विनोद जी के श्रद्धांजलि सभा में RSS के पदाधिकारियों से लेकर केंद्रीय मंत्री शामिल हुए
अस्पताल में विनोद जी बोल नहीं पा रहे थे और ऑक्सीजन पाइप लगी थी, यह बात कप्तान सिंह सोलंकी ने श्रद्धांजलि सभा में भावुक होकर बताई।

पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी शुक्रवार की श्रद्धांजलि सभा में विनोद कुमार के आखिरी दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले अस्पताल में विनोद जी से बात करने की कोशिश की, तो उनकी हालत देखकर वे व्यथित हो गए। विनोद जी बोल नहीं पा रहे थे और उन्हें ऑक्सीजन पाइप लगी हुई थी।
RSS के वरिष्ठ प्रचारक के निधन पर रखी गई इस सभा में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, अशोक जी पांडे, गोरेलाल और कई अन्य वरिष्ठजन शामिल हुए। संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने भी अपनी बात रखी।
चार दिन पहले हुई थी आखिरी मुलाकात
क्षेत्र घुमंतू कार्य प्रमुख गोरेलाल जी ने बताया कि निधन से चार दिन पहले बड़ौदा-मेरठ प्रवास में उनकी विनोद जी से मुलाकात हुई थी। तबीयत नासाज होने के बावजूद उनके भीतर संकल्प और काम के प्रति लगन साफ दिख रही थी। उज्जैन पहुंचने के लगभग 12 घंटे के अंदर उन्होंने देह त्याग दी। शवयात्रा के दौरान एक पुराने कार्यकर्ता के भावुक शब्द याद करते हुए गोरेलाल जी ने कहा कि विनोद जी कई लोगों के लिए ऐसा आत्मीय सहारा थे, जिनसे वे दिल की बात कहकर सलाह पा सकते थे।
सोलंकी का कहना था कि यह सभा केवल श्रद्धासुमन चढ़ाने का अवसर नहीं है। यह विनोद जी के जीवन को जानने, समझने और उनके आदर्शों के मुताबिक जीने का संकल्प लेने का मौका भी है। उन्होंने कहा कि प्रचारक का जीवन बाहर से अदृश्य रह सकता है, पर वह अपने काम, व्यवहार और आत्मीय रिश्तों से अनगिनत लोगों के दिलों में स्थायी जगह बना लेता है। सोलंकी ने कई और संस्मरण भी सुनाए और उनके जाने से बने खालीपन का जिक्र किया।
बीमारी के बीच भी वैसी ही दिनचर्या
गोरेलाल जी के अनुसार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले विनोद जी ने संघ में अलग-अलग दायित्व निभाए। जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद उज्जैन में रहते हुए भी उनकी दिनचर्या और कार्यनिष्ठा में कोई ढील नहीं आई। रोज की कसरत, स्नान-ध्यान, जप-तप, बाबा महाकाल के दर्शन, आरती में भागीदारी और समाज के अलग-अलग वर्गों व कार्यकर्ताओं से सहज बातचीत उनके जीवन का हिस्सा थी। बड़े पदों से हटने पर भी उनके व्यवहार में फर्क नहीं आया और मिलने आने वालों की गिनती घटने-बढ़ने का असर उन्होंने मन पर नहीं पड़ने दिया।
इसी दौरान गोरेलाल जी ने गीता का श्लोक बोला, जिसमें सात्विक कर्ता के लक्षण बताए गए हैं: “मुक्तसंगोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः। सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते॥” उन्होंने कहा कि मोह और अहंकार से अलग रहकर धैर्य और उत्साह के साथ सफलता-असफलता में समान रहने के ये गुण विनोद जी में सहज दिखते थे। उन्होंने उनके सात्विक व्यक्तित्व, सरल व्यवहार और संगठन के प्रति दृढ़ता की भी बात की।
प्रयागराज कुंभ में पुराने कार्यकर्ताओं की देखरेख
गोरेलाल जी ने बताया कि प्रयागराज कुंभ में विनोद जी करीब एक महीने सक्रिय रहे। वहां आने वाले पुराने कार्यकर्ताओं, साधु-संतों और पूर्व प्रचारकों की आवभगत और उन्हें सक्रिय रखने के लिए वे लगातार प्रयास में लगे रहे। उनकी चिंता थी कि कोई भी पुराना कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित या बेकार न समझे और समाज के काम में अपनी भूमिका निभाता रहे।
कार्यकर्ताओं की चिंता और संगठन के लिए सख्ती
