सूर्यकुमार यादव बने पिता: बेबी शावर में पत्नी देविशा का ट्रेडिशनल और रॉयल लुक वायरल

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के घर 7 मई 2026 को खुशियों ने दस्तक दी, जब उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम रिद्धिमा रखा गया है। बेटी के जन्म के बाद परिवार में जश्न का माहौल देखने को मिला और इस खास मौके पर बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। बेबी शावर में दिखा प्यार और साथ का खूबसूरत अंदाजबेबी शावर फंक्शन में सूर्यकुमार यादव और देविशा का प्यार भरा अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है।तस्वीरों में सूर्यकुमार अपनी पत्नी पर प्यार लुटाते दिखे। कभी उनके बालों में गजरा लगाते नजर आए तो कभी उन्हें प्यार से खाना खिलाते हुए दिखाई दिए। वहीं देविशा अपने मॉम टू बी ग्लो और पारंपरिक साड़ी लुक में बेहद खूबसूरत नजर आईं। देविशा का ट्रेडिशनल साड़ी लुक बना आकर्षणदेविशा ने इस खास मौके पर गोल्डन और ऑरेंज टोन की कांजीवरम साड़ी पहनी, जो साउथ इंडियन रॉयल लुक दे रही थी। साड़ी में गोल्डन जरी वर्क और ग्रीन बॉर्डरनीट ड्रेपिंग के साथ बेबी बंप फ्लॉन्ट ऑरेंज हैवी एम्ब्रॉयडरी ब्लाउज उनका पूरा लुक बेहद ग्रेसफुल और एलिगेंट नजर आया। ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाया ग्लैमरदेविशा ने अपने लुक को पारंपरिक साउथ इंडियन टच दिया: लेयर्ड नेकलेस और ग्रीन स्टोन चोकर झुमके, मांग टीका और कमरबंध मेहंदी लगे हाथ और सॉफ्ट वेवी हेयरस्टाइल बालों में लगा गजरा, जिसे सूर्यकुमार ने खुद सजाया मेकअप को उन्होंने सॉफ्ट और नेचुरल रखा, जिससे उनका प्रेग्नेंसी ग्लो और भी उभरकर सामने आया। सूर्यकुमार यादव का सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुकसूर्यकुमार यादव ने इस मौके पर ऑफ-व्हाइट एथनिक लुक चुना।उन्होंने टेक्सचर्ड बंदगला जैकेट को मैचिंग कुर्ता और पैंट के साथ पेयर किया, जो देविशा के हैवी ट्रेडिशनल लुक के साथ शानदार कॉन्ट्रास्ट बना रहा था। कपल गोल्स बने सूर्यकुमार और देविशादोनों का यह बेबी शावर लुक सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है।जहां एक तरफ देविशा का रॉयल ट्रेडिशनल अंदाज नजर आया, वहीं सूर्यकुमार का सिंपल और एलीगेंट लुक उन्हें परफेक्ट कपल बनाता दिखा। सूर्यकुमार यादव और देविशा की यह खास झलक सिर्फ एक फैमिली मोमेंट नहीं, बल्कि प्यार, साथ और नए जीवन की शुरुआत का खूबसूरत उत्सव है, जिसने फैंस का दिल जीत लिया है।
SC की बड़ी टिप्पणी, कहा- आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए महिलाएं क्यों दे अपने करियर की बलि?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादी के बाद महिलाओं (Women) के अधिकारों को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। SC ने इस बात पर जोर दिया है कि एक पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिला (Working Woman) से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह शादी (Marriage) के बाद अपनी पहचान और करियर की बलि दे दे। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर कोई महिला अपने करियर के लिए पति से अलग रह रही है, तो उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। SC में एक डेंटिस्ट पत्नी और एक आर्मी ऑफिसर के बीच चल रहे विवाद पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सिर्फ महिला से त्याग माने जाने की सोच को दकियानूसी बताया। पीठ ने कहा, “यह उम्मीद करना कि महिला हमेशा अपने करियर का त्याग करे और एक ‘आज्ञाकारी पत्नी’ की पारंपरिक छवि में सिमट कर रहे, यह एक पुरानी और दकियानूसी सोच है।” पीठ ने कहा कि महिला अपने पति के घर का महज एक हिस्सा नहीं है। उसकी अपनी बौद्धिक और पेशेवर आकांक्षाएं हैं, जिनका सम्मान होना चाहिए। क्या है पूरा मामला?बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जोड़े की शादी 2009 में हुई थी। पति सेना में अधिकारी था। वहीं पत्नी ने अहमदाबाद में अपना डेंटल क्लिनिक शुरू किया था। शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने आरोप लगाए कि महिला ने अपने परिवार के बजाय करियर को चुना और पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। अर्जी के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के इस फैसले को ‘क्रूरता’ माना था। कोर्ट ने कहा था कि पत्नी ने पति को बिना बताए अपना क्लिनिक शुरू किया और अहमदाबाद में रहने के दौरान ससुराल के बजाय अपने मायके में रुकना पसंद किया, जो सही नहीं है। वहीं गुजरात हाईकोर्ट ने भी 2024 में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। तलाक को दे दी मंजूरीसुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के नजरिए को रूढ़िवादी बताया। SC ने तीखे शब्दों में कहा, “आज की दुनिया में जहां महिलाएं लंबी छलांगे लगा रही हैं। सिर्फ इसलिए कि पति एक आर्मी ऑफिसर है, यह उम्मीद करना कि पत्नी अपने करियर के बारे में सोच भी नहीं सकती, एक सामंती मानसिकता को दर्शाता है।” फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को रिकॉर्ड से हटा दिया। हालांकि, पति ने दूसरी शादी कर ली है और दोनों के बीच रिश्ते सुधरने की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।
उड़ान से पहले विमान में आग, चेन्नई एयरपोर्ट पर मची अफरा-तफरी, टला बड़ा हादसा

नई दिल्ली । चेन्नई एयरपोर्ट की सामान्य सी सुबह अचानक एक तनावपूर्ण और खतरनाक स्थिति में बदल गई, जब एक यात्री विमान के विंग में उड़ान से ठीक पहले आग लग गई। विमान में लगभग 280 यात्री सवार थे और सभी अपनी यात्रा के लिए तैयार थे, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति ने ऐसा मोड़ लिया कि पूरी व्यवस्था सतर्क हो गई। जैसे ही विमान रनवे के पास अंतिम तैयारी में था, तकनीकी टीम ने विमान के एक विंग से धुआं निकलते देखा। पहले तो यह सामान्य तकनीकी संकेत समझा गया, लेकिन कुछ ही सेकंड में लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होते ही पायलट ने तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना दी और विमान को रोक दिया गया। इसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सुरक्षा तंत्र तुरंत सक्रिय हुआ। फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और बिना देर किए आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी गई। कुछ ही समय में आग को पूरी तरह बुझा दिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यदि थोड़ी भी देर होती, तो यह घटना गंभीर विमान दुर्घटना में बदल सकती थी। विमान में बैठे यात्रियों के बीच इस दौरान घबराहट फैल गई थी। कई लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से सहम गए, लेकिन क्रू मेंबर्स ने स्थिति को संभालते हुए सभी को शांत रखा और सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। सभी यात्रियों को बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ी राहत की स्थिति बनी। घटना के बाद पूरे एयरपोर्ट क्षेत्र में कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ और संबंधित हिस्से को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। तकनीकी टीम ने विमान की जांच शुरू कर दी है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह समस्या किसी तकनीकी खराबी या सिस्टम में अचानक आई गड़बड़ी के कारण हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इस घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा प्रणाली की तत्परता और महत्व को सामने रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विमानों में सुरक्षा व्यवस्था काफी उन्नत होती है, लेकिन नियमित जांच और समय पर प्रतिक्रिया ही ऐसी घटनाओं को बड़े हादसे में बदलने से रोकती है। यात्रियों के लिए यह अनुभव डरावना जरूर था, लेकिन सभी सुरक्षित बच गए, जो सबसे बड़ी राहत की बात है। एयरपोर्ट प्रशासन ने भी त्वरित कार्रवाई की सराहना की है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की बात कही है।
PM Modi Bengaluru Visit: कार्यक्रम स्थल के पास मिला विस्फोटक, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, जांच में जुटी पुलिस

