इंदौर की बहू बनेंगी किक्रेटर Smriti Mandhana, टीम इंडिया का 19 अक्टूबर को इंग्लैंड से मुकाबला

Smriti Mandhana: इंदौर। फिल्म निर्देशक, संगीतकार, लेखक, अभिनेता और गायक पलाश मुछाल (Palash Muchhal) ने शुक्रवार को इंदौर में घोषणा की कि वे जल्द ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana)के साथ विवाह सूत्र में बंधने जा रहे हैं। पलाश ने मुस्कुराते हुए कहा, “स्मृति जल्द ही इंदौर की बहू बनेगी। इंदौर मेरे अंदर बसता है।” उन्होंने बताया कि उनकी बरसों से तमन्ना थी कि वे पूरी फिल्म इंदौर में शूट करें, ताकि शहर की खूबसूरत गलियां और स्थान बड़े पर्दे पर नजर आएं। पलाश ने बताया कि महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) इस समय इंदौर में चल रहे वीमेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही हैं। 19 अक्टूबर को भारत-इंग्लैंड का मैच यहीं खेला जाएगा। पलाश ने कहा कि वे स्टेडियम जाकर भारतीय टीम और स्मृति का मनोबल बढ़ाएंगे। ‘राजू बैंड वाला’ फिल्म में दिखेगा इंदौर पलाश मुछाल (Palash Muchhal) इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘राजू बैंड वाला’ का निर्देशन कर रहे हैं। यह फिल्म बैंड बजाने वालों के जीवन, संघर्ष और भावनाओं पर आधारित है। इसमें ‘पंचायत’ फेम चंदन रॉय मुख्य भूमिका में हैं, जबकि अविका गौर नायिका हैं। फिल्म में कई सितारे कैमियो करेंगे और संगीत जगत के कलाकार बैंड उद्योग को ट्रिब्यूट देंगे। पलाश ने कहा कि वे हमेशा साफ-सुथरी, विषय प्रधान और संदेश देने वाली फिल्में बनाना चाहते हैं। इंदौर में फिल्म प्रोडक्शन हाउस खोलने की योजना पलाश ने कहा, “इंदौर में तकनीकी साधनों की कमी जरूर है, लेकिन लोकेशन्स की कोई कमी नहीं। यहां के लोग बहुत सहयोगी हैं, इसलिए मैं यहां एक प्रोडक्शन हाउस शुरू करने की योजना बना रहा हूं।” ‘राजू बैंड वाला’ का पहला शूटिंग शेड्यूल पूरा हो चुका है और दिसंबर में दूसरा शेड्यूल इंदौर में होगा। फिल्म अगले साल अप्रैल में एक लीडिंग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी। ‘राजू बैंड वाला’ का किरदार सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्म के नायक चंदन रॉय ने कहा कि यह उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण रोल है। उन्होंने बैंड वालों के जीवन को समझने के लिए ट्रंपेट बजाने की ट्रेनिंग भी ली। उन्होंने बताया कि पलाश के निर्देशन की खासियत यह है कि वे कलाकारों को पहले ‘खाली कैनवास’ बनने की सलाह देते हैं, फिर उनमें रंग भरते हैं। READ MORE: दहेज में भैंस नहीं मिलने पर ससुराल ने नवविवाहिता को किया परेशान , जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान
MP News: दहेज में भैंस नहीं मिलने पर ससुराल ने नवविवाहिता को किया परेशान , जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

MP News: ग्वालियर। शनिवार को ग्वालियर में एक नवविवाहिता ने लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहने के बाद तेजाब पी लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामला दहेज को लेकर हुआ। दहेज में माँगा गया था भैस जानकारी के अनुसार, पीड़िता विमलेश बघेल की शादी दिनेश बघेल से हुई थी। विवाह के बाद उसके पति और ससुराल वालों ने दहेज में सामान्य नकदी, सोना या गहनों की बजाय भैंस की मांग की। जब उसके भाई ने यह भैंस नहीं दी, तो ससुराल वालों द्वारा लगातार उत्पीड़न किया गया। उत्पीड़न में शामिल थे पति और सास-ससुर रिपोर्टों के अनुसार उत्पीड़न में विमलेश के पति, सास-ससुर, देवर और ननद द्वारा गाली-गलौज किया गया था। उसके भाई महेंद्र बघेल ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन दुर्व्यवहार जारी रहा। झगड़े के बाद महिला ने ली जान हाल ही में हुए झगड़े के दौरान, विमलेश को कथित तौर पर पीटा गया। लगातार प्रताड़ना से तंग आकर उसने घर पर ही तेजाब पी लिया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद महेंद्र बघेल ने पति दिनेश बघेल, सास-ससुर इमरत और विद्या बघेल, देवर हरिसिंह बघेल और ननद भावना बघेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सीएसपी किरण अहिरवार ने पुष्टि की कि ससुराल वालों ने दहेज की मांग को लेकर विमलेश को प्रताड़ित किया। मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के कारण उसने आत्महत्या कर ली। सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और उनकी जल्द गिरफ़्तारी की उम्मीद है। READ MORE: पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर, पूरे देश में पहुँचती हैं यहाँ बनी झाड़ू
MP Jhadu Gali: पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर, पूरे देश में पहुँचती हैं यहाँ बनी झाड़ू

