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ओवेरियन कैंसर के 6 शुरुआती संकेत जिन्हें महिलाएं अक्सर कर देती हैं नजरअंदाज, समय रहते पहचान बचा सकती है जान

नई दिल्ली । महिलाओं की सेहत से जुड़ी सबसे गंभीर बीमारियों में ओवेरियन कैंसर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। भारत में यह महिलाओं के बीच तीसरा सबसे आम कैंसर माना जाता है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इसके अधिकांश मामलों की पहचान तब होती है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में ओवेरियन कैंसर एडवांस स्टेज में सामने आता है, जिससे इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य दिखाई देते हैं और महिलाएं उन्हें रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लंबे समय तक ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट कैंसर” कहा जाता रहा है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती। यह शरीर को कई छोटे-छोटे संकेत देती है, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम लक्षणों में लगातार पेट फूलना शामिल है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के पेट हमेशा फूला हुआ महसूस हो या कपड़े अचानक टाइट लगने लगें, तो इसे सामान्य गैस की समस्या समझकर टालना ठीक नहीं है। दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है कम खाना खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होना। यदि थोड़ी मात्रा में भोजन करने के बावजूद बार-बार ऐसा लगे कि पेट पूरी तरह भर गया है, तो यह शरीर की चेतावनी हो सकती है। इसके साथ ही पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना भी ओवेरियन कैंसर का शुरुआती संकेत माना जाता है। यदि यह दर्द बार-बार लौटता है या लंबे समय तक बना रहता है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। महिलाओं को अपने मासिक धर्म चक्र में होने वाले बदलावों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। अनियमित पीरियड्स, अत्यधिक या बहुत कम ब्लीडिंग, अचानक मासिक चक्र में बदलाव या मेनोपॉज के बाद किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई बार महिलाएं इसे सामान्य हार्मोनल बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यह किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है। इसके अलावा असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज भी चिंता का विषय हो सकता है। यदि डिस्चार्ज में दुर्गंध हो, खून के निशान दिखाई दें या मेनोपॉज के बाद इस प्रकार की समस्या हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। बार-बार पेशाब लगना या अचानक यूरिन संबंधी आदतों में बदलाव भी ओवेरियन कैंसर के संकेतों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या महीने में 12 दिनों से ज्यादा महसूस हो, तो जांच करवाना बेहद जरूरी है। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट, ओवेरियन या कोलन कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि उनमें आनुवंशिक जोखिम अधिक हो सकता है। चूंकि ओवेरियन कैंसर की पहचान के लिए कोई नियमित और प्रभावी स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। शरीर के संकेतों को समझना और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना इस गंभीर बीमारी से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

