Chambalkichugli.com

MP MLA Horse Trading: MP में फिर ऑपरेशन लोटस की चर्चा! कांग्रेस विधायकों की होगी शिफ्टिंग, BJP पर खरीद-फरोख्त के आरोप

former Union Minister Kantilal Bhuria

MP MLA Horse Trading: भोपाल। राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजने का फैसला किया है। पार्टी को आशंका है कि भारतीय जनता पार्टी उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर सकती है। इसी के चलते कांग्रेस अपने विधायकों की शिफ्ट करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे चार्टर्ड विमान से दूसरे राज्य के लिए रवाना होंगे। पार्टी का यह कदम राज्यसभा चुनाव को देखते हुए बनाई गई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। MP में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की बल्ले-बल्ले….. मोहन यादव सरकार ने बढ़ाया वेतन 10 दिनों तक रहेंगे राज्य से बाहर देर रात नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर हुई बैठक में विधायकों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधायक अगले 10 दिनों तक राज्य से बाहर रहेंगे और मतदान के समय ही वापस लाए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य अपने विधायकों को किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या संपर्क से दूर रखना है। बैंक खाते में बड़ी रकम डालते ही आ सकता है IT नोटिस…. जानिए क्या है नियम भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कांग्रेस विधायकों से संपर्क कर रही है और उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए 5 से 8 करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं। कांतिलाल भूरिया ने कहा- भाजपा खरीद-फरोख्त कर रही है। हमारे विधायकों को 5 से 8 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया जा रहा है। भाजपा के लोग लगातार फोन कर रहे हैं और लालच देने की कोशिश कर रहे हैं। भूरिया ने कहा- कांग्रेस के विधायक पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध हैं और किसी भी तरह से बिकने वाले नहीं हैं। भूरिया ने कहा- बीजेपी के लोग हमारे विधायकों को पैसे का लालच दे रहे हैं, लेकिन हमारे कट्टर कांग्रेसी विधायक बिकने वाले नहीं हैं। यह लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है। अगर जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त होगी तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? राज्यसभा चुनाव के लिए BJP ने उतारा उम्मीदवार इधर भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने मध्य प्रदेश से महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है। केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर 18 जून को होगा मतदान गौरतलब है कि 18 जून को मध्य प्रदेश समेत देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना है। चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटी हैं। ऐसे में कांग्रेस विधायकों की शिफ्टिंग और खरीद-फरोख्त के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। हालांकि भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

नई दिल्ली । तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं। सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं। मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया। जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो। वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।