MP Jhadu Gali: देपालपुर। देश के कोने-कोने में सफाई का काम करने वाली झाड़ू कहां से आती है। यह शायद बहुत कम लोगों को पता होगा। मध्यप्रदेश के देपालपुर का एक इलाका, जिसे लोग “झाड़ू वाली गली” भी कहते हैं। इस पूरे देश में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां झाड़ू केवल सफाई का साधन नहीं बल्कि धनतेरस और दीपावली पर पूजन का हिस्सा भी बनती हैं। पूरे साल चलता है झाड़ू बनाने का काम देपालपुर की झाड़ू बनाने वाली गली में करीब 50 परिवार पूरे साल सिर्फ झाड़ू बनाने में लगे रहते हैं। यहां महिला, पुरुष और बच्चे सभी इस काम में निपुण हैं। खजूर के पेड़ों की शाखाओं से डाली निकालकर उन्हें साफ किया जाता है। फिर अलग-अलग प्रकार की झाड़ू बनाई जाती हैं। धनतेरस और दीपावली पर झाड़ू का महत्व धनतेरस और दीपावली के समय पूरे देश में झाड़ू की सबसे ज्यादा बिक्री होती है। इसे केवल सफाई का साधन ही नहीं बल्कि धन और समृद्धि का प्रतीक मानकर पूजा भी जाता है। यही कारण है कि इस समय देपालपुर से झाड़ू की मांग बढ़ जाती है। पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर झाड़ू बनाने वाले परिवार बताते हैं कि यह काम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है। समय और तकनीक बदलते गए, लेकिन देपालपुर में आज भी झाड़ू हाथों से बनाई जाती हैं, जिससे इनका अपना एक खास दर्जा है। इसके अलावा, ये परिवार झाड़ू को दूर-दूर तक सप्लाई करते हैं। READ MORE: ग्वालियर में दीपावली पर पटाखों के लिए सख्त नियम, इतने बजे तक ही ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति
Diwali 2025: ग्वालियर में दीपावली पर पटाखों के लिए सख्त नियम, इतने बजे तक ही ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति

Diwali 2025: ग्वालियर। बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए ग्वालियर जिला प्रशासन ने दीपावली पर्व पर पटाखों के उपयोग को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार पटाखों के निर्माण, विक्रय और उपयोग पर विशेष आदेश दिए हैं। आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश कलेक्टर के अनुसार, पुलिस अधीक्षक, आयुक्त नगर निगम, जिला पंचायत के सीईओ, जिले के सभी एसडीएम, जनपद पंचायतों के सीईओ, नगर पालिका अधिकारी, स्थायी और फुटकर पटाखा विक्रेता संघ सहित सभी संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय और हरित अधिकरण के आदेशों का पालन कराना होगा। ग्रीन पटाखों का समय और प्रतिबंधित क्षेत्र दीपावली के दिन रात 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखों का उपयोग किया जा सकेगा। संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम, हेल्थ केयर सेंटर, स्कूल-कॉलेज और धार्मिक स्थल से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर ही पटाखे जलाए जा सकते हैं। NEERI पोर्टल पर पंजीकृत निर्माताओं की जानकारी ग्रीन पटाखों के संबंध में Petroleum & Explosive Safety Organisation (PESO) और National Environmental Engineering Research Institute (NEERI) द्वारा निर्माताओं का स्वैच्छिक वर्गीकरण किया जाता है। पटाखों की पैकिंग पर “लोगो” प्रिंट होता है। इसे स्कैन करने पर पंजीकृत निर्माता का विवरण NEERI की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। READ MORE: दिवाली के बाद फिर खुश होंगी MP की लाड़ली बहनें, भाई दूज पर मिलेगा ये तोहफा…
Ladli Behna Yojana: दिवाली के बाद फिर खुश होंगी MP की लाड़ली बहनें, भाई दूज पर मिलेगा ये तोहफा…