7.8% जीडीपी ग्रोथ ने दिखाई ताकत, पर अर्थव्यवस्था के सामने बनी चुनौतियां

  राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा गत सप्ताह जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। यह दर पिछली तिमाही के लगभग समान है और इसके साथ एक सकारात्मक आश्चर्य भी जुड़ा हुआ है। दरअसल राॅयटर्स के अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण ने 7.2 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया था। इस प्रकार वित्त वर्ष 26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अस्थायी अनुमान अब 7.7 फीसदी है जो पिछले वर्ष दर्ज 7.1 फीसदी से काफी अधिक है। वर्ष की दूसरी छमाही में अपेक्षित सुस्ती नहीं आई। आंशिक रूप से इसका कारण राष्ट्रीय खातों में एक साथ चल रही आधार वर्ष में बदलाव की प्रक्रिया हो सकती है जिसमें स्थिर मूल्य गणनाओं के लिए आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया। इस बदलाव ने अन्य कुछ प्रणालीगत परिवर्तनों के साथ जीडीपी के स्तर को कम किया लेकिन वृद्धि दर को अधिक सुचारु और ऊंचा कर दिया। इन परिवर्तनों का प्रभाव बहस का विषय बन सकता है। पहले भी सांख्यिकीय पद्धति में बदलावों के साथ ऐसा हुआ है। खासकर क्योंकि नॉमिनल जीडीपी केवल 8.9 फीसदी बढ़ा है जो यह दर्शाता है कि अपेक्षा से कम जीडीपी डिफ्लेटर (नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी के बीच का अनुपात) ने इन विश्व-स्तरीय आंकड़ों को सहारा दिया। लेकिन यह भी ध्यान देना चाहिए कि सकारात्मक मांग प्रभाव पिछले सितंबर में संशोधित जीएसटी दर संरचना से और पहले दी गई आयकर राहत से लगातार सामने आते रहे। क्षेत्रवार आंकडों के मुताबिक चौथी तिमाही में वृद्धि अपेक्षाकृत व्यापक रही। सेवाएं 9 फीसदी से अधिक बढ़ीं और विनिर्माण 10 फीसदी से अधिक। निजी उपभोग की वृद्धि पिछले तिमाही से कुछ कम होकर 7.6 फीसदी रही लेकिन सकल स्थिर पूंजी निर्माण की 8.2 फीसदी वृद्धि के साथ मिलकर यह पर्याप्त रही। ध्यान रहे कि ये आंकड़े विशेष रूप से प्रभावशाली हैं क्योंकि फरवरी के अंत में खाड़ी संकट शुरू हुआ था जिससे तिमाही के एक-तिहाई हिस्से पर गंभीर वैश्विक दबाव पड़ा। सरकार ने अपने जिन कदमों के जरिये तेल कीमतों में वृद्धि के सबसे बुरे प्रभावों से अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिश की वे भी इस संदर्भ में मददगार रहे। यद्यपि ऐसा बचाव हमेशा नहीं चल सकता। प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए कुछ खर्च नियंत्रण का आह्वान किया है तथा संकेत दिया है कि आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि वर्तमान तिमाही और शायद जुलाई-सितंबर तिमाही भी चौथी तिमाही जैसी ही मजबूती दिखाएगी। एनएसओ के वृद्धि अनुमान जारी होने से कुछ घंटे पहले ही भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते चालू वित्त वर्ष में वृद्धि 6.6 फीसदी तक ही रह सकती है जो पहले के 6.9 फीसदी अनुमान से कम है। मुद्रास्फीति के जोखिम भी मौजूद हैं। खासतौर पर माॅनसून के कमजोर रहने की आशंका के चलते। भारत हमेशा वैश्विक ईंधन कीमतों के ऊंचे होने पर संघर्ष करता रहा है और कमजोर माॅनसून के प्रभाव से भी जूझता रहा है। यदि दोनों चुनौतियां एक साथ असर डालें तो यह गंभीर समस्या होगी। रिजर्व बैंक चिंतित है कि ऊंची ऊर्जा कीमतें और वैश्विक आपूर्ति अवरोध पहले से ही अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे ईंधन कीमतों का असर व्यापक अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा वैसे-वैसे ये प्रभाव और तीव्र होंगे। इन चुनौतियों के बीच यह सौभाग्य है कि भारत साल की शुरुआत अपेक्षाकृत ऊंची वृद्धि के साथ कर रहा है। अब यह तो समय ही बताएगा कि घरेलू मजबूती कितनी टिकाऊ रहती है। लेकिन सरकार को वैश्विक उथल-पुथल के बीच वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ठोस और स्थायी सुधारों पर अमल करना होगा ताकि भारत की आर्थिक ढाल मजबूत हो सके।

WWDC 2026 में ऐपल का बड़ा AI दांव, जेमिनी की ताकत से बदला Siri; iPhone 11 तक पहुंचेगा iOS 27 अपडेट