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेंगलुरु यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा अलर्ट सामने आया है। रविवार को बेंगलुरु के बाहरी इलाके कागलीपुरा के पास उस क्षेत्र से दो जिलेटिन स्टिक बरामद की गईं, जहां से कुछ दूरी पर पीएम मोदी का कार्यक्रम आयोजित होना था। विस्फोटक मिलने की खबर के बाद सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु स्थित Art of Living Foundation के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित विशेष समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। यह कार्यक्रम संस्था के 45 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसी बीच कार्यक्रम स्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर फुटपाथ किनारे संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने से सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं। बेंगलुरु सेंट्रल रेंज के डीआईजी के अनुसार, प्रधानमंत्री के दौरे से पहले इलाके में नियमित सुरक्षा जांच की जा रही थी। इसी दौरान रविवार सुबह दो जिलेटिन स्टिक बरामद हुईं। बरामदगी के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया और बम निरोधक दस्ता तथा फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। घटना ऐसे समय सामने आई है जब खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में संभावित आतंकी खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। इसके बाद दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पुलिस को संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों, लावारिस सामान और खड़ी गाड़ियों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। बेंगलुरु पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची और क्या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश का एंगल जुड़ा हुआ है। फिलहाल अधिकारियों ने कहा है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।
राजनीतिक अनिश्चितता के बीच तमिलनाडु में भावनात्मक उबाल, समर्थक ने उठाया खौफनाक कदम

नई दिल्ली । तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद भी सरकार गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और रणनीतिक प्रयास जारी हैं। इसी अनिश्चितता के माहौल में जनता और समर्थकों के बीच बेचैनी बढ़ती जा रही है, जिसका असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। राज्य में सबसे अधिक सीटें हासिल करने वाली पार्टी TVK के प्रमुख C. Joseph Vijay को लेकर उम्मीदें और चर्चाएं तेज हैं, लेकिन स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा न मिलने के कारण सरकार गठन की प्रक्रिया अटकी हुई है। इस राजनीतिक गतिरोध ने न केवल दलों के भीतर बल्कि आम लोगों और समर्थकों के बीच भी भावनात्मक प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। शपथ ग्रहण और सत्ता हस्तांतरण को लेकर बनी अनिश्चितता ने हालात को और जटिल बना दिया है। इसी बीच एक बेहद चिंताजनक घटना ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जानकारी के अनुसार, लगभग 40 वर्ष के एक समर्थक ने कथित तौर पर सरकार गठन में हो रही देरी से आहत होकर आत्मदाह का प्रयास किया। वह व्यक्ति लंबे समय से विजय को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा रखता था और राजनीतिक घटनाक्रम में हो रही देरी से मानसिक रूप से प्रभावित बताया जा रहा है। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। यह घटना केवल एक व्यक्तिगत कदम नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बढ़ते राजनीतिक तनाव और भावनात्मक जुड़ाव का परिणाम भी माना जा रहा है। समर्थकों के बीच गहरी निष्ठा और उम्मीदें कई बार भावनात्मक फैसलों को जन्म देती हैं, और यही स्थिति अब तमिलनाडु की राजनीति में देखने को मिल रही है। राज्य के भीतर राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है, और ऐसे में इस घटना ने चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है। विभिन्न स्तरों पर नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों द्वारा लोगों से शांति और धैर्य बनाए रखने की अपील की जा रही है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया समय लेती है और जल्दबाजी या भावनात्मक निर्णय स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। सरकार गठन को लेकर बातचीत और राजनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं हो पाया है। राज्य की जनता फिलहाल असमंजस की स्थिति में है और सभी की निगाहें आने वाले राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी और तमिलनाडु में एक स्थिर सरकार का गठन संभव हो सकेगा, जिससे राजनीतिक तनाव कम होगा और सामान्य स्थिति बहाल हो पाएगी।
शुभेंदु अधिकारी बनेंगे नए मुख्यमंत्री, ब्रिगेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण..

