सड़क हादसे के बाद गुस्सा फूटा: अस्पताल में तोड़फोड़, भीड़ ने किया विरोध

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के चरक भवन जिला अस्पताल में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब इलाज और एंबुलेंस में देरी के आरोप को लेकर परिजनों और भीड़ ने जमकर हंगामा कर दिया। घटना रात करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है, जब सड़क हादसे में घायल दो युवकों को अस्पताल लाया गया था। जानकारी के अनुसार, महाकाल थाना क्षेत्र में एक ऑटो और टू-व्हीलर के बीच जोरदार टक्कर हो गई थी, जिसमें दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को निजी वाहन की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। हालांकि, दोनों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिससे नाराजगी बढ़ गई। देखते ही देखते करीब 60 से 80 लोगों की भीड़ अस्पताल परिसर में जमा हो गई और हंगामा शुरू हो गया। आरोप है कि गुस्साई भीड़ ने अस्पताल के इमरजेंसी गेट नंबर-2 के कांच तोड़ दिए और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों के साथ अभद्रता की भी बात सामने आई है। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हालात काबू में आए। अस्पताल प्रबंधन और सीएमएचओ की ओर से इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह घटना एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
Charak Bhawan hospital: उज्जैन के चरक भवन अस्पताल में ब्लैकआउट; एक घंटे अंधेरे में इलाज, मरीजों में हड़कंप

Charak Bhawan hospital: नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित संभागीय चरक भवन अस्पताल में सोमवार शाम उस समय अव्यवस्था फैल गई जब अचानक करीब एक घंटे तक बिजली सप्लाई ठप हो गई। शाम लगभग 6:45 बजे हुई इस घटना के बाद पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली गुल होने की स्थिति करीब 7:45 बजे तक बनी रही, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। जनरेटर बैकअप फेल, टॉर्च की रोशनी में इलाज अस्पताल में बिजली जाने के बावजूद जनरेटर बैकअप समय पर चालू नहीं हो सका। इसके चलते कई वार्डों में डॉक्टरों और स्टाफ को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ही इलाज करना पड़ा। वार्डों, गलियारों और इमरजेंसी यूनिट में अंधेरा होने के कारण मरीजों की स्थिति और भी कठिन हो गई। गर्मी और उमस के बीच मरीज बेहाल नजर आए। इमरजेंसी वार्ड में सबसे ज्यादा अस सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिली, जहां बिजली लंबे समय तक बहाल नहीं हो पाई। गंभीर मरीजों को भी अंधेरे में इलाज मिलने से परिजन काफी परेशान दिखाई दिए। परिजनों ने बताया कि इस दौरान अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित रही। परिजनों ने उठाए सवाल, व्यवस्था पर नाराजग मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में भी बुनियादी बिजली व्यवस्था का ठप होना बेहद चिंताजनक है। लोगों ने यह भी कहा कि जनरेटर जैसी बैकअप सुविधा होते हुए भी उसका समय पर शुरू न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। पहले भी उठ चुके हैं सवाल चरक भवन अस्पताल में इससे पहले भी ऑक्सीजन प्लांट और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बार-बार सुधार के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। चरक भवन अस्पताल में हुआ यह ब्लैकआउट न केवल तकनीकी खामी को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।