नई दिल्ली । वैश्विक टेक्नोलॉजी उद्योग की निगाहें इस वर्ष आयोजित डेवलपर सम्मेलन पर टिकी थीं और कंपनी ने अपनी नई घोषणाओं के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उसके उत्पादों और सेवाओं का प्रमुख आधार बनने वाली है। सम्मेलन के दौरान सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अपडेट पेश किए गए, जिनमें सबसे अधिक चर्चा कंपनी के वर्चुअल असिस्टेंट सिरी और नए ऑपरेटिंग सिस्टम iOS 27 को लेकर रही। कंपनी ने अपने एआई असिस्टेंट सिरी को पहले की तुलना में अधिक उन्नत और संवादात्मक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई तकनीकी साझेदारी के माध्यम से सिरी अब उपयोगकर्ताओं की भाषा, संदर्भ और विजुअल इनपुट को बेहतर तरीके से समझ सकेगा। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अधिक स्वाभाविक और सटीक अनुभव प्रदान करना है। नई क्षमताओं के साथ सिरी विभिन्न ऐप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेगा और जटिल अनुरोधों को भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर पाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई के विस्तार के बावजूद उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, एआई आधारित सेवाओं का विकास इस तरह किया गया है कि व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित रहे और डेटा का उपयोग केवल आवश्यक अनुरोधों को पूरा करने तक सीमित हो। यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दुनिया भर में एआई और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो रही है। सम्मेलन में पेश किए गए नए एआई फीचर्स को विभिन्न एप्लिकेशनों में भी एकीकृत किया गया है। मैसेजिंग सेवाओं में अब बुद्धिमान रिप्लाई सुझाव उपलब्ध होंगे, जबकि फोन से संबंधित सुविधाओं में बातचीत के दौरान अन्य ऐप्स से आवश्यक संदर्भ प्राप्त करने की क्षमता जोड़ी गई है। इन सुधारों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लिए मल्टीटास्किंग को अधिक सहज और उत्पादक बनाना है। कार्यक्रम की एक अन्य बड़ी घोषणा iOS 27 रही। कंपनी का दावा है कि यह अब तक का सबसे व्यापक और प्रदर्शन-केंद्रित अपडेट है। नए संस्करण का लाभ पुराने मॉडलों तक पहुंचाने की रणनीति के तहत iPhone 11 और उसके बाद लॉन्च किए गए कई डिवाइसों को भी यह अपडेट मिलेगा। इससे बड़ी संख्या में मौजूदा उपयोगकर्ताओं को बिना नया उपकरण खरीदे नई सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रदर्शन सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नई तस्वीरों के लोड होने की गति बढ़ाने, फाइल शेयरिंग को अधिक तेज बनाने और मल्टीटास्किंग को बेहतर करने के लिए सिस्टम स्तर पर कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अधिक तेज और सुचारु अनुभव प्रदान करना है। फोटो एडिटिंग के क्षेत्र में भी कंपनी ने नए एआई टूल्स पेश किए हैं। नए फीचर्स की मदद से तस्वीरों के फ्रेम, एंगल और अनुपात को अधिक सहजता से बदला जा सकेगा। उपयोगकर्ता एआई की सहायता से तस्वीरों के दृश्य क्षेत्र का विस्तार कर सकेंगे और आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त बैकग्राउंड भी जोड़ सकेंगे। यह कदम कंटेंट क्रिएटर्स और मोबाइल फोटोग्राफी पसंद करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। इसके अलावा इंटरफेस डिजाइन में भी बदलाव किए गए हैं। लिक्विड ग्लास डिजाइन को अधिक अनुकूलन योग्य बनाया गया है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी पसंद के अनुसार विजुअल एलिमेंट्स को नियंत्रित कर सकेंगे। वहीं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स को भी मजबूत किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर पहले से अधिक नियंत्रण मिलेगा। इन घोषणाओं के साथ कंपनी ने यह संकेत दिया है कि उसका अगला चरण एआई, प्राइवेसी और उपयोगकर्ता अनुभव के संतुलित विकास पर केंद्रित रहेगा।

सुरक्षा का साधन या नया खतरा? AI और सर्विलांस सिस्टम की क्षमताओं ने दुनिया को किया चिंतित

