भोपाल को बड़ी राहत! कोलार पाइपलाइन सुधार के बाद 75 क्षेत्रों में जलापूर्ति शुरू

नई दिल्ली। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि बांसखेड़ी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त कोलार लाइन की मरम्मत गुरुवार रात पूरी कर ली गई थी। इसके बाद रात में ही पंप चालू कर दिए गए और शुक्रवार सुबह 6 बजे से जलापूर्ति शुरू कर दी गई। निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग के अनुसार चार इमली, शिवाजी नगर, तुलसी नगर, अरेरा कॉलोनी, ई-1, ई-5, ई-6, पीजीबीटी, नारियलखेड़ा, टीला जमालपुरा, जवाहर चौक और इब्राहिमपुरा सहित कई इलाकों में पानी पहुंचाया जा चुका है। शेष क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से सप्लाई की जा रही है। टंकियां नहीं भरीं, सीधे घरों तक पहुंचाया पानीनगर निगम ने इस बार लोगों को तत्काल राहत देने के लिए सामान्य प्रक्रिया में बदलाव किया। आमतौर पर फिल्टर प्लांट से पहले जलाशयों और टंकियों को भरा जाता है, लेकिन इस बार सीधे फिल्टर प्लांट से सप्लाई शुरू कर दी गई। भोपाल में कोलार, नर्मदा, केरवा और बड़ा तालाब परियोजनाओं की कुल 173 पानी की टंकियां हैं। इनमें से कोलार परियोजना से जुड़ी 68 टंकियां सप्लाई पूरी होने के बाद भरी जाएंगी ताकि शनिवार से नियमित जलप्रदाय व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की जा सके। तीन दिन तक परेशान रही 40 फीसदी आबादीकोलार परियोजना की 1650 मिमी व्यास वाली ग्रेविटी पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण पिछले तीन दिनों से शहर की लगभग 40 प्रतिशत आबादी प्रभावित थी। 75 से अधिक इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर निगम ने टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की कोशिश की, लेकिन बढ़ती मांग के सामने यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हुई। कई रहवासियों ने आरोप लगाया कि निजी टैंकर संचालकों ने 300 रुपए के टैंकर के लिए 1000 से 1200 रुपए तक वसूले। रातभर मौके पर रहीं कमिश्नरपाइपलाइन की मरम्मत के दौरान नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन स्वयं रातभर मौके पर मौजूद रहीं। उन्होंने कार्य की लगातार निगरानी की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि रात में ही पंप चालू कर सुबह तक जलापूर्ति बहाल की जाए। प्रशासन की इसी सक्रियता के चलते शुक्रवार सुबह से पानी की सप्लाई दोबारा शुरू हो सकी। नर्मदा लाइन में भी लीकेज से नई चुनौतीइधर कोलार लाइन की समस्या दूर होने के बीच शहर के कुछ हिस्सों में नर्मदा पाइपलाइन में भी लीकेज सामने आया है। अयोध्या बायपास पर सड़क निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण आसाराम तिराहे से रत्नागिरि तिराहे तक के क्षेत्रों में शुक्रवार को जलापूर्ति प्रभावित रहने की संभावना है। हालांकि कोलार लाइन की मरम्मत पूरी होने से शहर के अधिकांश प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचनी शुरू हो गई है और शनिवार से जलापूर्ति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
देश के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है, और अधिकांश नदी घाटियाँ गंभीर जल संकट की स्थिति के करीब पहुँचती जा रही हैं।

भीषण गर्मी और लू की वजह से पूरे भारत में जल आपूर्ति की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और रात में भी तापमान लगातार ऊंचा रहने से पानी तथा बिजली की मांग बढ़ रही है। सुपर अल नीनो के कारण बारिश में व्यवधान की आशंका से समस्या और गंभीर हो सकती है। केंद्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जिन 166 जलाशयों पर नजर रखी जा रही है, उनमें 30 अप्रैल को मौजूद 71.08 अरब घन मीटर पानी 14 मई तक घटकर 63.23 अरब घन मीटर ही रह गया है। यानी सिर्फ दो हफ्तों में लगभग 8 अरब घन मीटर की गिरावट आई है। तेरह प्रमुख जलाशयों में जल स्तर अपने सामान्य भंडारण स्तर के आधे से भी कम रह गया है। यह समस्या तब आ रही है, जब भारत में पानी का बहुत अधिक इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें एथनॉल मिश्रण, डेटा सेंटर, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का ढांचा और विनिर्माण शामिल हैं। इनमें से कई निवेश पानी के संकट वाले क्षेत्रों में हो रहे हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक बार-बार सूखे और भूजल स्तर में गिरावट की समस्या से जूझते रहे हैं मगर गन्ने की खेती और एथनॉल उत्पादन बढ़ता जा रहा है, जबकि गन्ने की खेती में पानी की सबसे ज्यादा खपत होती है। इसी तरह अक्सर शहरी जल संकट से जूझने वाले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक डेटा सेंटर के बड़े अड्डे बनते जा रहे हैं। हाइपरस्केल डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। मुद्दा यह नहीं है कि इन क्षेत्रों का विस्तार होना