे में जांच के दायरे, बरामद सामग्री अथवा आगे की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की ओर से औपचारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने व्यापारिक समुदाय से घबराने की आवश्यकता न होने की बात कही और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
संजीव अरोड़ा पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आ चुके हैं। पिछले महीने उनके चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक आवास पर लंबी तलाशी कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस समय वह पंजाब सरकार में विद्युत, उद्योग और वाणिज्य विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए उनके विभागों का पुनर्वितरण कर अन्य मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंप दी थी। अब ताजा छापेमारी ने एक बार फिर इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल जांच एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है। मामले में आगे की कार्रवाई और एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों, कारोबारी जगत और आम जनता की नजर बनी हुई है।