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल निगरानी प्रणालियों और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों के तेजी से विस्तार ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन तकनीकों को कभी नागरिक सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और सार्वजनिक निगरानी का प्रभावी माध्यम माना जाता था, वही अब संभावित साइबर जोखिम और सुरक्षा चुनौतियों का कारण भी बनती दिखाई दे रही हैं। इसी कारण दुनिया के कई देशों में संवेदनशील निगरानी प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर समीक्षा शुरू हो गई है। हाल के वर्षों में CCTV नेटवर्क, फेस रिकग्निशन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और AI आधारित निगरानी प्रणालियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन तकनीकों की मदद से लाखों घंटों की वीडियो रिकॉर्डिंग को कम समय में विश्लेषित किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अपराधियों की पहचान, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इनका व्यापक उपयोग कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यही तकनीकें यदि साइबर हमलों या अनधिकृत पहुंच का शिकार हो जाएं तो गंभीर सुरक्षा जोखिम भी पैदा कर सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक निगरानी प्रणालियां केवल कैमरों तक सीमित नहीं हैं। इनमें क्लाउड स्टोरेज, नेटवर्क सर्वर, सेंसर, संचार उपकरण और AI आधारित विश्लेषण प्रणाली भी शामिल होती हैं। यदि किसी सिस्टम में तकनीकी कमजोरी, सॉफ्टवेयर खामी या साइबर सुरक्षा से जुड़ी चूक मौजूद हो, तो संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच संभव हो सकती है। यही कारण है कि कई देश अब अपने महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। रूस सहित कई देशों में हाल के समय में निगरानी प्रणालियों की सुरक्षा समीक्षा की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ संवेदनशील सुरक्षा नेटवर्क की तकनीकी जांच की गई और उनके डिजिटल ढांचे की मजबूती का मूल्यांकन किया गया। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी महत्वपूर्ण निगरानी प्रणाली को इंटरनेट से जोड़ने के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना आवश्यक हो जाता है, ताकि संभावित साइबर घुसपैठ को रोका जा सके। तकनीकी जानकारों के अनुसार, AI की सबसे बड़ी शक्ति विशाल मात्रा में उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करना है। आधुनिक एल्गोरिदम हजारों कैमरों से प्राप्त वीडियो फुटेज का अध्ययन कर पैटर्न पहचान सकते हैं, गतिविधियों का विश्लेषण कर सकते हैं और संभावित घटनाओं का अनुमान भी लगा सकते हैं। यही क्षमता सुरक्षा एजेंसियों के लिए उपयोगी है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग हो तो यह निजता और सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल CCTV कैमरे ही जोखिम का कारण नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट उपकरण, मोबाइल एप्लिकेशन, डिजिटल संचार माध्यम और अन्य नेटवर्क आधारित प्रणालियां भी साइबर हमलों के लक्ष्य बन सकती हैं। इसलिए अब सुरक्षा का अर्थ केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर सुरक्षा भी उसका अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। दुनिया भर की सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां अब डिजिटल अवसंरचना को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए निवेश बढ़ा रही हैं। एन्क्रिप्शन, मल्टी-लेयर सुरक्षा, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, नेटवर्क मॉनिटरिंग और साइबर ऑडिट जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही AI आधारित सुरक्षा प्रणालियों के उपयोग और नियंत्रण को लेकर भी नए मानक विकसित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में CCTV और AI का उपयोग और अधिक व्यापक होगा, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और गोपनीयता से जुड़े मुद्दों पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। आधुनिक तकनीक जहां सुरक्षा को मजबूत करने का प्रभावी साधन है, वहीं उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण बन गया है।

1G और 2G से कई कदम आगे 3G इथेनॉल, खाद्य संकट की चिंता खत्म कर स्वच्छ ऊर्जा को देगा नई दिशा