महिला वकीलों को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा रोडमैप, CJI सूर्यकांत ने 50% प्रतिनिधित्व की वकालत कर दिया स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली । भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि इस दिशा में एक मजबूत और दीर्घकालिक संस्थागत व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रवेश स्तर पर अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि महिलाएं अपने पूरे पेशेवर जीवन में आगे बढ़ सकें और नेतृत्वकारी भूमिकाओं तक पहुंच सकें। लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी पेशे में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि न्यायिक और कानूनी संस्थाओं में संतुलित भागीदारी समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर कई पहलें शुरू की गई हैं और भविष्य में भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान उनसे यह सवाल पूछा गया कि बड़ी संख्या में छात्राएं कानून की पढ़ाई तो करती हैं, लेकिन करियर के मध्य चरण तक पहुंचते-पहुंचते अनेक महिलाएं इस पेशे से बाहर हो जाती हैं। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक वास्तविक समस्या है और इसे केवल नीतिगत घोषणाओं से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए संस्थागत समर्थन, समान अवसर और पेशेवर विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पहले भी उन्होंने सुझाव दिया था कि सरकारी पैनलों में लॉ ऑफिसर के पदों पर महिलाओं की नियुक्तियों का अनुपात 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की पर्याप्त मौजूदगी न केवल प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक संतुलित और समावेशी भी बनाती है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि बार काउंसिल, जिला बार एसोसिएशन और अन्य बार संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उनका उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें महिला वकीलों को नेतृत्व के अवसर भी मिल सकें। उन्होंने संकेत दिया कि संस्थागत सुधारों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को स्थायी रूप से मजबूत करने की योजना पर कार्य जारी है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मुद्दे के अलावा मुख्य न्यायाधीश ने भारत की न्यायिक व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक वास्तविकताओं, भाषाई विविधता और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप एक स्वदेशी न्यायशास्त्र विकसित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारतीय अदालतों को ऐसे कानूनी सिद्धांतों और व्याख्याओं को बढ़ावा देना चाहिए जो देश की विशिष्ट आवश्यकताओं और सामाजिक संदर्भों को प्रतिबिंबित करें। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी बदलावों के दौर में न्यायपालिका को आत्मनिर्भर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका मानना है कि भविष्य की न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक की भूमिका बढ़ेगी, इसलिए भारत को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वतंत्र और विश्वसनीय डिजिटल ढांचा तैयार करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश के इन विचारों को न्यायपालिका में लैंगिक समानता, संस्थागत सुधार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। उनका संदेश स्पष्ट था कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रतिनिधिक और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधारों की आवश्यकता है, जिन पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दिए जाने के बाद TMC नेतृत्व और बागी गुट के बीच टकराव और तेज हो गया है। इसी बीच TMC सांसद Mahua Moitra ने बागी विधायकों पर जमकर हमला बोला है। एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन नेताओं ने वर्षों तक Mamata Banerjee की लोकप्रियता और पार्टी के संगठनात्मक बल का लाभ उठाया, वही आज पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बागी नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता में रहने की आदत पड़ चुकी है, इसलिए वे विपक्ष में संघर्ष करने के बजाय आसान रास्ता चुन रहे हैं। महुआ ने दो टूक कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी छोड़नी है तो वह खुलकर जाए, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस बताने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बागी नेता चाहें तो अपनी अलग पार्टी बना लें, लेकिन TMC के नाम और पहचान का इस्तेमाल न करें। भाजपा पर गंभीर आरोमहुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि भाजपा योजनाबद्ध तरीके से TMC को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए कहा कि वे कभी तृणमूल का हिस्सा रहे हैं और पार्टी के नेताओं की राजनीतिक कमजोरियों से भली-भांति परिचित हैं। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर भाजपा नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। महुआ ने दावा किया कि कुछ नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों और नेताओं को गिरफ्तारी की धमकियां दी गईं, जिसके चलते वे बागी खेमे के साथ चले गए। “असली TMC ममता के साथ”बागी गुट के बढ़ते प्रभाव और चुनाव चिह्न पर संभावित विवाद के सवाल पर महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस आज भी ममता बनर्जी और उनके साथ खड़े नेताओं के पास ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल संगठन, विचारधारा और जनाधार ममता बनर्जी के नेतृत्व में कायम है। महुआ ने यह भी कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति आती है कि पार्टी को अपना मौजूदा चुनाव चिह्न छोड़ना पड़े, तब भी उन्हें कोई चिंता नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी थी, तब उन्होंने अपनी पहचान और चुनावी प्रतीक खुद तैयार किया था। नया सिंबल बनाकर भी जीत सकती हैं ममतामहुआ मोइत्रा ने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी का राजनीतिक कद किसी चुनाव चिह्न का मोहताज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस नेता ने नया दल बनाकर और नया प्रतीक लेकर पश्चिम बंगाल में तीन बार सरकार बनाई, वह भविष्य में भी नया चुनावी चिह्न बनाकर जनता का समर्थन हासिल कर सकती हैं। उनके अनुसार, चुनाव चिह्न या पार्टी का नाम बदल सकता है, लेकिन जनता के बीच ममता बनर्जी की पहचान और राजनीतिक प्रभाव को कोई नहीं छीन सकता।

मालवीय नगर अग्निकांड ने उठाए गंभीर सवाल: 21 लोगों की मौत के बाद होटल मालिक पर शिकंजा, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी