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है। लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष और तीखे चुनावी मुकाबलों के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। इसी कड़ी में शुभेंदु अधिकारी आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड इस महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र बना हुआ है, जहां सुबह से ही उत्साह और हलचल का माहौल देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने मजबूत राजनीतिक पकड़ और प्रभावशाली नेतृत्व के जरिए अपनी स्थिति को और मजबूत किया। अब उनके सामने राज्य को नई दिशा देने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी जिम्मेदारी है। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इस बदलाव को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, जिसे वे एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख राजनीतिक चेहरे, सामाजिक प्रतिनिधि और अन्य क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां इस अवसर का हिस्सा बनेंगी। शहर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को भी विशेष रूप से मजबूत किया गया है ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके। ब्रिगेड ग्राउंड और उसके आसपास का इलाका सुबह से ही लोगों की भीड़ से भरा हुआ है। समर्थकों में जोश और उत्साह का माहौल है और कई जगहों पर जश्न जैसा वातावरण दिखाई दे रहा है। लोग इस क्षण को ऐतिहासिक मानते हुए इसे अपनी राजनीतिक उम्मीदों से जोड़कर देख रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। चुनावी समय में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जैसे रोजगार, विकास, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार, अब उन्हें धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर है। लोगों को उम्मीद है कि नई नेतृत्व व्यवस्था राज्य में स्थिरता और विकास का नया अध्याय शुरू करेगी। राज्य के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी आने वाले समय में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। उद्योग जगत से जुड़े लोग नई सरकार से बेहतर निवेश माहौल और रोजगार के अवसरों की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं युवा वर्ग भी अपने भविष्य को लेकर नई उम्मीदें देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है। आज का यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा और जनता की उम्मीदों का प्रतीक बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने शुरुआती फैसलों के जरिए जनता का भरोसा कितनी जल्दी जीत पाती है और राज्य को किस दिशा में आगे ले जाती है।
बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण नौ मई को कोलकाता (Kolkata.) के ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) में सुबह दस बजे होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगते ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो आठ मई को भाजपा विधायकों की बैठक होगी। इस सबमें सबसे अहम बात है पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का बंगाल जाना। अमित शाह (Amit Shah) के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शायद यह पहला मौका होगा कि जब वह किसी राज्य के नतीजे सामने आने के बाद बतौर पर्यवेक्षक उस राज्य का दौरा करेंगे। भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई सामान्य घटना नहीं है। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो चुका है। कौन बनेगा बंगाल का मुख्यमंत्री?भाजपा ने असम और बंगाल में शानदार जीत दर्ज की है। असम में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) का नाम तय माना जा रहा है। पूरे देश की निगाहें बंगाल पर टिकी हुई हैं। राज्य में सरकार बनाने की कवायद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शपथ ग्रहण से पहले गृह मंत्री का दौरा कई मायनों में अहम है। पर्यवेक्षक के रूप में गृह मंत्री दौरे के दौरान कई अहम फैसले कर सकते हैं। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर रणनीति बनेगी। बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। बंगाल के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की रेस में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह ममता बनर्जी के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें पार्टी ने दो दो सीटों से उतारा था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर टीएमसी को मात दी है। पिछली बार उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर में भी ममता को ही मात दी है। इससे उनका कद भाजपा में और बड़ा हो गया है। हालांकि अमित शाह के पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद से यह चर्चा जरूर होने लगी है कि अगर सबकुछ सामान्य तरीके से होना होता तो गृह मंत्री खुद बतौर पर्यवेक्षक बंगाल का दौरा नहीं करते। शुभेंदु नहीं तो कौन बनेगा बंगाल का CM?भारतीय जनता पार्टी ने राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने में हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली इसका ताजा उदाहरण हैं। तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने ऐसे नाम को आगे बढ़ाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब अमित शाह के दौरे के बाद से सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भी भाजपा ऐसा ही कुछ तो नहीं करने जा रही है। हालांकि, बाकी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी अलग है। यहां भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो पार्टी के भविष्य के हित में हो।
तमिलनाडु पुलिस ने विजय को दी गई CM जैसी सिक्योरिटी रातोंरात ली वापस… जानें इसकी वजह?

