लंबी बीमारी के बाद नहीं रहे संघ के वरिष्ठ प्रचारक विनोद कुमार
लंबी बीमारी के बाद उज्जैन में RSS प्रचारक विनोद कुमार का निधन हो गया। बीमारी में भी रोज सुबह 4 बजे करते थे महाकाल दर्शन।

स्वास्थ्य की परेशानियों से लंबे समय तक लड़ने के बाद संघ के वरिष्ठ प्रचारक विनोद कुमार ने उज्जैन में 75 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। उनकी अंतिम इच्छा महाकाल की नगरी में रहने की थी। निधन की खबर से संघ परिवार, समाज और राजनीति से जुड़े लोग शोक में हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अंतिम दर्शन कर अर्थी को कंधा दिया।
बीमारी में भी नहीं टूटा अनुशासन
परिवार का कहना है कि विनोद कुमार काफी समय से अस्वस्थ थे। इसके बावजूद उनका दिन नियम से शुरू होता था। उज्जैन में रहते हुए वे हर सुबह करीब चार बजे महाकाल के दर्शन और नामजप करते थे।
पदों की बात करें तो वे अखिल भारतीय कार्यकारिणी के आमंत्रित सदस्य थे। इससे पहले वे मध्य क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक और अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख भी रहे।
मुख्यमंत्री ने आराधना भवन में दी श्रद्धांजलि
डॉ. मोहन यादव उज्जैन के आराधना भवन पहुंचे और विनोद कुमार के अंतिम दर्शन किए। पार्थिव शरीर पर उन्होंने पुष्पचक्र अर्पित किया। अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्होंने अर्थी को कंधा दिया और भावभीनी विदाई दी।
महाकुंभ में बना दी थी वसीयत
बीते साल प्रयागराज महाकुंभ के दौरान विनोद कुमार ने शैया दान किया। उसी समय उन्होंने वसीयत भी तैयार करवाई, जिसमें साफ लिखा था कि निधन जिस जगह हो, वहीं अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाए। इस इच्छा के मुताबिक बुधवार सुबह उज्जैन के चक्रतीर्थ पर अंतिम संस्कार होगा।
बागपत से मेरठ तक का सफर
जानकारी के मुताबिक उनका जन्म बागपत जिले के बामनौली गांव में काशीराम और शकुंतला देवी के घर हुआ। बचपन मेरठ के इंद्रा नगर में गुजरा और घरवाले प्यार से उन्हें ‘गांधी’ बुलाते थे। मोदीनगर से प्रारंभिक पढ़ाई और फिर स्नातकोत्तर के बाद वे पूरी तरह संघ के काम में लग गए।
हल्द्वानी से फिरोजाबाद तक काम
प्रचारक के रूप में उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी, उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद और कई दूसरे इलाकों में संगठन बढ़ाने का काम किया। दशकों संघ की विचारधारा और गतिविधियों से जुड़े रहे इस प्रचारक के जाने को संघ परिवार बड़ा नुकसान मान रहा है।




