मियांपुर का नाम बदलकर रविंद्र नगर किए जाने की घोषणा से प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक बड़े प्रशासनिक और विकास कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर जिले में चल रही विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान सबसे प्रमुख पहल थारू जनजाति के सशक्तिकरण से जुड़ी रही, जिसमें हजारों परिवारों को भूमि का मालिकाना अधिकार प्रदान किया गया। इस कदम से उन परिवारों को कानूनी सुरक्षा और स्थायी आवास का अधिकार मिला है, जो लंबे समय से भूमि संबंधी अनिश्चितता का सामना कर रहे थे। इस प्रक्रिया के तहत हजारों हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक तक उसका अधिकार पहुंचाना और समाज के हर वर्ग को समान अवसर देना है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की प्रक्रिया में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है और सभी योजनाएं पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही हैं। इसी कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए घोषणा की गई कि मियांपुर गांव का नाम बदलकर अब रविंद्र नगर रखा जाएगा। यह निर्णय क्षेत्रीय पहचान और सामाजिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर एक नई पहचान स्थापित करना बताया गया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य में विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू की जा रही हैं और हर जिले को समान रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस मौके पर लाभार्थियों को भूमि अधिकार पत्र सौंपे जाने के बाद ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा गया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार का फोकस अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर है। उन्होंने बताया कि अब योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में सुधार हुआ है। इस घोषणा के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि नाम परिवर्तन और भूमि अधिकार जैसे फैसले सामाजिक और स्थानीय पहचान पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
मोहन कैबिनेट का ऐतिहासिक निर्णय: 25 हजार विस्थापित आदिवासियों के पट्टों की होगी फ्री रजिस्ट्री; सिंचाई और संबल जैसी योजनाओं को 2031 तक विस्तार

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के आदिवासी समाज और किसानों के लिए बड़ी सौगातों का पिटारा खोला गया है। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि सरकार ने सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित हजारों परिवारों के हक में एक बड़ा मानवीय फैसला लिया है। विस्थापितों को मुफ्त मालिकाना हक सरदार सरोवर परियोजना के कारण विस्थापित हुए 25,602 आदिवासी परिवारों को पूर्व में आवासीय पट्टे तो दिए गए थे, लेकिन उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। अब सरकार ने इन सभी पट्टों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले से हजारों परिवारों को उनके घर का कानूनी स्वामित्व बिना किसी आर्थिक बोझ के मिल सकेगा। सिंचाई और बुनियादी ढांचे को मजबूती कैबिनेट ने प्रदेश की कृषि क्षमता बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को हरी झंडी दी है:धनवाही सिंचाई परियोजना और बरही सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।इन परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, जिससे स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि होगी। योजनाओं का विस्तार 2026 से 2031 तक सरकार ने कई फ्लैगशिप योजनाओं को अगले 5 सालों के लिए निरंतर जारी रखने का फैसला किया है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहने वाली प्रमुख योजनाएं हैं संबल योजना गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच। महिला एवं शिशु कल्याण: महिला पीड़ित सहायता योजना और किशोर कल्याण निधि। आर्थिक विकास: उद्यम योजना और पशु विकास योजना। वित्तीय भार: इन योजनाओं की निरंतरता से सरकार पर 15,009 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। प्रशासनिक सुधार और अन्य चर्चाएं राज्य समाज कल्याण बोर्ड: बोर्ड को भंग कर इसके कर्मचारियों का संविलियन महिला एवं बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति दी गई है। भावांतर योजना: कैबिनेट में बताया गया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भावांतर योजना को पूर्णतः लागू कर 2 माह के भीतर किसानों को भुगतान सुनिश्चित किया। धार्मिक और पर्यटन विकास: 29 जनवरी को मंदसौर में ‘पशुपतिनाथ लोक’ के लोकार्पण और भोपाल में हुए ‘पुष्प महोत्सव’ की सफलता पर भी चर्चा हुई।