नई दिल्ली । राजधानी के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। 21 लोगों की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा दर्ज मामले में गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं के तहत जांच आगे बढ़ाई जा रही है। हादसे ने एक बार फिर राजधानी में संचालित हो रहे होटलों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना 3 जून की सुबह सामने आई थी, जब होटल के बेसमेंट में संचालित एक रेस्टोरेंट क्षेत्र में अचानक आग लग गई। शुरुआती आग कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में फैल गई और होटल के कई हिस्से धुएं तथा लपटों की चपेट में आ गए। आग लगने के समय होटल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 विदेशी और 10 भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। मृत विदेशी नागरिकों में अफ्रीकी देशों और तुर्कमेनिस्तान के लोग भी शामिल थे। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि होटल परिसर में मूल संरचना से अधिक कमरे तैयार किए गए थे। पूछताछ के दौरान होटल मालिक ने स्वीकार किया कि कारोबार विस्तार के उद्देश्य से भवन में अतिरिक्त कमरे जोड़े गए थे। हालांकि उसने दावा किया कि होटल के संचालन, प्रबंधन और वित्तीय गतिविधियों की जिम्मेदारी अन्य लोगों को सौंप रखी गई थी। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि होटल में किए गए निर्माण और संशोधन संबंधित नियमों के अनुरूप थे या नहीं। जांच एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से भवन की संरचना और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर केंद्रित है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार होटल में बाहर निकलने के लिए सीमित मार्ग उपलब्ध था, जिससे आग लगने के बाद कई लोग अंदर फंस गए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक भवन में पर्याप्त आपात निकास मार्ग और अग्नि सुरक्षा उपाय अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है कि होटल में सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। इस जांच का उद्देश्य आग लगने के वास्तविक कारणों, संभावित लापरवाही और नियमों के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है। घटनास्थल के आसपास संचालित अन्य होटल और होमस्टे भी अब जांच के दायरे में आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार संबंधित होटल समूह के कई प्रतिष्ठान उसी इलाके में संचालित हो रहे हैं, जहां देश-विदेश से आने वाले लोग ठहरते हैं। ऐसे में प्रशासन सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। मालवीय नगर अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा केवल तकनीकी कारणों से हुआ या फिर इसके पीछे प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर की गंभीर लापरवाही भी जिम्मेदार थी। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग सभी पहलुओं की जांच में जुटे हुए हैं।

एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक होटल में लगी भीषण आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि बचाव दल ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कार्रवाई तेज कर दी गई है, लेकिन शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही के संकेत सामने आए हैं। यह आग मालवीय नगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट’ में सुबह करीब 8.50 से 9 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और ऊपरी मंजिलों तक धुआं फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में केवल एक ही सीढ़ी होने के कारण लोग फंस गए और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। हादसे के दौरान कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाए और तीसरी मंजिल से नीचे बिछाए गए गद्दों पर छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और गली में गद्दे बिछाकर फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग इस दौरान गंभीर रूप से घायल भी हो गए, जिनमें कुछ के पैर टूटने की भी जानकारी सामने आई है। स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी, जिससे लोगों को सांस लेने और बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। कई लोग बेसमेंट में भी फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने शटर तोड़कर बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और एक ही एग्जिट होने के कारण हालात और बिगड़ गए। घटना पर बयान देते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार होटल में सुरक्षा व्यवस्थाएं बेहद कमजोर थीं। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक आशंका है कि आग रेस्टोरेंट के किचन या इलेक्ट्रिक उपकरण से शुरू हुई हो सकती है। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सुबह 8.50 बजे सूचना मिली जिसके बाद सात फायर टेंडर तुरंत मौके पर भेजे गए। राहत और बचाव अभियान में कुल 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इमारत में बेसमेंट सहित कुल छह मंजिलें थीं, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इमारत में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो पास के अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। हादसे के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी गई और बचाव कार्य तेजी से पूरा किया गया। इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली का यह अग्निकांड एक बार फिर शहरी भवन सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सुरक्षित निकास और पर्याप्त सीढ़ियों की व्यवस्था होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

कोलकाता में भव्य शपथ ग्रहण, 35 नए मंत्रियों के शामिल होने से पश्चिम बंगाल सरकार का विस्तार