चेन्नई। तमिलनाडु पुलिस (Tamil Nadu Police) ने बुधवार (6 मई, 2026) रात को तमिझगा वेत्री कड़गम (Tamizhaga Vetri Kazhagam-TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय (C.Joseph Vijay) को दी गई कड़ी सुरक्षा और उनका काफिला वापस ले लिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बराबर दी जा रही ‘जेड-प्लस’ स्तर की सुरक्षा प्रोटोकॉल को घटाकर अब न्यूनतम कर दिया गया है। क्यों बढ़ाई गई थी सुरक्षा?दरअसल, 4 मई को मतगणना के दौरान ही TVK की भारी जीत के शुरुआती संकेत मिलने लगे थे। इसके कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने विजय के आवास और पार्टी कार्यालय पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह सुरक्षा TVK नेता के आवास पर पहुंचने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बढ़ाई गई थी। हालांकि, उनके रूट बंदोबस्त और अन्य सुरक्षा उपायों को देखकर यह साफ था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाकर सीधे मुख्यमंत्री के स्तर की कर दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन था तैनात?एक की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय की सुरक्षा की निगरानी के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया गया था। इसके साथ ही, राज्य पुलिस के सिक्योरिटी ब्रांच सीआईडी (CID) के एक दर्जन से अधिक सशस्त्र कमांडो ने सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक ‘एक्सेस कंट्रोल सिस्टम’ भी लगाया गया था। इसके अलावा, पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के दो अन्य अधिकारियों को सीधे खुफिया विभाग के महानिरीक्षक (IG) को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। इन अधिकारियों को अगले आदेश तक चुनाव से जुड़े जरूरी कामों के लिए विशेष ड्यूटी पर रखा गया था। अचानक क्यों वापस ली गई ‘Z-Plus’ सिक्योरिटी?एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा व्यवस्था TVK के वरिष्ठ नेताओं के अनुरोध के बाद ही वापस ली गई है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया, “वे (पार्टी नेता) नहीं चाहते थे कि विजय को ऐसा काफिला या वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल दिया जाए।” इसके बाद विशेष ड्यूटी पर लगाए गए तीनों बड़े अधिकारियों को भी वापस बुला लिया गया है और उन्हें उनकी पुरानी पोस्टिंग पर भेज दिया गया है। ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा रहेगी बरकरारराज्य पुलिस की विशेष सुरक्षा हटने के बाद भी विजय की सुरक्षा में कोई बड़ी चूक नहीं होगी, क्योंकि उनके पास केंद्र सरकार द्वारा दी गई ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा बरकरार रहेगी। जब भी वह कहीं सफर करते हैं या ठहरते हैं, तो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सशस्त्र गार्ड उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अभिनेता से राजनेता बने विजय की सुरक्षा के लिए पार्टी द्वारा रखे गए निजी गार्ड भी तैनात रहते हैं। यात्रा और सार्वजनिक सभाओं के दौरान स्थानीय पुलिस भी जरूरत के हिसाब से जवानों की तैनाती करती है। सरकार बनने पर अभी भी संशयइससे पहले विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव और नए गठजोड़ के तहत अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की और चुनाव पूर्व सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) से संबंध तोड़ लिए। द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने द्विध्रुवीय वर्चस्व को तोड़ते हुए टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के दो दिन बाद राज्यपाल कार्यालय से निमंत्रण मिलने पर टीवीके प्रमुख ने लोक भवन में अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें समर्थन देने वाले कांग्रेस विधायकों की सूची सौंपी। हालांकि, लोक भवन के सूत्रों ने संकेत दिया कि विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के संबंध में अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि राज्यपाल अर्लेकर विजय के पास समर्थन होने के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में से 108 सीटें जीतीं, को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। कांग्रेस की पांच सीटों के साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, कुल संख्या 112 हो जाती है। पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ रहे टीवीके प्रमुख को एक सीट से इस्तीफा देना होगा। इससे बहुमत का आंकड़ा घटकर 117 हो जाएगा और टीवीके की सीटों की संख्या 107 रह जाएगी। एक नए राजनीतिक गठजोड़ में, कांग्रेस ने यहां अपनी विधायक दल की बैठक के बाद विजय की टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही उसने द्रमुक से अलग होने की भी घोषणा की।
