Parali Burning: ग्वालियर। धान की फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाना किसानों की आम आदत बन गई है। यह प्रदूषण बढ़ाता है साथ ही तेज़ी से फैलती आग से किसानों को भी नुकसान पहुंचाता है। देश में पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के किसान इस समस्या के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माने जाते हैं। 2024 में मध्य प्रदेश का श्योपुर पराली जलाने में देश में पहले पायदान पर रहा।
मध्य प्रदेश के 6 शहर टॉप 10 में शामिल
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के बुलेटिन के अनुसार, 2024 में पराली और नरवाई जलाने की घटनाओं में मध्य प्रदेश के 6 शहर टॉप टेन में शामिल थे, जिनमें श्योपुर पहले स्थान पर रहा।
सैटेलाइट और जमीन पर कड़ी निगरानी
मध्य प्रदेश सरकार ने श्योपुर में पराली जलाने पर सख्ती करने का फैसला किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सैटेलाइट के साथ-साथ जमीन पर “पराली प्रोटेक्शन फोर्स” भी सक्रिय होगी। श्योपुर में इस सीजन की धान की फसल लगभग एक लाख हेक्टेयर में तैयार है। 15 अक्टूबर के बाद जब कटाई शुरू होगी, तो अधिकारियों की निगरानी सुनिश्चित करेगी कि किसान पराली न जलाएं।
जिले के 388 गांवों में पराली जलाने पर नजर रखने के लिए 118 अधिकारियों को ड्यूटी दी गई है। इसमें प्रशासन, पुलिस और कृषि अधिकारी शामिल हैं। फोर्स रात के समय खेतों की निगरानी करेगी और किसानों को आग लगाने से रोकेगी।
पिछले साल IARI के उपग्रह डेटा के अनुसार श्योपुर में पराली जलाने से 2504 घटनाएं हुई थीं। सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग सिस्टम तुरंत अलर्ट देता है। सरकार के फॉरेस्ट फायर सिस्टम को जानकारी भेजता है।
मध्य प्रदेश में पराली जलाने पर प्रतिबंध है। इसका उल्लंघन करने पर FIR दर्ज की जाती है और 2,500 से 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है।
पराली जलाने की बजाय इसे कमाई का जरिया बनाया जा सकता है। मुरैना में “Crast” नाम के स्टार्टअप के माध्यम से पराली से पेपर और बोर्ड बनाकर पेपर प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। यह “ट्री-फ्री पेपर” पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।
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