रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले वर्ष की तुलना में अपने परमाणु भंडार में वृद्धि की है। वर्ष 2025 में भारत के पास लगभग 180 परमाणु हथियार होने का अनुमान लगाया गया था, जो अब बढ़कर 190 तक पहुंच गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति और विकसित हो रही रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप है।
SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में भारत की न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता का विशेष उल्लेख किया है। न्यूक्लियर ट्रायड का अर्थ उन तीन माध्यमों से है जिनके जरिए परमाणु हथियारों का उपयोग किया जा सकता है। इसमें वायु आधारित प्लेटफॉर्म, जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें और परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत इस त्रिस्तरीय क्षमता को लगातार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत नई मिसाइल प्रणालियों के लिए अतिरिक्त परमाणु वारहेड विकसित कर रहा है। साथ ही देश की रक्षा अनुसंधान गतिविधियां लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणालियों और उन्नत मिसाइल तकनीकों पर अधिक केंद्रित दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है।
SIPRI ने यह भी संकेत दिया है कि भारत बहु-वारहेड क्षमता वाली मिसाइल तकनीकों की दिशा में प्रगति कर रहा है। इस तकनीक के तहत एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसी क्षमताओं को आधुनिक सामरिक प्रतिरोधक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
दूसरी ओर रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने भी वर्ष 2025 के दौरान अपनी परमाणु डिलीवरी प्रणालियों के विकास पर काम जारी रखा। हालांकि उसके परमाणु हथियारों की अनुमानित संख्या में कोई विशेष बदलाव दर्ज नहीं किया गया। पाकिस्तान की भूमि और वायु आधारित परमाणु क्षमताएं पहले से स्थापित हैं, जबकि समुद्र आधारित क्षमता अभी विकास और परीक्षण की प्रक्रिया में बताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर सकता है। इसके पीछे नई मिसाइल प्रणालियों का विकास और विखंडनीय सामग्री के बढ़ते भंडार को प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि इस संबंध में सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि आधिकारिक सार्वजनिक आंकड़े सीमित उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन केवल हथियारों की संख्या का विषय नहीं है, बल्कि तकनीकी क्षमता, प्रतिरोधक रणनीति और कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे से भी जुड़ा हुआ है। SIPRI की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी सामरिक क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के वर्षों में क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण अधिक जटिल हुआ है। ऐसे में दोनों देशों द्वारा प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को समझने के लिए परमाणु रणनीति, तकनीकी विकास और क्षेत्रीय कूटनीति तीनों कारकों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक होगा।