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल का व्यापक विस्तार किया है। कोलकाता में आयोजित एक औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय जनता पार्टी के 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिससे राज्य सरकार का मंत्रिमंडल 41 सदस्यों तक पहुंच गया है। इस विस्तार को प्रशासनिक मजबूती और क्षेत्रीय संतुलन साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और अनुभवों को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं। कार्यक्रम में शपथ ग्रहण का आयोजन राजभवन में किया गया, जहां सभी नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस विस्तार के बाद राज्य सरकार ने मंत्रियों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है, ताकि प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। पहले वर्ग में 13 विधायकों को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें Deepak Burman, Tapas Roy, Dr. Shankar Ghosh, Manoj Kumar Oraon, Arjun Singh, Gauri Shankar Ghosh, Swapan Dasgupta, Jagannath Chattopadhyay, Kalyan Chakraborty, Ajay Poddar, Sarbadwata Mukherjee, Dudh Kumar Mondal और Anup Kumar Das शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में तीन विधायकों को शामिल किया गया है, जिनमें Dr. Indranil Khan, Malati Rava Roy और Rajesh Mahato को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं तीसरी श्रेणी में 19 राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिनमें Joel Murmu, Hare Krishna Bera, Anandamay Barman, Ashok Dinda, Nadear Chand Bauri, Vishal Lama, Shantanu Pramanik, Moumita Biswas Mishra, Umesh Roy, Purnima Chakraborty, Kaushik Chowdhury, Bhaskar Bhattacharya, Debakar Gharami, Amia Kisku, Kalita Majhi, Gargi Das Ghosh, Biraj Biswas, Dipankar Jana और Sumana Sarkar के नाम शामिल हैं। राज्य सरकार के अनुसार इस बड़े विस्तार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को गति देना, विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को मजबूत करना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर मंत्रिमंडल विस्तार से राज्य में नीतिगत निर्णय प्रक्रिया तेज हो सकती है और जमीनी स्तर पर सरकार की पहुंच बढ़ सकती है। कोलकाता में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह को राज्य की राजनीतिक दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे दोनों को मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है। आने वाले समय में इस नए मंत्रिमंडल के कामकाज और नीतिगत फैसलों पर पूरे राज्य की नजर बनी रहेगी।

बिहार में बंगले पर सियासत तेज, तेज प्रताप ने नीतीश कुमार को भी नोटिस देने की उठाई मांग

नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी विवाद के बीच राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जन जन पार्टी के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निशाने पर लिया है। तेज प्रताप यादव ने साफ कहा कि यदि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से सरकारी आवास खाली करवाना चाहती है तो यही नियम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भी पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उन्हें भी सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलना चाहिए। तेज प्रताप ने तंज कसते हुए कहा कि सबसे पहले नीतीश कुमार अपना आवास छोड़ दें, उसके बाद राबड़ी देवी भी बंगला खाली कर देंगी। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि सरकार ने राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर बंगला खाली करने का निर्देश दिया है तो उन्होंने जवाब दिया कि सरकार को समान नियम अपनाने चाहिए और इसी तरह का नोटिस नीतीश कुमार को भी जारी करना चाहिए। तेज प्रताप का यह बयान ऐसे समय आया है जब बंगला विवाद बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। इससे पहले राबड़ी देवी की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्या भी इस मामले में सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। रोहिणी ने कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो वह जबरन बंगला खाली करवाकर दिखाए। उनके अनुसार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 27 मई को एक आदेश जारी कर 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया। इसके साथ ही राबड़ी देवी को आवास खाली करने के निर्देश दिए गए। यह वही बंगला है जिसमें राबड़ी देवी पिछले करीब दो दशकों से रह रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर राबड़ी देवी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह बंगला खाली नहीं करेंगी। उनका कहना है कि सरकार चाहे जितना दबाव बनाए लेकिन उन्हें जबरन हटाना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि चाहती है तो बलपूर्वक कार्रवाई करके दिखाए। बंगला विवाद अब केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है तो दूसरी ओर राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है तथा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

सिंगूर में टाटा ग्रुप की वापसी को लेकर सियासत तेज, समिक भट्टाचार्य बोले—बंगाल में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है