केरल में सत्ता वापसी के बाद कांग्रेस के लिए असली परीक्षा-नेतृत्व चयन बना सबसे बड़ा सवाल

नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नीत यूडीएफ की वापसी के बाद पार्टी के भीतर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। चुनावी सफलता के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और यह निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा। पार्टी के भीतर इस समय कई बड़े नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं, जिससे स्थिति काफी जटिल हो गई है। अलग-अलग गुटों के समर्थन और प्रभाव ने नेतृत्व चयन को और संवेदनशील बना दिया है। कांग्रेस के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह निर्णय प्रक्रिया को कितना पारदर्शी और संतुलित रख पाती है। अतीत में कई राज्यों में हुए नेतृत्व विवादों का असर पार्टी को लंबे समय तक झेलना पड़ा है, जिससे यह फैसला और भी अहम हो जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि इस बार भी निर्णय प्रक्रिया में असहमति या देरी होती है, तो इसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ सकता है और भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि क्या विधायकों की राय को प्राथमिकता दी जाएगी या अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। यही बात पूरे राजनीतिक परिदृश्य को अनिश्चित बनाए हुए है। कुछ नेताओं का मानना है कि केरल संगठन अपेक्षाकृत मजबूत और अनुशासित है, इसलिए यहां एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाकर संतुलित फैसला लिया जा सकता है, जिससे पार्टी की छवि मजबूत हो सकती है।
चुनावी रुझानों के बीच नया माहौल, महिलाओं ने बदलाव की संभावना पर जताई सकारात्मक सोच

नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में चुनावी रुझानों के शुरुआती संकेतों के साथ ही राज्य का राजनीतिक माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे आंकड़ों में एक खास रुझान सामने आने लगा है, वैसे-वैसे लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम में महिलाओं की ओर से आई प्रतिक्रियाओं ने विशेष ध्यान खींचा है, जहां उन्होंने मौजूदा स्थिति को लेकर संतोष और उम्मीद दोनों जाहिर की है। कई महिलाओं ने बातचीत के दौरान कहा कि वे लंबे समय से विकास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बेहतर स्थिति की उम्मीद कर रही थीं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं ने लोगों के बीच एक नई सोच को जन्म दिया है, खासकर महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर। इसी कारण उन्हें भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। कुछ महिलाओं ने यह भी माना कि राज्य में बदलाव की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उनका कहना है कि वे चाहती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति को और मजबूत किया जाए। मौजूदा रुझानों को वे इसी बदलाव की दिशा में एक संकेत के रूप में देख रही हैं। राजनीतिक हलचल के बीच यह भी साफ दिख रहा है कि जनता अब केवल वादों से नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव और परिणामों से प्रभावित हो रही है। महिलाओं की प्रतिक्रियाओं में यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि वे ऐसे नेतृत्व को प्राथमिकता देती हैं जो विकास और सुरक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान दे। शुरुआती रुझानों ने जहां राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, वहीं आम जनता की प्रतिक्रियाओं ने यह संकेत दिया है कि लोग अब अधिक जागरूक और अपेक्षाओं के साथ मतदान प्रक्रिया को देख रहे हैं। महिलाओं की उम्मीदें इस पूरे माहौल को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।