Balaghat Naxal Surrender: 23 साल की महिला नक्सली ने डाले हथियार, बढ़ सकती है सरेंडर की संख्या

Balaghat Naxal Surrender: मध्यप्रदेश में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर (छत्तीसगढ़) की रहने वाली 23 वर्षीय नक्सली सुनीता ने 31 अक्टूबर को बालाघाट में हॉक फोर्स के सामने आत्मसमर्पण किया। यह कदम राज्य में नक्सल संगठनों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशा है कि आने वाले दिनों में चार से पाँच नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं। पहली बार महिला नक्सली का सरेंडर सुनीता पिछले 33 वर्षों में मध्यप्रदेश में आत्मसमर्पण करने वाली पहली महिला नक्सली बनी। इससे पहले वर्ष 1992 में नक्सली ने आत्मसमर्पण किया था। उस समय छत्तीसगढ़ अभी मध्यप्रदेश का हिस्सा था। एमपी में सीमित नक्सल प्रभाव राज्य विभाजन के बाद से मध्यप्रदेश में नक्सली नेटवर्क सीमित रहा है। विद्रोही संगठन बालाघाट, डिंडोरी और मंडला जिलों में सक्रिय थे। डिंडोरी को पहले ही नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। वर्तमान में केंद्र सरकार की सूची में बालाघाट “चिंताजनक” और मंडला “अन्य” नक्सल प्रभावित जिला है। इंसास राइफल के साथ सरेंडर सुनीता ने एक इंसास राइफल और तीन मैगजीन के साथ सरेंडर किया। एमपी की नक्सली आत्मसमर्पण नीति के तहत उसे 35 लाख रुपये से अधिक का पुनर्वास पैकेज मिलेगा। इसमें उसके सिर पर घोषित 14 लाख रुपये का इनाम भी शामिल है। सरेंडर नीति बनी आकर्षण का केंद्र विशेष महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि एमपी की आत्मसमर्पण नीति देश की सबसे उदार नीतियों में से एक है। इस नीति ने पड़ोसी राज्यों के नक्सलियों को भी आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया है।