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जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

नई दिल्ली । सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) आज देश की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों में से एक बन चुका है। पिछले एक दशक में इस प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद की पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए कारोबार, प्रतिस्पर्धा और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार के अनुसार, जिस प्लेटफॉर्म का कारोबार शुरुआती वर्ष में केवल 400 से 422 करोड़ रुपये के आसपास था, वह आज बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है।

जीईएम की स्थापना वर्ष 2016 में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके माध्यम से विक्रेताओं का पंजीकरण, उत्पाद सूचीकरण, निविदा प्रक्रिया, ऑर्डर प्रबंधन, आपूर्ति और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित की जाती हैं। इससे सरकारी विभागों और आपूर्तिकर्ताओं दोनों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल और तेज हुई हैं।

प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सूक्ष्म और लघु उद्यमों की बढ़ती भागीदारी रही है। सरकारी नीति के अनुसार सार्वजनिक खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई क्षेत्र से किया जाना चाहिए, लेकिन जीईएम पर यह हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे हजारों छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को सीधे सरकारी बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

जीईएम के माध्यम से केवल कारोबार का विस्तार ही नहीं हुआ, बल्कि विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की भागीदारी भी बढ़ी है। महिला उद्यमियों ने इस मंच का व्यापक लाभ उठाया है। शुरुआती वर्षों में जहां महिला स्वामित्व वाले उद्यमों से होने वाला कारोबार सीमित स्तर पर था, वहीं अब यह कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है।

स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को भी जीईएम से बड़ा लाभ मिला है। एक दशक पहले जहां बहुत कम स्टार्टअप इस प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, वहीं अब हजारों स्टार्टअप्स सरकारी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। इनके माध्यम से होने वाला कारोबार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इससे नवाचार आधारित कंपनियों को सरकारी संस्थानों तक अपनी सेवाएं और उत्पाद पहुंचाने का अवसर प्राप्त हुआ है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े उद्यमों की भागीदारी में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की समावेशी विकास नीति के अनुरूप जीईएम ने उन वर्गों को भी बाजार उपलब्ध कराया है जिन्हें पहले सरकारी खरीद प्रणाली में अपेक्षाकृत कम अवसर मिलते थे। इससे आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा मिला है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जीईएम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए बड़ी मात्रा में वैक्सीन, सिरिंज, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद इसी मंच के माध्यम से की गई। इसके अलावा रेलवे, शिक्षा, प्रशासन और अन्य सरकारी क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ती गई है।

तकनीकी दृष्टि से भी जीईएम लगातार विकसित हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण, डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन नीलामी और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया ने खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। इससे मानव हस्तक्षेप में कमी आई है और खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीईएम ने केवल सरकारी खरीद को डिजिटल नहीं बनाया, बल्कि कारोबार करने में आसानी को भी नई मजबूती प्रदान की है। ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी बोली प्रणाली और डिजिटल अनुबंध प्रबंधन ने छोटे और बड़े सभी व्यवसायों के लिए सरकारी बाजार तक पहुंच को सरल बनाया है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह मंच अब देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक खरीद प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रहा है।

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