Ladli Behna Yojana : भोपाल। मध्यप्रदेश की महिलाओं के लिए दिवाली के बाद खुशखबरी आने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की एक और किस्त ट्रांसफर करने का ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि अक्टूबर में महिलाओं के खातों में दो बार पैसे पहुंचेंगे । दिवाली के बाद मिलेगा गिफ्ट हाल ही में महिलाओं के खातों में 29वीं किस्त के रूप में 1250 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अब पुष्टि की है कि भाई दूज के मौके पर 250 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस तरह कुल राशि 1500 रुपये प्रति माह कर दी गई है। सीएम मोहन यादव ने निभाया वादा 12 अक्टूबर को श्योपुर से सीएम मोहन यादव ने 12.6 करोड़ महिलाओं के खातों में 1541 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। उन्होंने कहा कि भाई दूज से ही हर लाभार्थी को 1500 रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि यह राशि आगे चलकर और बढ़ाई जाए ताकि बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सके। अगस्त में भी मिला था बोनस अगस्त महीने में भी महिलाओं को 1500 रुपये मिले थे, जिसमें 1250 रुपये बेस अमाउंट और 250 रुपये राखी गिफ्ट शामिल थे। मुख्यमंत्री ने वादा किया है कि 2028 तक योजना की राशि 3000 रुपये प्रति माह तक पहुंचा दी जाएगी। विकास कार्यों के साथ जारी हुई 29वीं किस्त श्योपुर से जारी 29वीं किस्त के दौरान सीएम ने 98.87 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन भी किया। READ MORE: बालाघाट में चावल में मिलाया जा रहा खतरनाक केमिकल, स्वाद बढ़ाने के नाम पर चल रहा बड़ा खेल
Balaghat News : बालाघाट में चावल में मिलाया जा रहा खतरनाक केमिकल, स्वाद बढ़ाने के नाम पर चल रहा बड़ा खेल

Balaghat News : बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से खाद्य सुरक्षा से जुड़ी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ के कई चावल मिलर्स चावल में स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए खतरनाक रसायन ‘प्रोपिलीन ग्लाइकॉल’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह वही केमिकल है, जिसका इस्तेमाल छिंदवाड़ा में 27 बच्चों की मौत का कारण बने कफ सिरप ‘कोल्डड्रिफ़’ में किया गया था। स्वाद के लिए मिलाया जा रहा रसायन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सूत्रों के अनुसार, बालाघाट के कुछ चावल मिलर्स कालीमुच्छ, चिन्नौर और अन्य ब्रांड के चावल में कृत्रिम सुगंध और स्वाद लाने के लिए प्रोपिलीन ग्लाइकॉल मिला रहे हैं। जांच में सामने आया है कि यह रसायन खाद्य उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं है, फिर भी मिलर्स इसका उपयोग खुलेआम कर रहे हैं। छिंदवाड़ा हादसे के बाद बढ़ी सतर्कता छिंदवाड़ा कफ सिरप हादसे के बाद कई दवा कंपनियाँ पहले से ही जांच के दायरे में हैं। अब केंद्रीय खाद्य एवं औषधि नियंत्रक के निर्देश पर एक विशेष टीम ने बालाघाट में भी जांच शुरू कर दी है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि चावल मिलों में यह रसायन कहाँ से खरीदा जा रहा है और किस मात्रा में मिलाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि मिल मालिक यह रसायन दिल्ली की एक कंपनी से खरीदते हैं और बिना किसी वैज्ञानिक या तकनीकी विशेषज्ञ की निगरानी के चावल में मिलाते हैं। खाद्य पदार्थों में ऐसे रसायनों को मिलाना कानूनन दंडनीय अपराध है, लेकिन कई मिलर्स नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। इस मामले पर जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज पांडे से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में रसायन जांच के लिए कोई तकनीकी संसाधन या प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे रसायनों की जांच अब तक कभी नहीं की गई, जिससे यह अंदेशा बढ़ गया है कि लंबे समय से यह खेल बिना रोक-टोक चल रहा है। विशेषज्ञों की चेतावनी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोपिलीन ग्लाइकॉल का अधिक सेवन लीवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में यह मामला सिर्फ मिलर्स की लापरवाही नहीं बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ भी माना जा रहा है। READ MORE : प्रमोशन में आरक्षण पर सख्त रुख, मुख्य सचिव ने सभी विभागों से 23 अक्टूबर तक मांगी ऑडिट रिपोर्ट..
Reservation in Promotions : प्रमोशन में आरक्षण पर सख्त रुख, मुख्य सचिव ने सभी विभागों से 23 अक्टूबर तक मांगी ऑडिट रिपोर्ट..

Reservation in Promotions : भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रमोशन में अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) वर्ग के आरक्षण को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि 23 अक्टूबर तक आरक्षण की स्थिति पर विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट तैयार करें। इस रिपोर्ट में भरे हुए और खाली पदों का पूरा ब्योरा शामिल होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अब तक कितना आरक्षण दिया गया है और कितना लंबित है। मुख्य सचिव ने यह भी साफ किया है कि रिपोर्ट तय समय सीमा में हर हाल में पूरी होनी चाहिए। (Reservation in Promotions) सरकार की ओर से तय किया गया है कि सभी विभागों की रिपोर्टों को मिलाकर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे 28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। राज्य सरकार का यह कदम प्रमोशन में आरक्षण नीति के सही क्रियान्वयन और बैकलॉग कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया से विभागों में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की पारदर्शिता बढ़ेगी। (Reservation in Promotions) हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के बाद विभिन्न राज्यों ने एससी-एसटी आरक्षण की समीक्षा शुरू की है। मध्यप्रदेश भी अब उसी दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। READ MORE : MP में इन कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, तीन महीने तक काम से इनकार पर लगेगा एस्मा…