चाहिए या नहीं, मुद्दा यह है कि औद्योगिक और ऊर्जा नीतियां जल विज्ञान संबंधी हकीकत के मुताबिक हैं या नहीं। औद्योगिक स्थलों के चयन, शहरी नियोजन और कृषि प्रोत्साहन में जल की उपलब्धता प्रमुख मानदंड होना चाहिए। इस व्यापक संकट के परिणाम भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट दिख रहे हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक लिफ्ट नहर के बंद होने से कई गांव इकलौते हैंडपंप पर निर्भर हो गए हैं। दिल्ली में यमुना में पानी कम होने और प्रदूषण बढ़ने से जल शोधन क्षमता कम हो गई है, जबकि गर्मियों के महीनों में पानी की मांग बढ़ जाती है, इसलिए शहर को पड़ोसी राज्यों से मदद मांगनी पड़ रही है। वर्ष 2024 के बेंगलूरु जल संकट ने यह दिखाया कि भूजल भंडार कम होने, झीलों पर अतिक्रमण होने और वर्षा जल संचयन नियमों का ठीक से पालन न होने पर शहरी जल व्यवस्था कितनी तेजी से चरमरा सकती है। यह संकट अब केवल वर्षा की कमी तक सीमित नहीं है। तापमान बढ़ने से ज्यादा पानी भाप बनकर उड़ रहा है और भूजल स्तर गिरता जा रहा है। भारत लगभग 251 अरब घन मीटर सालाना भूजल दोहन पहले से करता आ रहा है, जो विश्व में कुल दोहन का लगभग एक चौथाई है। 1950 में यहां हर व्यक्ति के लिए लगभग 5,000 घन मीटर पानी उपलब्ध था, जो 2021 में घटकर 1,486 घन मीटर रह गई है, जिसमें और भी कमी आने का अनुमान है। ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद के शोध से पता चलता है कि भारत के 15 प्रमुख नदी बेसिनों में से 11 गंभीर जल संकट के कगार पर हैं। जल की कमी और संकट के व्यापक आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं। खाद्य उत्पादन पर इसका असर पड़ा तो महंगाई तेजी से बढ़ सकती है, जिसके व्यापक नीतिगत प्रभाव हो सकते हैं। दुर्भाग्यवश स्थानीय निकाय पेयजल संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए ठीक से तैयार नहीं हैं। तेजी से शहरीकरण होने के बाद भी अधिकतर शहरों में अभी व्यापक जल सुरक्षा योजनाएं नहीं हैं। नगरपालिकाएं भूजल दोहन, आपात स्थितियों के दौरान टैंकरों द्वारा आपूर्ति और संकट में अस्थायी प्रतिक्रियाओं पर ज्यादा निर्भर हैं। संपादकीय
आसमान से बरस रही आग, जमीन पर बढ़ी मुश्किलें: गर्मी के साथ पानी और बिजली संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

नई दिल्ली।देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी अब केवल मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के दैनिक जीवन पर गहरा असर डालने लगी है। राजधानी सहित कई राज्यों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है और इसके साथ ही पानी तथा बिजली की बढ़ती समस्या ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आसमान से बरसती आग और तपती सड़कों के बीच लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती दिखाई दे रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई क्षेत्रों में लोग राहत पाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। गर्म हवाओं और तेज धूप ने शहरों से लेकर कस्बों तक लोगों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। भीषण गर्मी के कारण पानी की खपत अचानक बढ़ी है, जिससे कई इलाकों में जल आपूर्ति पर दबाव साफ दिखाई देने लगा है। कुछ स्थानों पर लोगों को जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण लंबी कतारें और इंतजार की स्थिति बन रही है। सुबह से ही लोग पानी की व्यवस्था में जुट जाते हैं ताकि दिनभर की जरूरतें पूरी की जा सकें। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई परिवारों के लिए यह स्थिति रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बन चुकी है। दूसरी तरफ बिजली की मांग में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के लगातार उपयोग से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बन रही है। दिन के समय तेज गर्मी और रात में बिजली बाधित होने से लोगों की दिनचर्या और नींद दोनों प्रभावित हो रही हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन बनती जा रही है। लगातार गर्मी और बिजली की समस्या लोगों की सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है। गर्मी का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले लोग तेज धूप के कारण लंबे समय तक बाहर नहीं रह पा रहे हैं। मजदूर वर्ग और रोजाना मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह मौसम सबसे कठिन दौर साबित हो रहा है। सड़कों पर दोपहर के समय सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम आवाजाही दिखाई दे रही है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता तापमान और बदलता मौसम भविष्य में और बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकता है। ऐसे हालात में स्वास्थ्य संबंधी सावधानी, पर्याप्त पानी का सेवन और धूप से बचाव बेहद जरूरी हो गया है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में लोग गर्मी, पानी और बिजली की तिहरी चुनौती से जूझ रहे हैं और सभी की नजरें मौसम में राहत देने वाले बदलाव पर टिकी हुई हैं।