नई दिल्ली । स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में दुनिया तेजी से नए विकल्पों की तलाश कर रही है और इसी क्रम में 3G इथेनॉल तकनीक को जैव ईंधन क्षेत्र की अगली बड़ी क्रांति माना जा रहा है। भारत समेत कई देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन अब तीसरी पीढ़ी की इथेनॉल तकनीक ने ऊर्जा क्षेत्र के सामने नई संभावनाएं खोल दी हैं। यह तकनीक पारंपरिक इथेनॉल उत्पादन से अलग है क्योंकि इसमें खाद्य फसलों की जगह शैवाल, जलीय पौधों और औद्योगिक कचरे का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में उपयोग होने वाला प्रथम पीढ़ी का इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य खाद्य फसलों से तैयार किया जाता है। दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल में कृषि अवशेषों जैसे पराली, भूसा और अन्य जैविक कचरे का उपयोग होता है। हालांकि इन दोनों तकनीकों के सामने उत्पादन लागत, संसाधनों की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में 3G इथेनॉल को अधिक टिकाऊ और भविष्य उन्मुख समाधान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 3G इथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा आधार शैवाल है। शैवाल तेजी से बढ़ने वाला जैविक स्रोत है, जिसे उपजाऊ कृषि भूमि की आवश्यकता नहीं होती। यह खारे पानी, तालाबों, समुद्री तटीय क्षेत्रों और बंजर जमीनों पर भी विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि भूमि पर दबाव कम पड़ता है और खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित नहीं होता। 3G इथेनॉल निर्माण की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले विशेष प्रकार के शैवालों की नियंत्रित परिस्थितियों में खेती की जाती है। इसके बाद उन्हें पानी से अलग कर सुखाया जाता है और उनका जैविक द्रव्यमान एकत्र किया जाता है। अगली प्रक्रिया में शैवाल की कोशिकाओं को तोड़कर उनमें मौजूद स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट निकाले जाते हैं। इन तत्वों का जैविक फर्मेंटेशन कर अल्कोहल तैयार किया जाता है। अंत में शुद्धिकरण और डिस्टिलेशन की प्रक्रिया के बाद उच्च गुणवत्ता वाला इथेनॉल प्राप्त होता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक केवल वैकल्पिक ईंधन तक सीमित नहीं है। 3G इथेनॉल का उपयोग पेट्रोल के साथ मिश्रण के रूप में किया जा सकता है, जिससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा इसे उन्नत जैव ईंधन में परिवर्तित कर विमानन क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह क्षेत्र वर्तमान में कार्बन उत्सर्जन के बड़े स्रोतों में शामिल है, इसलिए हरित ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिक क्षेत्र में भी 3G इथेनॉल की उपयोगिता व्यापक मानी जा रही है। इससे बायोप्लास्टिक, विशेष रसायन और कई पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। साथ ही बिजली उत्पादन में भी इसका उपयोग संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण होगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह तकनीक महत्वपूर्ण मानी जाती है। शैवाल अपने विकास के दौरान वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि 3G इथेनॉल को कम कार्बन उत्सर्जन वाले ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से विकसित किया जाता है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन की चुनौतियों का एक साथ समाधान देने में सक्षम हो सकती है। आने वाले वर्षों में 3G इथेनॉल स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक बन सकता है।

Vivo X Fold6 की लाइव फोटो लीक, OnePlus ला रहा नए बजट फोन; पढ़ें दिनभर की बड़ी गैजेट्स खबरें

