भारत के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एएमसीए की रफ्तार तेज, 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार करने का लक्ष्य

नई दिल्ली । भारत ने अपनी वायुसेना को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए कार्यक्रम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस आरएफपी के साथ ही देश के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के विकास की प्रक्रिया ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐसा आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना है जो स्टील्थ तकनीक, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और लंबी दूरी तक प्रभावी संचालन क्षमता से लैस हो। आरएफपी के अनुसार बिडिंग प्रक्रिया 11 जून से शुरू होगी और 27 जुलाई को समाप्त होगी, जबकि 28 जुलाई को बोली खोली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के तहत चयनित साझेदार को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के मात्र 30 महीनों के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान सुनिश्चित करनी होगी। परियोजना के तहत कुल पांच लो-ऑब्जर्वेबल प्रोटोटाइप विमान तैयार किए जाएंगे, जिससे परीक्षण और विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन भी बनाया जाएगा ताकि विमान की मजबूती और प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया जा सके। इस पूरे विकास कार्य की जिम्मेदारी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को सौंपी गई है, जो डिजाइन डेटा और तकनीकी ड्रॉइंग्स के आधार पर निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इस परियोजना को आगे बढ़ाएगी। चयनित बोलीदाता को न केवल निर्माण कार्य करना होगा बल्कि फ्लाइट टेस्टिंग, टाइप सर्टिफिकेशन और तकनीकी मूल्यांकन में भी सहयोग देना होगा। विमान को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में उच्च स्तर की दक्षता और उत्तरजीविता क्षमता प्रदान कर सके। एएमसीए परियोजना के लिए देश के तीन प्रमुख निजी क्षेत्र नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा भारत फोर्ज के साथ बीईएमएल जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह मॉडल भारत में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक होगी, जिसके तहत इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई न दे। इसमें हथियारों और मिसाइलों को बाहरी हिस्सों की बजाय विमान के अंदरूनी कम्पार्टमेंट में रखा जाएगा, जिससे इसकी रडार क्रॉस सेक्शन क्षमता और कम हो जाएगी। यह विमान दो इंजन वाला मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान होगा, जो लगभग 1.2 से 1.8 मैक की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगा। रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में भारतीय वायुसेना निर्धारित स्क्वाड्रन क्षमता से कम विमानों के साथ संचालन कर रही है। ऐसे में एएमसीए, तेजस के उन्नत संस्करणों के साथ मिलकर भविष्य में वायुसेना की ताकत को नई दिशा देगा। भारत पहले ही तेजस फाइटर जेट के जरिए स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को मजबूत कर चुका है और अब इस परियोजना के जरिए अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक में प्रवेश कर रहा है।
Petrol Diesel Price hike:10 में तीसरी बार बढ़े दाम, पेट्रोल 87 और डीजल 91 रूपए हुआ महंगा

HIGHLIGHTS: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 प्रति लीटर महंगा 10 दिन में तीसरी बार बढ़े ईंधन के दाम मई में अब तक करीब ₹5 प्रति लीटर बढ़ोतरी ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा युद्ध से पहले 70 डॉलर था कच्चे तेल का भाव Petrol Diesel Price hike: नई दिल्ली। देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, ऐसे में आज 23 मई को एक बाद फिर तेल कंपनियों ने इनके दाम बढ़ा दिए हैं। जिसके चलते फ़िलहाल दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा होकर ₹92.49 पर पहुंच गए हैं। Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम इस महीने 5 रुपये महंगा हुआ ईंधन इस महीने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी हुई है। पिछले हफ्ते 15 मई को सबसे पहले 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 4 दिन पहले 19 मई को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 90 पैसे प्रति लीटर का दूसरा इजाफा किया। यदि 23 मई 2026 को हुई तीसरी बढ़ोतरी को मिलाकर देखें तो मात्र 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल दोनों करीब 5 रुपये प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। जाने आपके शहर का दाम डीजल दिल्ली – 92.49 रुपये नोएडा – 92.84 रुपये भोपाल – 111.71 रुपये चंडीगढ़ – 86.49 रुपये गुवाहाटी – 94.39 रुपये जयपुर – 95.05 रुपये पटना – 96.53 रुपये लखनऊ – 92.64 रुपये पोर्टब्लेयर – 82.22 रुपये रांची – 97.66 रुपये कोलकाता – 97.02 रुपये चेन्नई – 96.98 रुपये पेट्रोल दिल्ली – 99.51 रुपये नोए़़डा – 99.51 रुपये भोपाल – 96.85 रुपये चंडीगढ़- 98.95 रुपये गुवाहाटी – 103.01 रुपये जयपुर – 109.87 रुपये पटना – 110.37 रुपये लखनऊ – 99.28 रुपये पोर्टब्लेयर – 92.16 रुपये रांची – 102.60 रुपये कोलकाता – 110.64 रुपये चेन्नई – 105.31 रुपये कच्चे तेल में तेज़ी से आ रहा उछाल ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडियट (WTI) क्रूड 1.2% की तेजी के साथ 97.46 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। युद्ध से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी। लगातार बढ़ती क्रूड ऑयल की कीमतों का असर अब सीधे पेट्रोल और डीजल के दामों पर दिखाई दे रहा है, जिसके चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ईंधन की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हैं। 