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लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवा विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण : नरेन्द्र सिंह तोमर

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है। विधानसभा अध्यक्ष तोमर सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं। तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है। तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा विधायक सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। जनता और शासन के बीच सेतु बनें विधायक : वासुदेव देवनानीसमारोह में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य दायित्व जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना है। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब जनता, विधायिका और शासन की प्रक्रियाओं के बीच पारदर्शिता और सहभागिता बढ़े। विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए। देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच है इसलिए आवश्यक है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित हो और वे संसद एवं विधानसभा की परंपराओं और प्रक्रियाओं की गहन समझ रखें। उन्होंने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने युवाओं की भूमिका पर भी विशेष बल दिया और कहा कि देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। भारत का वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने युवा जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे निरंतर अध्ययन, अनुभव और संवाद के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और परंपराओं को और मजबूत करें। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना जरूरी : सिंघारमप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनने के साथ ही हमारी स्वयं की कई अपेक्षाएं होती हैं। विधानसभा क्षेत्रवासी भी विधायक को विकास, जनसुविधा और जनकल्याण के कार्यों के लिए बहुत आशा से देखते हैं। विधायक का पद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मुखर करने का प्रभावी माध्यम है। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधानसभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया। श्री सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है। भोपाल स्थित विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए। सम्मेलन के प्रथम दिन राजस्थान और छत्तीसगढ़ से आये युवा विधायकों ने अपने विचार साझा किये।

राजधानी में युवा विधायकों का मंथन: 2047 के विकसित भारत का रोडमैप, अनुशासन-लोकतंत्र और जनसेवा पर जोर

भोपाल । राजधानी भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन में सोमवार को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कुल 45 युवा जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह दो दिवसीय सम्मेलन न केवल अनुभव साझा करने का मंच बना, बल्कि लोकतंत्र, विकास और राजनीतिक मूल्यों पर गंभीर मंथन का अवसर भी साबित हुआ। सम्मेलन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए राजनीति में अनुशासन, संवाद, पारदर्शिता और जनसेवा की अहमियत पर जोर दिया। युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता केवल पद पाने से नहीं, बल्कि जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहने और उनके विश्वास को बनाए रखने से मिलती है। उन्होंने विनम्रता को जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा गुण बताते हुए कहा कि अपने क्षेत्र की अच्छाइयों के साथ उसकी कमियों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है, क्योंकि देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर देते हुए छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की असली शुरुआत कॉलेज जीवन से होती है, जहां युवाओं में सिस्टम को समझने और उससे सवाल करने की ऊर्जा होती है। उनके अनुसार, यदि छात्र राजनीति को प्रोत्साहन मिलेगा तो देश में लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि जनता के साथ दिल से जुड़ाव बनाना ज्यादा जरूरी है। आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिकामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपनी सोशल मीडिया टीम को जिम्मेदार और सकारात्मक बनाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि आलोचनाओं से घबराने के बजाय सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि अंततः जनता सच्चाई को पहचानती है। अन्‍य विधायकों का संबोधनसम्मेलन में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने संसदीय परंपराओं और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन वह तार्किक और रचनात्मक होना चाहिए। उन्होंने युवा विधायकों को सलाह दी कि वे सदन में अधिक समय बिताएं, अनुभवी नेताओं के विचार सुनें और अध्ययन के आधार पर अपनी पहचान बनाएं। विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। राजस्थान के विधायक गुरवीर सिंह ने खेलों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि हर राज्य को कम से कम एक खेल को प्राथमिकता देनी चाहिए, जैसे ओडिशा ने हॉकी को अपनाया है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में कई पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जिससे युवाओं को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। सतना के विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता का विश्वास आज भी राजनीतिक व्यवस्था में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि चुनावों में बढ़ते खर्च और अनैतिक तरीकों से लोकतंत्र की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, 2047 तक देश को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक व्यवस्था में सुधार जरूरी है। नेपानगर की विधायक मंजू दादू ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, और उनके साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। इसी तरह, चाचौड़ा की विधायक प्रियंका मीणा ने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच एक सेतु का काम करता है, इसलिए उसे दोनों के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित करना चाहिए। भोपाल उत्तर के विधायक आतिफ अकील ने प्रशासनिक स्तर पर आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सहयोग नहीं देते, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ की विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने नक्सल समस्या को लेकर कहा कि अभी इसे पूरी तरह समाप्त घोषित करना जल्दबाजी होगी। सम्मेलन का समापन पारंपरिक लोक नृत्य और समूह फोटो के साथ हुआ। दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कुल पांच सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में युवा विधायकों की भूमिका पर चर्चा हो रही है। 31 मार्च को दूसरे दिन ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा।