Iran Khamenei death: ईरान में खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर हजारों लोग: दो साल की बच्ची के जनाजे में जुटा शोक

Iran Khamenei death: नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान में जारी संघर्ष आज 11वें दिन प्रवेश कर गया है। जंग के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया। ईरान में खामेनेई के निधन की खबर मिलते ही महिलाओं और पुरुषों सहित हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और मोमबत्तियां लिए हुए थे और उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि खामेनेई का आदर्श हमेशा जीवित रहेगा। दो साल की बच्ची के जनाजे में भारी शोक ईरान में शोक की भावना इतनी गहरी थी कि दो साल की बच्ची के जनाजे में भी हजारों लोग शामिल हुए। लोगों की भीड़ ने सड़कें भर दीं और सोशल मीडिया पर इस दौरान की PHOTOS और VIDEOS वायरल हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं मिडिल ईस्ट और पड़ोसी देशों पर युद्ध का असर बीते 10 दिनों में इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट और आसपास के 10 से अधिक देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित की है। कुछ क्षेत्रों में बमबारी और सैन्य कार्रवाई का डर कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और भारी भीड़ नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है और आर्थिक संकट और आपूर्ति बाधित हो रही है। ईरान में शोक और अंतरराष्ट्रीय चिंता खामेनेई के समर्थन में प्रदर्शनकारी लोगों ने कहा कि उनका नेतृत्व ईरान और मुस्लिम समुदाय के लिए मार्गदर्शक था।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों ने संघर्ष को रोकने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है।ईरान में जारी प्रदर्शन और शोक के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो विश्व समुदाय की चिंता बढ़ा रहे हैं।
ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’IRGC ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा माना जाने वाला ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’Strait of Hormuz अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से दी गई यह चेतावनी सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाती है जो वर्तमान संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े हैं। IRGC ने दो टूक कहा है कि यदि इन प्रतिबंधित देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निश्चित रूप से हमला करके नष्ट कर दिया जाएगा। हालाँकि, इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत इस सख्त नाकेबंदी के दायरे से बाहर है। बुधवार को जहाँ केवल चीनी जहाजों को अनुमति देने की बात कही गई थी, वहीं अब नए ऐलान के बाद यह साफ हो गया है कि भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित रहेगा। तेहरान का यह रुख भारत के साथ उसके पुराने और विश्वसनीय संबंधों को दर्शाता है। भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक टल गया है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को जायज ठहराया है। उनका कहना है कि युद्धकाल में इस्लामिक गणराज्य ईरान को अपनी सीमाओं से लगे जलमार्गों पर नियंत्रण करने का पूरा अधिकार है। यह कठोर फैसला अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले शनिवार को शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में लिया गया है। गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इसकी रणनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फारस की खाड़ी के तमाम बंदरगाहों, जिनमें दुबई का जेबेल अली भी शामिल है, के लिए यह एकमात्र निकास मार्ग है। वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों पर साफ देखा जा सकता है। कुवैत और दुबई के तटों के पास सैकड़ों टैंकर और कमर्शियल जहाज लंगर डाले खड़े हैं, जो इस नाकेबंदी के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतिहास में यह पहली बार है जब हॉर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह पूरी तरह बंद किया गया है। यहाँ तक कि 1980 के दशक के भीषण ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप नहीं हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी से भले ही एशिया-यूरोप के मुख्य मार्गों पर तुरंत असर न पड़े, लेकिन खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत के लिए हॉर्मुज का यह ‘खुला दरवाजा’ एक बड़ी कूटनीतिक जीत और आर्थिक राहत का संकेत है।
ईरान के गेराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप, अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच बढ़ी मुश्किलें

तेहरान। अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बीच मंगलवार दोपहर ईरान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। दक्षिणी ईरान के गेराश इलाके में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 मापी गई। सैन्य हमलों से पहले ही तनाव झेल रहे देश में भूकंप के झटकों ने आम लोगों और प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक गेराश के पास आया यह 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की तत्काल सूचना नहीं है, हालांकि स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पूरी स्थिति स्पष्ट होने में कुछ समय लग सकता है। हमलों के बीच कांपा ईरानइजरायल और अमेरिका ने शनिवार से ईरान पर अपने हमले तेज कर रखे हैं। इन एयरस्ट्राइक में देश के कई हिस्सों में भारी तबाही की खबरें हैं। मंगलवार को तेहरान से लगभग 800 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित केरमान एयर बेस पर हुए हमले में कम से कम 13 ईरानी सैनिकों के मारे जाने की सूचना है। बताया गया है कि एक सैन्य हेलीकॉप्टर को निशाना बनाकर हमला किया गया। अमेरिका और इजरायल का कहना है कि उनका उद्देश्य ईरान के मिसाइल भंडार और सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ नेता और सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। लंबे अभियान की तैयारीइजरायली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा है कि उनकी सेना ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले अभियान की तैयारी कर रही है। हालांकि फिलहाल जमीनी सेना उतारने की कोई योजना नहीं है और हवाई हमलों के जरिए ही ईरान की सैन्य क्षमता और सत्ता ढांचे को कमजोर किया जाएगा। ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है। मिसाइल हमलों के जरिए इजरायल और अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने इजरायल के अलावा सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागी हैं। सैन्य तनाव के इस दौर में आए भूकंप ने हालात को और जटिल बना दिया है, जिससे प्रभावित इलाकों में दहशत और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।