नई दिल्ली । टेक्नोलॉजी जगत में मंगलवार को कई बड़े अपडेट देखने को मिले। Vivo के आगामी फोल्डेबल स्मार्टफोन Vivo X Fold6 की लाइव तस्वीरें लॉन्च से पहले ऑनलाइन लीक हो गईं, जिससे इसके डिजाइन और कैमरा सेटअप की झलक सामने आई। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि डिवाइस को नए OriginOS 6 Fold के साथ पेश किया जाएगा, जिसमें बेहतर मल्टीटास्किंग और AI आधारित फीचर्स शामिल होंगे। वहीं, OnePlus भारतीय बाजार में अपनी N सीरीज का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 20,000 रुपये से कम कीमत वाले कई स्मार्टफोन लॉन्च कर सकती है, जिससे बजट सेगमेंट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी। दूसरी ओर, Infinix ने Note Edge JBL Edition पेश किया है। इस विशेष संस्करण में JBL ऑडियो फीचर्स के साथ वायरलेस स्पीकर भी दिया जा रहा है। इसकी कीमत 24,999 रुपये रखी गई है। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए TEMPT ने ICY इंस्टेंट कूलिंग पोर्टेबल फैन लॉन्च किया है। यह डिवाइस सेमीकंडक्टर कूलिंग टेक्नोलॉजी के जरिए तेज गर्मी में भी तुरंत ठंडक देने का दावा करता है। इन नए उत्पादों और लीक रिपोर्ट्स ने एक बार फिर स्मार्टफोन और गैजेट्स बाजार में ग्राहकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

गर्मी में सेहत और स्वाद का डबल डोज: घर पर बनाएं ठंडी-ठंडी खरबूजे की खीर

नई दिल्ली । देशभर में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। ऐसे मौसम में हर कोई ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश में रहता है जो शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करें। इन्हीं विकल्पों में एक खास और स्वादिष्ट व्यंजन है ‘खरबूजे की खीर’, जो गर्मियों में स्वाद और स्वास्थ्य का अनोखा संगम मानी जाती है। खरबूजा गर्मियों का एक लोकप्रिय मौसमी फल है, जिसे उसके मीठे स्वाद और ठंडक देने वाले गुणों के लिए पसंद किया जाता है। जब इस फल को दूध और चावल के साथ मिलाकर खीर के रूप में तैयार किया जाता है, तो यह एक बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक डेजर्ट बन जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है। आयुर्वेद में खरबूजे को शीतल प्रकृति का फल माना गया है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करता है। अत्यधिक पसीना आने के कारण शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों की भरपाई करने में खरबूजा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि गर्मियों में इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। खरबूजा कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। विटामिन ए आंखों की रोशनी और त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। पोटेशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है और फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खरबूजा कम कैलोरी वाला फल है, इसलिए यह वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है। इसका सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है। हालांकि, मधुमेह से पीड़ित लोगों को इसका सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। अगर बात करें खरबूजे की खीर की, तो इसे घर पर बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है। सबसे पहले दूध को अच्छी तरह उबालकर उसमें धुले हुए चावल डालें और धीमी आंच पर पकाएं। जब चावल पूरी तरह नरम हो जाएं और मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें कंडेंस्ड मिल्क या स्वादानुसार चीनी मिलाएं। इसके बाद खीर को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर इसमें पके हुए खरबूजे का गूदा मिलाएं। ध्यान रखें कि बहुत गर्म खीर में खरबूजा न डालें, इससे स्वाद प्रभावित हो सकता है। तैयार खीर को कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रख दें। परोसते समय इसे केसर, बादाम, पिस्ता या अन्य सूखे मेवों से सजाया जा सकता है। ठंडी-ठंडी खरबूजे की खीर गर्मी के मौसम में एक बेहतरीन डेजर्ट साबित होती है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है। गर्मियों में यदि आप कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक और पोषण भी दे, तो खरबूजे की खीर आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकती है। यह पारंपरिक मिठाई का एक नया और हेल्दी रूप है, जो मौसम के अनुरूप शरीर को राहत पहुंचाने का काम करती है।