नई दिल्ली ।  पश्चिम बंगाल की सिंगूर राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने टाटा समूह की संभावित वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सिंगूर या पश्चिम बंगाल में किसी भी रूप में टाटा समूह की वापसी राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और इससे निवेश का माहौल मजबूत होगा। उनके अनुसार राज्य को लंबे समय से औद्योगिक विकास में जो नुकसान हुआ है, उसे सुधारने के लिए बड़े और भरोसेमंद औद्योगिक समूहों की वापसी आवश्यक है। समिक भट्टाचार्य ने सिंगूर विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना का राज्य से बाहर जाना पश्चिम बंगाल की औद्योगिक छवि पर गहरा असर छोड़ गया था। उनके मुताबिक उस समय बने माहौल ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा की, जिसका प्रभाव आज भी कहीं न कहीं देखा जाता है। उन्होंने दावा किया कि टाटा समूह जैसी प्रतिष्ठित कंपनी की वापसी से यह संदेश जाएगा कि बंगाल फिर से बड़े उद्योगों के लिए तैयार है। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि टाटा समूह देश के सबसे पुराने और भरोसेमंद औद्योगिक घरानों में से एक है, और उनकी मौजूदगी किसी भी राज्य के लिए विकास की दृष्टि से सकारात्मक संकेत मानी जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भूमि और निवेश से जुड़ी नीतियों में स्पष्टता और स्थिरता लाई जाए, तो बंगाल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश संभव है। सिंगूर प्रकरण पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। नैनो परियोजना के दौरान हुए भूमि अधिग्रहण विवाद ने राज्य में व्यापक आंदोलन को जन्म दिया था, जिसका राजनीतिक असर भी दूरगामी साबित हुआ। उसी दौर में राज्य की औद्योगिक नीति और निवेश माहौल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं, जिनका प्रभाव वर्षों तक बना रहा। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि स्पष्ट भूमि नीति के बिना बड़े उद्योगों का आना कठिन है, क्योंकि कंपनियां स्थिर और भरोसेमंद नियमों की अपेक्षा करती हैं। उनके अनुसार केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यावहारिक सुधारों से ही औद्योगिक पुनर्जागरण संभव है। इस पूरे मुद्दे पर एक बार फिर बंगाल की राजनीति में बहस तेज हो गई है, जहां सिंगूर न केवल एक ऐतिहासिक विवाद का प्रतीक है, बल्कि राज्य के औद्योगिक भविष्य की दिशा तय करने वाला विषय भी बना हुआ है।

PM Surya Ghar Yojana: 40 लाख घरों में लगे सोलर पैनल, MP के 1.21 लाख परिवारों को मिला लाभ

PM SURYA GHAR YOJNA

HIGHLIGHTS: देशभर में 40 लाख घरों में लगे रूफटॉप सोलर मध्य प्रदेश के 1.21 लाख घरों को मिला लाभ प्रदेश में 456 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बिजली बिल में कमी और आत्मनिर्भरता पर जोर पीएम सूर्य घर योजना से बढ़ा हरित ऊर्जा अभियान   PM Surya Ghar Yojana: मध्यप्रदेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पीएम सूर्य घर योजना देशभर में तेजी से आगे बढ़ रही है। बता दें कि इस योजना के तहत लोगों के घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, ताकि लोग सस्ती और स्वच्छ बिजली प्रदान की जा सके। सरकार का कहना है कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत अब तक देशभर के करीब 40 लाख घरों में सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग पर भटके बुजुर्ग दंपती, अलर्ट पुलिस ने सकुशल किया रेस्क्यू मध्य प्रदेश में भी बढ़ा सोलर नेटवर्क मध्य प्रदेश में भी इस योजना का असर तेजी से दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश के 1 लाख 21 हजार 838 से ज्यादा घरों में सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। इन पैनल्स में करीब 456 मेगावाट से ज्यादा बिजली बन रही है और लोगों के बिजली बिल भी कम हो रहे हैं। सोशल मीडिया स्टार पर गंभीर आरोप, सरेंडर के बाद बढ़ी हलचल लोगों को मिल रहा फायदा सोलर पैनल लगाने से लोगों को काफी सुविधा मिली है और इसके चलते वे खुद अपनी जरूरत की बिजली बना पा रहे हैं। इससे बिजली खर्च कम हो रहा है। साथ ही सोलर ऊर्जा से प्रदूषण भी कम होता है, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा माना जाता है। चुनावी झटकों के बाद मैदान में उतरे अभिषेक बनर्जी, हिंसा प्रभावित कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर साधेंगे संगठन आगे और बढ़ेगी योजना सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और ज्यादा घरों तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है। पीएम सूर्य घर योजना को देश में हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।   स्वच्छ ऊर्जा से रोशन नया भारत…. आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ भारत को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। आज देशभर के 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित हुए हैं,… pic.twitter.com/kknJkamBHQ — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 29, 2026