महाकौशल में प्रांत प्रचारक के कार्यकाल का जिक्र करते हुए गोरेलाल जी ने बताया कि विनोद जी कार्यकर्ताओं के प्रति बहुत संवेदनशील थे। वरिष्ठ कार्यकर्ता का दायित्व बदलते समय वे उसकी भावना और सक्रियता को ध्यान में रखते थे, पर संगठन-विरोधी गतिविधियों में जरूरी कड़ा निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते थे। उनका हृदय मां जैसा कोमल था, लेकिन संगठन के हित में निर्णय करते समय वे मजबूत और अनुशासित दिखते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि विनोद जी में मां जैसी करुणा, पिता जैसी चिंता और गुरु जैसा मार्गदर्शन एक साथ दिखता था। उनका जीवन आज के सामाजिक कार्यकर्ताओं को सिखाता है कि कितना बोलना है, क्या बोलना है और कैसा आचरण रखना है।
उद्योग जगत के लोगों को जोड़ने का उनका तरीका
गोरेलाल जी के मुताबिक विनोद जी व्यक्तियों की क्षमता पहचानकर उन्हें समाज और संगठन के काम से जोड़ने में माहिर थे। घुमंतू समाज के कुछ लोग आगे चलकर इंदौर में उद्योग लगा चुके थे। विनोद जी ने उन्हें अपनेपन के साथ संघ के काम से जोड़ा। दीपावली मिलन जैसे आयोजनों में उद्योग जगत के लोगों को एक जगह बुलाकर वे उन्हें धीरे-धीरे संघ की विचारधारा से परिचित कराते रहे, जो उनके रिश्ते बनाने की सहज कार्यशैली का उदाहरण था।
दीपक विस्पुते: 55 साल का प्रचारक जीवन
विस्पुते ने कहा कि विनोद जी उच्च शिक्षित थे और चाहते तो सफल व्यावसायिक जीवन चुन सकते थे, पर उन्होंने पूरा जीवन संघ के लिए दे दिया। लगभग 55 साल के प्रचारक जीवन में वे प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। उनमें सूक्ष्मता, आग्रहपूर्वक काम कराने की क्षमता, व्यक्ति की परख और कार्यकर्ताओं की चिंता जैसे गुण साफ दिखते थे।
विस्पुते ने कहा कि डॉ. हेडगेवार को प्रत्यक्ष देखने का अवसर भले नहीं मिला, पर विनोद जी जैसे लोगों को देखकर समझा जा सकता है कि संघमय जीवन कैसा होता है। उनके अनुसार संघ को सिर्फ पुस्तकों से नहीं, बल्कि ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं के जीवन से भी जाना जा सकता है। उनके विरोधी भी सादगी और जीवन-मूल्यों के प्रशंसक थे और आत्मप्रचार से दूरी उनके व्यवहार में दिखती थी। विस्पुते ने बताया कि जब वे खुद प्रचारक का दायित्व छोड़कर घर जाने का सोच रहे थे, तब विनोद जी की बातचीत और मार्गदर्शन ने ऐसा असर डाला कि वह विचार दोबारा नहीं आया। उन्होंने कहा कि चित्र पर पुष्प चढ़ाना काफी नहीं, उनके जीवन से प्रेरणा लेकर आचरण में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
शिवराज की याद: समरसता के कामों में विनोद जी की सलाह
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सामाजिक समरसता से जुड़े अनेक वैचारिक निर्णयों और योजनाओं में विनोद जी की दृष्टि और मार्गदर्शन अहम रहता था। संत रविदास महाकुंभ, टंट्या मामा भील और भीमा नायक से जुड़े कार्यों और योजनाओं में उनकी अंतर्दृष्टि का विशेष योगदान रहा। उनके मुताबिक विनोद जी इन विषयों को गहराई से समझते थे और उनकी सलाह से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की दृष्टि मिलती थी।
शिवराज ने कहा कि विनोद जी बाहर से बहुत कठोर दिखते थे, पर हृदय से बहुत कोमल थे। उनके व्यवहार में अनुशासन और आत्मीयता का मेल था। उन्होंने कहा कि उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें, तो भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाने के काम में योगदान दे सकेंगे।
पांडे की बात और सभा का समापन
अशोक जी पांडे ने विनोद जी को कार्यकर्ता की चिंता, समाज के प्रति संवेदना, जीवन की प्रामाणिकता और दूरदृष्टि का रूप बताया। उनका कहना था कि किसी विचार या प्रतिज्ञा को केवल शब्दों तक रखने के बजाय जीवन में कैसे उतारा जाए, यह विनोद जी से सीखा जा सकता है। उनका हर कार्य समाज और संगठन के प्रति समर्पण से प्रेरित था। पांडे ने पूरी पवित्रता के साथ श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सभा में संघ और संघ प्रेरित संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और विनोद जी से आत्मीय संबंध रखने वाले कई लोग शामिल हुए। सभा के बाद सबने मौन रखकर उन्हें नमन किया और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए।