'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का अत्यधिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज छठे बड़े मंगल के पावन अवसर पर तड़के से ही देश के तमाम छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से भक्तों को जीवन की हर कसौटी पर विजय प्राप्त होती है। यदि कोई श्रद्धालु समय के अभाव में संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर पाता है, तो उसके कुछ अत्यंत चमत्कारी दोहों और चौपाइयों के मानसिक जाप से भी अद्वितीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं के लिए हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा ‘बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल-बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।’ एक अचूक महामंत्र की तरह कार्य करता है। इस दोहे का सीधा अर्थ है कि साधक स्वयं को बुद्धिहीन मानकर पवनपुत्र का स्मरण कर रहा है, ताकि उसे बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिल सके। बड़े मंगल के दिन स्नान के उपरांत तुलसी की माला से इस दोहे का कम से कम 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और किसी भी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता के मार्ग खुलते हैं। इसके अतिरिक्त, जो लोग अज्ञात भय, मानसिक अवसाद या बुरे सपनों से परेशान रहते हैं, उनके लिए ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावे’ की चौपाई को संजीवनी माना गया है। इस चौपाई के नियमित पाठ से किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी बाधा साधक के समीप नहीं फटकती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में आज के दिन भक्तों को इस चौपाई के सामूहिक कीर्तन के जरिए भयमुक्त होने का संकल्प लेते देखा जा रहा है, जिससे आंतरिक शांति और गहरी नींद की प्राप्ति होती है। शारीरिक व्याधियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों के लिए ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’ का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होता है। इस पंक्ति के निरंतर जाप से असाध्य रोगों के कष्टों में कमी आती है और चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने से रोगी तेजी से स्वस्थ होने लगता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में पनपने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में भी यह चौपाई अत्यंत प्रभावी साबित हुई है, जिसके चलते आज भंडारे और पूजा पंडालों में इसका विशेष गायन किया जा रहा है। सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी’ का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह चौपाई मानव मस्तिष्क से दुर्बुद्धि और द्वेष की भावनाओं का समूल नाश कर सद्बुद्धि का संचार करती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के अनैतिक विचारों से बचने तथा ईमानदारी से तरक्की पाने के लिए इस दोहे को आत्मसात करना अनिवार्य माना गया है। कुल मिलाकर, यह छठा बड़ा मंगल भक्तों के लिए दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का एक बड़ा माध्यम बनकर आया है।

बुध के नक्षत्र परिवर्तन से इन राशियों पर बरसेगा धन और सफलता का आशीर्वाद

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, संचार और व्यापार का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026 को बुध देव राहु के आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। कब होगा बुध का नक्षत्र परिवर्तन?पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026, गुरुवार को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर बुध पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि बुध इस नक्षत्र में लंबे समय तक रहेंगे और 8 अगस्त 2026 तक यहीं विराजमान रहेंगे। इस दौरान बुध की वक्री और मार्गी चाल का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल का सातवां नक्षत्र माना जाता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। गुरु के नक्षत्र में बुध का प्रवेश ज्ञान, विवेक, शिक्षा और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वारवृषभ राशिबुध का यह गोचर वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनेंगे और धन आगमन के अवसर बढ़ेंगे। परिवार के साथ धार्मिक या मनोरंजक यात्रा का योग बन सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की भी संभावना है। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों को करियर में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और पदोन्नति या वेतन वृद्धि के योग बन सकते हैं। व्यापार में लाभ की संभावना रहेगी तथा लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। व्यक्तिगत जीवन में भी सुधार देखने को मिलेगा। वाणी में मधुरता बढ़ेगी, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा मजबूत होगी। संतान पक्ष से कोई सुखद समाचार मिलने की संभावना है। सिंह राशिसिंह राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति का संकेत दे रहा है। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं और निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी तथा पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और कार्यस्थल पर लंबे समय से चल रहे विवादों या तनाव से राहत मिलने की संभावना है। कन्या राशिकन्या राशि के जातकों के लिए बुध का यह गोचर नई शुरुआत और उपलब्धियों का संकेत लेकर आ रहा है। नया व्यापार शुरू करने या किसी नई योजना पर काम करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। वाहन या संपत्ति खरीदने के अवसर भी बन सकते हैं। रचनात्मक क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। बैंकिंग, शिक्षा, लेखन और बौद्धिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। ज्ञान और समृद्धि का विशेष योगज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति के नक्षत्र में बुध का प्रवेश बुद्धि, शिक्षा, संवाद कौशल और आर्थिक मामलों में सकारात्मक प्रभाव ला सकता है। 11 जून से 8 अगस्त तक की यह अवधि कई लोगों के लिए नए अवसरों, आर्थिक मजबूती और व्यक्तिगत विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