23 मई 2026 का राशिफल: किस राशि का दिन रहेगा शानदार, जानें भविष्यफल क्या आगे और महंगा होगा पेट्रोल एक्सपर्ट्स की मने तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। कीमतों में बदलाव पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल की स्थिति पर निर्भर करेगा। मौजूदा हालात को देखते हुए राहत की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेल कंपनियों को प्रति लीटर 9 से 12 रुपये तक का नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई के लिए आगे भी कीमतें बढ़ सकती हैं।
बंगाल में TMC को एक और बड़ा झटका, फलता में कमजोर पड़ा ममता का किला, भतीजे का था दबदबा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से पार्टी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले फलता क्षेत्र में अब टीएमसी की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है। यह इलाका पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहां प्रभावशाली नेता जहांगीर खान की मजबूत पकड़ को टीएमसी की ताकत माना जाता था, लेकिन चुनावी मैदान से उनके हटने के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। कुछ ही दिनों में बदला माहौल29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान फलता क्षेत्र में हर तरफ तृणमूल कांग्रेस के झंडे और कार्यकर्ता नजर आ रहे थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। क्षेत्र में अन्य राजनीतिक दलों के झंडे दिखाई दे रहे हैं, जबकि टीएमसी की मौजूदगी काफी कमजोर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जहांगीर खान ने चुनावी मुकाबले से खुद को अलग कर लिया है और उसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से भी नजर नहीं आए। बताया जा रहा है कि मतदान के दिन भी वह क्षेत्र में मौजूद नहीं थे। अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते थे जहांगीरजहांगीर खान को डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 में इस इलाके में टीएमसी को भारी समर्थन मिला था। हालांकि, खान के चुनाव से हटने के बाद पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया। पुनर्मतदान में 86 फीसदी से ज्यादा वोटिंगगुरुवार को सीट पर दोबारा मतदान कराया गया, जिसमें 86 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई थी। दरअसल, 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और मशीनों पर इत्र जैसे पदार्थ तथा टेप लगाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद पुनर्मतदान का फैसला लिया गया। भाजपा और वाम मोर्चे के बीच सीधी टक्करजहांगीर खान के चुनावी मैदान से हटने के बाद टीएमसी की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। अब इस सीट पर मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और माकपा प्रत्याशी शंभूनाथ कुर्मी के बीच माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक मोल्ला मैदान में हैं। भवानीपुर के बाद एक और चुनौतइससे पहले भवानीपुर सीट पर भी तृणमूल कांग्रेस को झटका लगा था। ममता बनर्जी को वहां शुभेंदु अधिकारी ने बड़े अंतर से हराया था। इससे पहले 2021 विधानसभा चुनाव में भी ममता को नंदीग्राम सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। अब फलता में बदलते हालात टीएमसी के लिए नई राजनीतिक चुनौती बनते दिख रहे हैं।
कैबिनेट में बायोगैस को बढ़ावा देने पर जोर…. PM मोदी ने मंत्रियों से कहा- ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत खोजें

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने एक अहम निर्देश दिया है। गुरुवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में पीएम मोदी ने ऊर्जा के नए और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज करने को कहा है। उन्होंने खास तौर पर रसोई गैस (LPG) के विकल्प के रूप में बायोगैस को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। 5 देशों के दौरे से लौटते ही ऐक्शन में पीएमयूएई (UAE) और चार यूरोपीय देशों का अहम दौरा पूरा करके लौटने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के साथ यह मैराथन बैठक की, जो करीब साढ़े तीन घंटे तक चली। गौरतलब है कि पीएम के इस विदेशी दौरे पर भी पश्चिमी एशिया का तनाव और उसके परिणाम चर्चा के मुख्य विषय रहे थे। इस बैठक की शुरुआत विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक संक्षिप्त प्रेजेंटेशन से हुई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के इस 5 देशों के दौरे के मुख्य नतीजों की जानकारी दी। इसके बाद विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। ‘सुधारों से आम जनता को परेशानी न हो’बैठक में पीएम मोदी ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन को आसान बनाने) पर सबसे ज्यादा फोकस किया। उन्होंने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि सरकार की किसी भी नई पहल या सुधार से आम नागरिकों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। सुधारों का एकमात्र उद्देश्य जनता की जिंदगी को आसान बनाना होना चाहिए। ‘विकसित भारत 2047 सिर्फ वादा नहीं, कमिटमेंट