Sheopur Adivasi Protest: बिजली-पानी की मांग को लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण

HIGHLIGHTS: बिजली-पानी की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण आदिवासी ग्रामीणों ने गेट पर बैठकर किया प्रदर्शन पीएम आवास मिलने के बाद भी बस्ती में नहीं बिजली महिलाएं 2 किलोमीटर दूर से ला रहीं पानी प्रशासन ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन Sheopur Adivasi Protest: मध्यप्रदेश। श्योपुर जिले की कराहल तहसील के मजरा हनुमानखेड़ा के आदिवासी ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन किया। बता दें कि प्रदर्शन की सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर रुपेश उपाध्याय मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। पंजाब से अमेरिका पहुंचे परिवार के बेटे ने रचा इतिहास, 176 छात्रों का पूरा एजुकेशन लोन चुकाकर बने मिसाल पीएम आवास मिले, लेकिन बिजली नहीं ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान तो बन गए हैं, लेकिन अब तक बिजली के खंभे और डीपी नहीं लगाई गई। बिजली न होने के कारण परिवारों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में रोशनी नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत.. 2 किलोमीटर दूर मिल रहा पानी बस्ती में पेयजल संकट भी लगातार बना हुआ है। महिलाओं को भीषण गर्मी में दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की व्यवस्था नहीं होने से मजदूरी और घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। महिलाओं और बच्चों ने प्रशासन को बताया कि पहले फसल कटने के बाद बिजली लाइन विस्तार का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव प्रशासन ने दिया समाधान का आश्वासन धरने के दौरान ग्रामीणों ने जल्द बिजली और पानी की व्यवस्था शुरू करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल किशोर, खन्ना और बचनू आदिवासी सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। अपर कलेक्टर ने ग्रामीणों को समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया।
सिंधु जल संधि को लेकर वायरल दावों पर सच्चाई: क्या वाकई पाकिस्तान में पानी का संकट बढ़ा?

नई दिल्ली। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि Indus Waters Treaty खत्म या स्थगित हो गई है, जिसके कारण पाकिस्तान में गंभीर जल संकट और कृषि संकट पैदा हो गया है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक और ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर यह दावा पूरी तरह सही नहीं पाया गया है। सिंधु जल संधि की वास्तविक स्थितिसिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत: भारत को पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) मिलीं पाकिस्तान को पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) मिलीं यह संधि आज भी कानूनी रूप से लागू है और इसे अब तक किसी आधिकारिक निर्णय द्वारा समाप्त नहीं किया गया है। पाकिस्तान में जल संकट की सच्चाईपाकिस्तान में जल संकट की समस्या वास्तविक है, लेकिन इसके पीछे कई आंतरिक और पर्यावरणीय कारण है पुरानी और कमजोर सिंचाई व्यवस्था जल संरक्षण की कमी और पानी की बर्बादी बढ़ती जनसंख्या का दबाव जलवायु परिवर्तन और बारिश में अनियमितता भूजल का अत्यधिक उपयोग विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या लंबे समय से बनी हुई संरचनात्मक (systemic) समस्या है, न कि केवल किसी एक संधि का परिणाम। कृषि पर प्रभावपाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है, जो मुख्य रूप से सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। लेकिन, चावल, गेहूं और गन्ने की खेती पहले से जल संकट से प्रभावित हैसिंचाई प्रणाली में सुधार की आवश्यकता हैकुछ क्षेत्रों में किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है हालांकि यह कहना कि संधि खत्म होने से अचानक कृषि ठप हो गई है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। भारत की भूमिका पर दावेकुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भारत ने किसी घटना के बाद संधि को स्थगित किया है। लेकिन अब तक किसी भी आधिकारिक सरकारी या अंतरराष्ट्रीय घोषणा में यह पुष्टि नहीं हुई है कि संधि स्थगित या समाप्त की गई हो। सिंधु जल संधि अभी भी एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय जल समझौता है। पाकिस्तान में जल संकट वास्तविक है, लेकिन इसका मुख्य कारण आंतरिक जल प्रबंधन और पर्यावरणीय चुनौतियाँ हैं, न कि संधि का समाप्त होना।
ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता

नई दिल्ली। ग्वालियर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 10 के घासमंडी मिर्जापुर मस्जिद इलाके में स्थित पानी की टंकी में मरा हुआ सांप मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह वही टंकी है जिससे करीब 19 हजार लोगों को पेयजल की सप्लाई होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं की गई थी, जिसके कारण अंदर गंदगी जमा हो गई और अंततः मरा हुआ सांप पानी में पाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि लोग कई दिनों से इसी पानी का उपयोग कर रहे थे, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवादइस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक युवक लकड़ी की मदद से टंकी के अंदर से मरा हुआ सांप बाहर निकालता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना शनिवार की है, लेकिन इसका वीडियो रविवार को सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ लापरवाही के आरोप लगाए। नगर निगम पर गंभीर सवालरहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार टंकी की सफाई और पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि निगम की लापरवाही के कारण वे दूषित पानी पीने को मजबूर थे, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।हालांकि इस मामले पर अभी तक नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों को भी नहीं जानकारीवार्ड क्रमांक 10 के पार्षद शकील मंसूरी ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उन पर हमला हुआ था और वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए वे क्षेत्र की स्थिति पर पूरी तरह अपडेट नहीं हैं। पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी लापरवाहियांयह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में पानी की टंकी को लेकर सवाल उठे हों। दो महीने पहले भी मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी टंकी में पांच मरी हुई छिपकलियां मिलने का मामला सामने आया था, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए थे। लोगों की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाईघटना के बाद क्षेत्रीय लोगों ने टंकी की तुरंत सफाई, पानी की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। गुरुवार को कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मटका फोड़ कर अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन मोती तबेला चौराहा और छत्रीबाग क्षेत्र में किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने खाली मटके फोड़कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह ने किया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम आम जनता से पूरे महीने का पानी का बिल वसूल रहा है, जबकि सप्लाई केवल 15 दिन ही सही तरीके से हो रही है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुंची है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज लीकेज की वजह से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय होटलों और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है, जबकि कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। इससे शहर में असमान वितरण व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़े कई कार्य और फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कई वार्डों में जल संकट और गहरा गया है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे स्थिति और खराब होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने शहर में जल संकट को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पानी की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
PARSHAD WATER TANK PROTEST: पानी नहीं तो जान देंगे, ग्वालियर में पार्षद का अर्द्धनग्न प्रदर्शन; पानी सप्लाई न होने पर दी चेतावनी

HIGHLIGHTS: • ग्वालियर में पानी संकट पर हंगामा• पार्षद ने अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन• टंकी में कूदने की दी चेतावनी• नाराज लोगों ने कर्मचारियों को बनाया बंधक• तकनीकी खराबी दूर होने के बाद सप्लाई बहाल PARSHAD WATER TANK PROTEST: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के नूरगंज क्षेत्र में पानी की किल्लत को लेकर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। बता दें कि वार्ड 14 के पार्षद और एमआईसी सदस्य विनोद उर्फ माठू यादव ने 21 अप्रैल को देर रात पानी की टंकी पर चढ़कर अर्धनग्न प्रदर्शन किया। जहां उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक इलाके में पानी की सप्लाई बहाल नहीं होगी, वे विरोध जारी रखेंगे। SAGAR CRIME NEWS : घर में घुसकर हमला करने वाले 6 आरोपी गिरफ्तार, रंजिश में धारदार हथियार से किया था वार टंकी पर चढ़कर दी जान