HIGHLIGHTS:
- सरकारी जमीन कब्जे मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई
- कोर्ट ने बिल्डर्स को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए
- 54 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे का दावा
- याचिका में 2700 करोड़ के घोटाले का आरोप
- CBI जांच और FIR दर्ज करने की मांग उठी
GWALIOR COURT ACTION: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियां विकसित किए जाने के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका पर हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि जिन बिल्डर्स और कॉलोनाइजरों पर अतिक्रमण के आरोप लगाए गए हैं, उन्हें भी मामले में पक्षकार बनाया जाए। इस मामले ने शहर में जमीन घोटाले और भू-माफिया की गतिविधियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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कई बड़ी टाउनशिप के नाम याचिका में शामिल
याचिका में कॉस्मो आनंदा, कॉस्मो वैली, विंडसर हिल्स, अचलनाथ, रोजवुड, ब्लू लोटस, जैतल विहार और एलिक्सिर एमके सिटी जैसी टाउनशिप का उल्लेख किया गया है। शासन की ओर से कोर्ट में प्रारंभिक रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें सिरोल, रमौआ और आसपास के क्षेत्रों में जांच किए जाने की जानकारी दी गई। एडवोकेट चंद्रशेखर साहू द्वारा दायर इस जनहित याचिका में सरकारी जमीनों पर कब्जे का बड़ा मुद्दा उठाया गया है।
54 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि भू-माफियाओं और कॉलोनाइजरों ने करीब 54 हेक्टेयर सरकारी और कृषि भूमि पर अवैध कब्जा किया है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में सिटी सेंटर तहसील, सिरोल, डोंगरपुर पुतलीघर, अलापुर, रमौआ और नैनगिर इलाके शामिल बताए गए हैं। याचिका के अनुसार इस कथित घोटाले की कीमत 2700 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है। साथ ही आठ से ज्यादा टाउनशिप पर सरकारी जमीन पर निर्माण के आरोप लगाए गए हैं।
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याचिका में CBI जांच समेत कई बड़ी मांगें
याचिकाकर्ता ने मामले की सीबीआई जांच कराने, जमीन का सीमांकन और घेराबंदी कराने, अवैध निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा फर्जी रजिस्ट्रियों को निरस्त कर FIR दर्ज करने और सरकारी जमीन को वापस लेने की भी मांग कोर्ट से की गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई में कई बिल्डर्स की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।