है’प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार से पूरी ऊर्जा के साथ सुधारों को लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत 2047’ सिर्फ एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि देश के प्रति एक कमिटमेंट है। पीएम ने मंत्रियों को ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म’ का अपना गवर्नेंस मंत्र याद दिलाया। उन्होंने कहा कि हमें पुरानी बातों या अफसोस में उलझने के बजाय पूरी तरह से भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मंत्रालयों का रिपोर्ट कार्ड और रैंकिंगएनडीए-3 सरकार आगामी 9 जून को सत्ता में अपने दो साल पूरे करने जा रही है। इसे देखते हुए बैठक में कई प्रमुख मंत्रालयों ने पिछले दो सालों में किए गए सुधारों पर अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की। इनमें विदेश, कृषि, वन, सड़क परिवहन, कॉरपोरेट मामले, श्रम, वाणिज्य और ऊर्जा मंत्रालय शामिल रहे। इसके अलावा कैबिनेट सचिव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने भी सुधारों को लेकर अपना प्रेजेंटेशन दिया। बैठक के दौरान मंत्रियों को उनके मंत्रालयों और विभागों के प्रदर्शन से भी अवगत कराया गया। फाइलें निपटाने और जनता की शिकायतें दूर करने जैसे कई पैमानों पर कामकाज की समीक्षा की गई। इसके आधार पर हर इंडिकेटर में टॉप-5 और बॉटम-5 (सबसे खराब प्रदर्शन वाले) मंत्रालयों की रैंकिंग भी तैयार की गई है।
15,000 करोड़ का बोझ बढ़ा! सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को माना सामान्य बिजली उपभोक्ता, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज अनिवार्य

नई दिल्ली । भारतीय ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने Indian Railways को बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा देने से इनकार कर दिया है। इस निर्णय के बाद रेलवे को अब सामान्य उपभोक्ता की तरह बिजली खरीद पर सभी लागू सरचार्ज चुकाने होंगे, जिससे उस पर करीब 15,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में था, जिसमें रेलवे यह दावा करता रहा था कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है और उसे बिजली वितरण से जुड़े अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। रेलवे की दलील थी कि उसके पास अपना मजबूत बिजली ढांचा और नेटवर्क मौजूद है, जिसके आधार पर वह ग्रिड से सीधे बिजली खरीदता है और उसका उपयोग अपने संचालन में करता है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी वही माना जा सकता है, जो बिजली को आगे किसी तीसरे पक्ष को आपूर्ति करता हो। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रेलवे का पूरा बिजली ढांचा उसके आंतरिक उपयोग के लिए है, जिसमें ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों का संचालन शामिल है। इसे किसी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर रेलवे को सामान्य औद्योगिक उपभोक्ता माना गया है, जिसके कारण अब उसे क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा। इस फैसले का सीधा असर रेलवे की वित्तीय योजनाओं पर पड़ सकता है। पिछले कई वर्षों से रेलवे ओपन एक्सेस के जरिए सस्ती बिजली खरीदकर बड़े पैमाने पर बचत करने की कोशिश कर रहा था। इस रणनीति के तहत हजारों करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब नए आदेश के बाद यह पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि राज्यों के हिसाब से यह सरचार्ज प्रति यूनिट काफी अधिक होगा, जिससे कुल मिलाकर भारी देनदारी बन सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य बिजली वितरण कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि अब बड़े उपभोक्ताओं से मिलने वाला सरचार्ज उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगा। वहीं रेलवे के लिए यह एक नई चुनौती है, क्योंकि वह पहले ही इलेक्ट्रिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में रेलवे को अपनी बिजली खरीद रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ने के साथ जिस बचत की उम्मीद की जा रही थी, वह अब इस अतिरिक्त लागत के कारण कम हो सकती है। इससे रेलवे के परिचालन खर्च और बजट प्रबंधन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। कुल मिलाकर यह फैसला ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र के बीच वित्तीय संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करता है। एक ओर जहां राज्यों की बिजली कंपनियों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े उपभोक्ता के लिए यह निर्णय एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है।
सार्वजनिक परिवहन बनाम वीआईपी संस्कृति: आशुतोष की अपील से फिर केंद्र में आए अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली । देश और दुनिया में बढ़ते ऊर्जा संकट और राजनीतिक सादगी की बहस के बीच एक बार फिर सार्वजनिक जीवनशैली और नेताओं की यात्रा शैली चर्चा के केंद्र में आ गई है। इसी संदर्भ में आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और वरिष्ठ पत्रकार Ashutosh ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की है जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। आशुतोष ने केजरीवाल से अपील की है कि वे एक बार फिर मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन की सादगी को दोहराएं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर तनाव गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति से जुड़े मार्गों में आई बाधाओं के कारण कई देशों में ईंधन की कीमतों पर असर देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत में भी महसूस किया जाने लगा है। ऐसे माहौल में सार्वजनिक जीवन में ईंधन की खपत और वीआईपी काफिलों की लागत पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में आशुतोष का बयान और अधिक राजनीतिक महत्व रखता है। आशुतोष ने अपने बयान में उस पुराने क्षण को भी याद दिलाया जब अरविंद केजरीवाल ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान मेट्रो से यात्रा की थी। उस समय इसे सादगी और जनता से जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा गया था। अब आशुतोष का कहना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियों में राजनीतिक नेतृत्व सादगी का संदेश देता है, तो यह जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और ईंधन बचत जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी असर पड़ेगा। इस बीच देश के कई राज्यों में शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपने काफिलों और सरकारी वाहनों के उपयोग में कटौती के निर्णय भी सामने आए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से वीआईपी काफिलों के आकार को सीमित करने की अपील के बाद विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव देखे जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सरकारी वाहनों के उपयोग को अधिक नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं, जबकि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या में कटौती की है। इसी तरह अन्य राज्यों में भी प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सादगी और संसाधन बचत को लेकर नए कदम उठाए जा रहे हैं। बिहार में उपमुख्यमंत्री स्तर के नेतृत्व ने भी अपने काफिले को सीमित करने की दिशा में निर्णय लिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सार्वजनिक जीवन में संयम और खर्च नियंत्रण को लेकर एक व्यापक संदेश उभर रहा है। आशुतोष की यह टिप्पणी केवल एक व्यक्तिगत अपील नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राजनीतिक प्रतीकवाद के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उपयोग नेताओं द्वारा किया जाना जनता के बीच एक मजबूत संदेश देता है कि शासन और नेतृत्व केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आम नागरिक के अनुभवों से भी जुड़ा है। हालांकि इस पूरे मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है, लेकिन इतना तय है कि सादगी, ऊर्जा संकट और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर यह बहस आगे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी रहेगी।
पेट्रोल-डीजल के रेट में तेज़ी जारी, महानगरों में नए दामों ने बढ़ाई महंगाई की मार

नई दिल्ली । देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। मंगलवार को तेल कंपनियों ने ईंधन के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि कर दी, जो पिछले कुछ दिनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। इससे पहले भी कुछ ही दिनों के अंतराल में पेट्रोल और डीजल के रेट में तेज़ इजाफा देखा गया था, जिसके बाद लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 98 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है, जबकि डीजल भी 91 रुपये प्रति लीटर से ऊपर हो गया है। पहले की तुलना में यह बढ़ोतरी लोगों के रोजमर्रा के बजट पर सीधा असर डाल रही है। लगातार बढ़ते दामों ने खासकर मध्यम वर्ग और दैनिक यात्रा करने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के अन्य बड़े शहरों में भी ईंधन की कीमतों में समान रूप से बढ़ोतरी देखने को मिली है। मुंबई में पेट्रोल का भाव अब 107 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गया है, जबकि डीजल भी महंगा होकर नए स्तर पर पहुंच गया है। कोलकाता में भी पेट्रोल की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है और डीजल की कीमतें भी लगातार ऊपर जा रही हैं। वहीं चेन्नई में भी पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम बढ़ने से वहां के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। ईंधन की कीमतों में इस लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव को मुख्य कारण माना जा रहा है। साथ ही विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति भी कीमतों पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अगर कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते, तो आने वाले समय में ईंधन और महंगा हो सकता है, जिससे घरेलू बाजार पर भी दबाव बढ़ेगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है। ट्रक, बस और टैक्सी सेवाओं की लागत बढ़ने से धीरे-धीरे रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे सब्जी, फल और किराना सामान की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसी कारण व्यापारिक और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग चिंता जता रहे हैं। विभिन्न संगठनों का मानना है कि ईंधन पर लगने वाले करों में राहत दी जानी चाहिए ताकि आम जनता को कुछ राहत मिल सके। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच लोग सरकार से स्थिर नीति और नियंत्रण की मांग कर रहे हैं, जिससे महंगाई के दबाव को कम किया जा सके और आम जीवन पर इसका असर सीमित हो।
धर्मांतरण और सरकारी लाभ पर HC की सख्ती, पूछा– कितने लोग ले रहे दोहरा फायदा?

