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MP: इंदौर में शादी में आए यूपी के कारोबारी की कार से नगदी और हथियार चोरी… आरोपी गिरफ्तार

इंदौर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में शादी समारोह में शामिल होने आए एक कारोबारी (Businessman) की कार से नकदी और हथियार चोरी (Cash and weapon theft) होने का मामला अब सुलझ गया है. भंवरकुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी गया सामान भी बरामद कर लिया है। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली निवासी कारोबारी केशव सोनी इंदौर में एक शादी में शामिल होने आए थे. इस दौरान उनकी फॉर्च्यूनर कार का कांच तोड़कर एक अज्ञात बदमाश ने कार में रखा बैग चुरा लिया था. बैग में करीब एक लाख रुपये नकद, लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस रखे हुए थे. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम गठित की. एडिशनल डीसीपी जोन-4 आनंद कलादगी के नेतृत्व में पुलिस ने आसपास लगे 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. जांच के दौरान एक संदिग्ध पल्सर बाइक नजर आई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। पुलिस ने भगवती नगर, मूसाखेड़ी निवासी सलमान खान को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में उसके पास से चोरी गया बैग, नकदी, लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस बरामद कर लिए गए हैं. वारदात में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले से कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है. फिलहाल उससे पूछताछ जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह और किन घटनाओं में शामिल रहा है.

MP-UP समेत इन राज्यों में गर्मी दिखा रही रौद्र रूप…. लोगों का घर से बाहर निकलना हुआ मुश्किल

नई दिल्ली। अप्रैल (April) के तीसरे हफ्ते में गर्मी ने अपना रौद्र रूप (Heat Fierce form) दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत (North India) के राज्यों में दोपहर के समय हालात ऐसे हैं कि लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में तेज तेज धूप पड़ रही है। सुबह 10 बजे के बाद ही मौसम में तेज गर्माहट आनी शुरू हो जाती है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक शुक्रवार को उत्तर भारत के तमाम जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री के ऊपर रहने की संभावना है। आन वाले कुछ दिनों में लू की आशंका भी बनी हुई है। मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए अनुमान के मुताबिक उत्तर भारत जहां गर्मी से परेशान रहेगा, तो वही पहाड़ी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत अभी भी बारिश और ठंडक से घिरा हुआ रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तेज गरज और बिजली के साथ बर्फबारी और बारिश होने की संभावना है। इस दौरान हवाएं करीब 45 से 55 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती हैं। इसके अलावा हिमाचल में भी बादल छाए रहने और हल्की बूंदा-बांदी की संभावना है। पाकिस्तान की सीमा से सटे पंजाब और राजस्थान के क्षेत्रों में गर्मी अपने चरम पर होगी। लेकिन जम्मू-कश्मीर और नीचे पंजाब की तरफ आने वाले सीमाई इलाकों में हल्की गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को हल्की बारिश हो सकती है। मध्य भारत में बढ़ेगी गर्मीदूसरी तरफ उत्तर भारत की तरह मध्य भारत भी धूप से जूझता रहेगा। हालांकि, 19 और 20 अप्रैल को पश्चिमी मध्य प्रदेश में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा महाराष्ट्र के विदर्भ और छत्तीशगढ़ में तापमान क्रमिक रूप से बढ़ता रहेगा। 20 अप्रैल के बाद इन क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। पूर्वी भारत में बारिश जारीउत्तर भारत जहां गर्मी से जूझ रहा है, तो वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत बारिश की संभावना से घिरा हुआ है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम में शुक्रवार यानी 17 अप्रैल को हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा बिहार के पूर्वी इलाके, ओडिशाग और बंगाल के मैदानी इलाकों में 17 से लेकर 22 अप्रैल तक धीमी और मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा सिक्किम में भी 17-18 अप्रैल को तेज बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत में बढ़ेगी उमस वाली गर्मीमौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक शुक्रवार 17 अप्रैल को भी दक्षिण भारत का मौसम पिछले दिनों के जैसा ही रहेगा। तटीय इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। बाकी जगहों पर तेज धूप और ह्यूमिडिटी की वजह से उमस वाली गर्मी पड़ेगी। तेज धूप की वजह से इन राज्यों का अधिकतम तापमान 39 से 41 डिग्री के आसपास रहेगा।