100 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाले देश के टॉप-7 फिल्म निर्देशकों की सूची आई सामने, जादुई आंकड़े से बदली फिल्म इंडस्ट्री की दशा

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और बढ़ती पहुंच के बीच बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित हो रहे हैं। बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक, आज के दौर में फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना 100 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होना बन चुका है। इस जादुई और प्रतिष्ठित आंकड़े को सबसे ज्यादा बार छूने का महा-रिकॉर्ड एक्शन फिल्मों के बेताज बादशाह कहे जाने वाले निर्देशक रोहित शेट्टी के नाम दर्ज हो चुका है। रोहित शेट्टी ने अपनी बैक-टू-बैक सुपरहिट कमर्शियल फिल्मों के दम पर एसएस राजामौली और राजकुमार हिरानी जैसे धुरंधर निर्देशकों को भी संख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया है। फिल्म निर्देशन की दुनिया में रोहित शेट्टी की शैली को सबसे सुरक्षित और बॉक्स ऑफिस फ्रेंडली माना जाता है। अपनी खास एक्शन और कॉमेडी फिल्मों के लिए मशहूर रोहित शेट्टी के करियर में अब तक 10 से ज्यादा ऐसी फिल्में आ चुकी हैं, जिन्होंने घरेलू बाजार में 100 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई की है। उनके इस अनूठे रिकॉर्ड के आसपास फिलहाल इंडस्ट्री का कोई दूसरा निर्देशक नजर नहीं आता है, जो यह दर्शाता है कि दर्शकों की नब्ज पर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। इस सूची में दूसरे पायदान पर गंभीर विषयों को बेहद हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश करने वाले निर्देशक राजकुमार हिरानी का नाम आता है। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘3 इडियट्स’, ‘पीके’ और ‘संजू’ जैसी कालजयी फिल्में देने वाले राजकुमार हिरानी ने अब तक 5 फिल्में ऐसी दी हैं, जिन्होंने 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया है। हिरानी की फिल्मों की खासियत यह है कि वे न केवल कमाई के रिकॉर्ड तोड़ती हैं, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश भी देती हैं। कमाई के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तीसरे नंबर पर एक्शन और स्पाई थ्रिलर फिल्मों के विशेषज्ञ सिद्धार्थ आनंद का कब्जा है। ‘वॉर’, ‘पठान’ और ‘किंग’ जैसी मेगा-बजट और भव्य स्तर की एक्शन फिल्में बनाने वाले सिद्धार्थ आनंद के खाते में भी 4 से 5 ऐसी फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा का कलेक्शन दर्ज कराया है। उनके बाद चौथे नंबर पर निर्देशक आदित्य धर का नाम आता है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में देशप्रेम और युद्ध पर आधारित दमदार फिल्में बनाकर इतिहास रचा है और उनके खाते में भी 5 से अधिक 100 करोड़ क्लब की फिल्में दर्ज हैं। इस सूची में साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक सुकुमार भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिनकी ‘आर्या’ और वैश्विक स्तर पर तहलका मचाने वाली ‘पुष्पा’ जैसी फिल्मों ने 100 करोड़ रुपये का कलेक्शन आसानी से पार किया है। वहीं हिंदी सिनेमा के हॉरर-कॉमेडी जॉनर को नया जीवन देने वाले निर्देशक अमर कौशिक भी ‘भेड़िया’ और ‘स्त्री 2’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के साथ इस एलीट क्लब का हिस्सा बने हुए हैं। सूची के अंतिम छोर पर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम चमकाने वाले निर्देशक एसएस राजामौली का नाम है, जिन्होंने ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी कल्ट फिल्मों के जरिए न केवल 100 करोड़ बल्कि हजारों करोड़ की कमाई का नया इतिहास रचा है।