नई दिल्ली(New Delhi)। Uttarakhand High Court में धर्मांतरण के बाद सरकारी योजनाओं और आरक्षण के कथित “दोहरी सुविधा” को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका पिथौरागढ़ निवासी दर्शन लाल द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के बाद भी पहले से मिल रहे सरकारी लाभों का फायदा उठा रहे हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि ऐसे कितने लोग हैं जिन्होंने धर्म परिवर्तन के बाद भी सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ लिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह ऐसे सभी मामलों को चिन्हित कर तीन सप्ताह के भीतर उन्हें पक्षकार बनाए और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। याचिका में दावा किया गया है कि इस कथित स्थिति के कारण वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। याचिकाकर्ता ने इस पर रोक लगाने की मांग भी अदालत से की है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है। इसी बीच प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। रुद्रपुर में जिला प्रशासन ने धर्मांतरण, अवैध नशा, अतिक्रमण और अन्य अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश जारी किए हैं।
तेज रफ्तार और लापरवाही बनी काल, पालघर सड़क हादसे में 100 लोगों से भरे ट्रक का दर्दनाक अंत

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पालघर जिले में मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुआ भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द छोड़ गया। सोमवार की रात यह हादसा उस समय हुआ जब एक ट्रक में सवार होकर 100 से अधिक लोग एक सगाई समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे थे। खुशियों से भरा यह सफर कुछ ही पलों में मौत और तबाही के मंजर में बदल गया, जब सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार कंटेनर ने ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक टक्कर में 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयानक था कि दोनों वाहन टक्कर के बाद सड़क पर बुरी तरह पलट गए और ट्रक में बैठे कई लोग नीचे दब गए। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। ट्रक में क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे, जिसके कारण टक्कर का असर और भी भयावह हो गया। कई महिलाएं और बच्चे भी इस हादसे की चपेट में आ गए, जिनमें से कुछ की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद पूरा हाईवे कुछ समय के लिए जाम में बदल गया। सड़क पर फैले मलबे और पलटे वाहनों के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और क्रेन की मदद से वाहनों को हटाने का काम शुरू किया गया। घंटों की मशक्कत के बाद ही यातायात सामान्य हो सका। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में इस भीषण दुर्घटना के पीछे तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और चालक की लापरवाही को मुख्य कारण माना जा रहा है। ट्रक में सवार लोगों की संख्या निर्धारित सीमा से काफी अधिक थी, जिससे दुर्घटना के समय नियंत्रण पूरी तरह बिगड़ गया। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की गंभीर आवश्यकता को उजागर करता है। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। खुशियों के माहौल में निकला यह सफर अचानक चीखों और दर्द की कहानी बन गया। जिन परिवारों ने एक साथ सगाई समारोह में शामिल होने की योजना बनाई थी, उन्हें अब अपनों के खोने का असहनीय दुख झेलना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है, जबकि घायलों के इलाज की व्यवस्था युद्ध स्तर पर की जा रही है। यह हादसा लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक कड़वी याद बनकर रहेगा।
गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

नई दिल्ली । देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब आम लोगों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में भारतीयों ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही है। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की थी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना बताया गया था। अब एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है और अपनी खरीदारी की आदतों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 61 प्रतिशत ने कहा कि वे अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करेंगे। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो नियमित रूप से सोना खरीदते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते लोग अब खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं। भारत में सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी काफी गहरा है। शादियों, त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का सोना खरीदने को लेकर संयम दिखाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बीते वित्तीय वर्ष में भारत का सोना आयात बिल काफी बढ़ गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात की कुल लागत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आयात की मात्रा में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन ऊंची कीमतों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने में कमी करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विदेशी मुद्रा की बचत होने से आयात संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और आर्थिक दबाव कम किया जा सकेगा। हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि सभी लोग अपनी पारंपरिक आदतें बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे शादियों और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना जारी रखेंगे। कई लोगों का यह भी मानना है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है। इस सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि देश में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और सरकारी अपीलों का असर अब आम नागरिकों की सोच और फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।