पेट्रोल महंगाई में मध्यप्रदेश चौथे नंबर पर: भोपाल में ₹106.52 प्रति लीटर, पड़ोसी राज्यों में 11 रुपए सस्ता

  भोपाल। मध्यप्रदेश के मध्य प्रदेश में पेट्रोल भरवाना अब देश के अधिकांश राज्यों की तुलना में काफी महंगा हो गया है। राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा सोमवार को पेश किए गए ताजा आंकड़ों 11 मार्च 2026 तक के अनुसार, मध्यप्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य है जहां पेट्रोल की कीमतें सबसे अधिक हैं। राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमत ₹106.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। एमपी के पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल की कीमतें काफी कम हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल ₹94.69 और गुजरात की राजधानी गांधीनगर में ₹94.70 प्रति लीटर बिक रहा है। यानी मध्यप्रदेश के मुकाबले इन राज्यों में पेट्रोल लगभग 11 रुपए सस्ता है। अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना करें तो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ₹99.44, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ₹103.54 और राजस्थान में ₹104.72 प्रति लीटर पेट्रोल मिल रहा है। इस अंतर का मुख्य कारण पेट्रोल और डीजल की अंतिम बिक्री कीमतों में शामिल केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए वैट हैं। इसके अलावा, राज्यों में माल ढुलाई दरों और अन्य स्थानीय शुल्कों में भिन्नता भी कीमतों में बड़ा अंतर पैदा करती है। पेट्रोलियम राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि आम जनता की मांग के बावजूद फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी GST में शामिल करने की योजना टल गई है। जीएसटी परिषद ने इस पर विचार किया, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। डीजल की बात करें तो मध्यप्रदेश महंगे डीजल वाले राज्यों की सूची में 7वें स्थान पर है। यह स्थिति आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का कारण बन रही है और वाहन चालकों की जेब पर असर डाल रही है।

यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी गोहत्या नहीं हो रही है और किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि गो माता को खरोंच तक पहुंचा सके। उन्होंने यह बात सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। मौर्य ने कहा कि सरकार गो संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में पहले भी व्यापक आंदोलन किए गए हैं। यह बयान Keshav Prasad Maurya ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गोहत्या होने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जो स्वामी Avimukteshwaranand द्वारा लगाए गए थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी Avimukteshwaranand को कहीं भी आने-जाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और सरकार उनके सम्मान की पूरी सुरक्षा करती है। केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिव भक्तों, राम भक्तों और गो भक्तों पर अत्याचार हुए, वे आज गो रक्षा की बात कर रहे हैं। राज्य सरकार ने लगातार गो संरक्षण को प्राथमिकता दी है। गौशालाओं और गो रक्षा समितियों के माध्यम से गो माता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, और कानूनी प्रावधानों के तहत गोहत्या और हिंसा के मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है। इस दिशा में सरकार ने पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी प्रणाली लागू की है। Keshav Prasad Maurya का यह बयान प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए गो माता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार के राजनीतिक और धार्मिक बयान समाज में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने इसे संतुलित और शांतिपूर्ण तरीके से पेश किया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि गो माता की सुरक्षा और कानून की पालना दोनों सुनिश्चित हों।

UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इस बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं. सपा और कांग्रेस जहां भारतीय राष्ट्रीय समावेशी विकास गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं तो वहीं बीजेपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के साथ मैदान में उतरेगी. उधर, बसपा अभी भी अकेले ही मैदान में उतरने का मूड बना रही है. इन सबके बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी यूपी चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. अगर पार्टी चुनाव में उतरती है तो यह उसका चौथा चुनाव होगा. वर्ष 2017, 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाया था. यह मोर्चा सपा चीफ के पीडीए फॉर्मूले के मुकाबले के तौर पर पीडीएम बनाया गया था. जिसमें पिछड़ा, दलित मुसलमान की बात की गई थी. इस मोर्चे ने 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इसमें AIMIM का एक भी प्रत्याशी नहीं था. अब 2027 के चुनाव के लिए दावा है कि एआईएमआईएम, बसपा के साथ अलायंस कर सकती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में गठबंधन करने के लिए आतुर AIMIM का इस संदर्भ में पुराना इतिहास क्या रहा है? इसके साथ ही यह भी बात हो रही है कि जो एआईएमआईएम, बसपा के हाथी की सवारी कर राज्य में एंट्री की कोशिश में उसकी क्या स्थिति है? बता दें AIMIM ने वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा का चुनाव 38 सीटों पर लड़ा था. 37 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी.इस चुनाव में AIMIM को 2,04,142 वोट मिले थे. AIMIM ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वो मुख्यतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटें थीं. उधर, 2022 में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ .49% वोट मिले थे. 2024 के चुनाव कितना कारगर रहा ओवैसी का अलायंस? 2024 चुनाव में पीडीएम मोर्चा बनाने वाली एआईएमआईएम ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा लेकिन उसके साथ का फायदा अन्य दल को भी नहीं मिला. इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने प्रत्याशी उतारे और उन्हें कुल मतदान में से सिर्फ .4 फीसदी वोट मिले और नतीजा सिफर रहा. ऐसे में यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम के साथ का लाभ अपना दल कमेरावादी को नहीं हुआ. बसपा के साथ कितना फिट होंगे ओवैसी?वहीं बसपा की बात करें तो लोकसभा चुनाव में उसे कुल वोट का 9.46 फीसदी मत मिले थे. हालांकि लोकसभा में उसका खाता नहीं खुला था. विधानसभा में भी बसपा का सिर्फ 1 ही विधायक है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एआईएमआईएम और बसपा साथ आते भी हैं तब भी किसी बड़े जादू की उम्मीद फिलहाल नहीं है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी में एआईएमआईएम की आगामी रणनीति क्या होगी और वह धरातल पर कितनी मजबूती के साथ उतरेगी.

हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत

  नई दिल्ली । एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक बार फिर विवादित राग छेड़ा है। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी नीतियों और सामाजिक विमर्श के उलट, उन्होंने आबादी बढ़ाने को देश की मजबूती से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अपने बयानों के चलते एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए नारा दिया कि “हम दो, हमारे दो नहीं, बल्कि हमारे दो दर्जन होने चाहिए। शौकत अली ने अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण के वैश्विक और राष्ट्रीय तर्कों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली मजबूती उसकी बड़ी आबादी में निहित होती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए कहा, “जब अल्लाह बच्चों की नेमत दे रहा है, तो उसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। बच्चे ऊपर वाले की देन हैं और उन्हें रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि आबादी बढ़ने से देश कमजोर नहीं बल्कि और अधिक ताकतवर होकर उभरेगा। कुंवारे नेताओं पर कसा तंज जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शौकत अली ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद शादी नहीं करते या जिनका अपना परिवार नहीं है, वही दूसरों को जनसंख्या नियंत्रण का ज्ञान बांटते फिर रहे हैं। उनका यह इशारा सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर माना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि यहाँ मदरसों का विस्तार शिक्षा के लिए किया गया है, लेकिन कुछ लोग इन्हें जानबूझकर ‘आतंकवाद का अड्डा’ बताकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं। सपा और बी टीम के आरोपों पर पलटवार जनसभा के दौरान शौकत अली केवल जनसंख्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर भड़ास निकाली। सपा के एक विधायक द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा खुद अपनी जमीन खो रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मजलिस पर झूठे आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का सच्चा रहनुमा वही है जो उनके हक की बात डंके की चोट पर करे, न कि वह जो केवल वोट बैंक की राजनीति करे। बयान पर छिड़ा सियासी घमासान शौकत अली के इस ‘दो दर्जन’ वाले बयान के बाद भाजपा और अन्य दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं और विकास के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..

नई दिल्ली। कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। हालांकि मेडिकल साइंस में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी लाखों लोगों की जान ले लेती है। भारत में कैंसर के अधिकांश मामलों का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर जरूरी हेल्थ चेकअप कराए जाएं, तो कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है। GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाकजब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं। एक्सपर्ट द्वारा बताए गए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप ब्लड टेस्टसामान्य ब्लड जांच से शरीर में असामान्य बदलाव, संक्रमण या ट्यूमर मार्कर के संकेत मिल सकते हैं। यह शुरुआती चेतावनी का काम करता है। मैमोग्राफीमहिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है। पैप स्मीयर टेस्टयह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक होता है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैनपेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है। कोलोनोस्कोपीयह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए। ओरल स्क्रीनिंगतंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।