देने की धमकी पार्षद ने प्रदर्शन के दौरान टंकी में कूदने तक की चेतावनी दे डाली। उनका कहना था कि जनता लंबे समय से पानी के लिए परेशान है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। साथ ही विरोध जताने के लिए उन्होंने अपने कपड़े उतारकर अनोखे तरीके से प्रदर्शन भी किया। Travel Tips: अप्रैल में घूमने के लिए बेहतरीन जगहें, जहां मिलेगा सुकून और यादगार अनुभव लोगों का गुस्सा, कर्मचारियों को बनाया बंधक घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां पहले से मौजूद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज भीड़ ने निगम कर्मचारियों को घेर लिया और कुछ समय के लिए बंधक बना लिया। पुरे मामले में लोगों ने आरोप लगाया कि कई शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार का ऐलान: किसानों को मिलेगा 4 गुना मुआवजा, हेल्थ सुविधाओं में बड़ा बदलाव अधिकारियों को दी कड़ी चेतावनी पार्षद माठू यादव ने अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए और कड़ी भाषा में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे और उग्र आंदोलन करेंगे। यहां तक कि उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ आक्रामक बयान भी दिया है। म्राट पृथ्वीराज के लुक को लेकर उठे सवाल, अभिनेता ने दर्शकों से मांगी माफी… तुरंत कार्रवाई के निर्देश स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि टंकी की मोटर के स्टार्टर में खराबी थी, जिसके कारण पानी की सप्लाई बाधित हो रही थी। तकनीकी समस्या दूर करते ही देर रात टंकी भरवाई गई, जिससे क्षेत्र के लोगों को राहत मिली।
फागुन में सिमटती गंगा से बढ़ी चिंता, बिहार में भीषण गर्मी और जल संकट के संकेत

नई दिल्ली ।बिहार में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फागुन के महीने में ही गंगा का जलस्तर घटने लगा है जिससे आने वाले महीनों में भीषण गर्मी और संभावित जल संकट की आशंका गहरा गई है। आमतौर पर वैशाख और जेठ में गंगा की धारा सिमटती है लेकिन इस वर्ष फरवरी में ही शहरी इलाकों से नदी काफी दूर चली गई है। यह बदलाव सामान्य मौसमी चक्र से अलग माना जा रहा है और विशेषज्ञ इसे गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं। भागलपुर के बरारी स्थित इंटकवेल की स्थिति हालात की गवाही दे रही है। वर्ष 2025 की फरवरी में जिस स्थान से गंगा की धारा से पानी मिल रहा था इस बार वहां से करीब 100 फीट आगे तक अतिरिक्त पाइप लगाकर पानी लेना पड़ रहा है। यानी नदी की धारा पीछे हट चुकी है। इंटकवेल प्रबंधन ने आगे और जलस्तर गिरने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त पाइप मंगाने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि शहर की पेयजल आपूर्ति बाधित न हो। गर्मी के प्रारंभिक संकेत केवल नदी तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को सामान्य से अधिक प्यास लगना और भूख कम होना भी तापमान में संभावित वृद्धि का संकेत माना जा रहा है। यदि मार्च और अप्रैल में वर्षा सामान्य से कम रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभावित पानी संकट को लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पीएचईडी विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभागीय अभियंताओं से सभी क्षेत्रों के ग्राउंड वाटर लेवल की रिपोर्ट मांगी गई है। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार ने जूनियर इंजीनियरों को साप्ताहिक अवलोकन के निर्देश दिए हैं ताकि भूजल स्तर में गिरावट की नियमित निगरानी की जा सके और जरूरत पड़ने पर सरकार से समय रहते मदद ली जा सके। इधर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड सीजीडब्ल्यूबी की प्री मानसून बुलेटिन ने भी चिंता बढ़ा दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जनवरी फरवरी में की गई ग्राउंड सुपरविजन के दौरान भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे शहरों और गांवों में भूजल स्तर गिरने की पुष्टि हुई है। सीजीडब्ल्यूबी ने सभी प्रखंडों का जलस्तर रिकॉर्ड किया है और विस्तृत रिपोर्ट मई जून में प्रकाशित की जाएगी। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि भूजल भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। गंगा से सटे जिलों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। बक्सर में भूजल स्तर 56138.3 से घटकर 30318.55 हेक्टेयर मीटर हो गया है। पटना में यह 98219.10 से घटकर 37595.63 लखीसराय में 37503.18 से 26462.36 और बेगूसराय में 50675.69 से घटकर 15692.38 हेक्टेयर मीटर रह गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वर्षा जल संचयन भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहरा सकता है। फिलहाल प्रशासन सतर्क है लेकिन फागुन में ही सिमटती गंगा यह संकेत दे रही है कि इस बार की गर्मी सामान्य नहीं रहने वाली।