आरक्षण और भर्ती पर सरकार से जवाब मांग रही OBC महासभा, 3 दिन में कदम उठाने की मांग
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण और लंबित भर्तियों पर OBC महासभा ने सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है। CM मोहन यादव को 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर संगठन ने 2-3 दिन की मोहलत दी। राहत के लिए ठोस कदम नहीं उठे तो 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन देकर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।
.jpg&w=3840&q=75)
MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण और सरकारी नौकरियों में अटकी नियुक्तियों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। OBC महासभा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपनी मांगें रखते हुए स्पष्ट किया है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए ठोस रास्ता निकालना होगा। संगठन ने सरकार को 2 से 3 दिन की मोहलत दी है। इस दौरान कोई स्पष्ट पहल नहीं होने पर 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन सौंपने और आगे आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।
आरक्षण के साथ अटकी भर्तियों का मुद्दा भी उठाया
बता दें, शुक्रवार को मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात में महासभा के प्रतिनिधियों ने 27% OBC आरक्षण की बहाली और 13% होल्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों की नियुक्ति का विषय उठाया। संगठन चाहता है कि आरक्षण विवाद के कारण प्रभावित उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर सरकार स्पष्ट निर्णय ले।
बैठक में सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। होल्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर देने के लिए अतिरिक्त पदों की संभावना पर भी विचार हो रहा है। हालांकि, कितने पद बढ़ाए जा सकते हैं और भर्ती कब तक पूरी होगी, इस बारे में कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकार के सामने महासभा ने रखे सवाल
संगठन ने आरक्षण से जुड़े कानून और सरकार की अब तक की कार्रवाई पर सवाल उठाए। महासभा का कहना है कि यदि पहले बनाया गया कानून उपयुक्त नहीं था, तो लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान नया कानूनी विकल्प तैयार करने की दिशा में क्या प्रयास किए गए? संगठन ने मांग की कि 27% आरक्षण की बहाली के लिए उपलब्ध कानूनी रास्तों पर गंभीरता से काम हो और आगे की रणनीति सार्वजनिक की जाए।
28 अक्टूबर को अगला कदम उठाने की तैयारी
संगठन के अनुसार, महासभा ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए सीमित समय दिया है। तय अवधि में ठोस प्रगति नहीं दिखी तो 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद आंदोलन को प्रदेश स्तर पर आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इससे पहले 15 अक्टूबर को जबलपुर हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले के बाद भी महासभा ने अलग-अलग स्थानों पर ज्ञापन और प्रदर्शन किए थे। अब संगठन की नजर सरकार के अगले कदम पर है।
14 सूत्रीय मांगपत्र में कानूनी लड़ाई की तैयारी
साथ ही, मुख्यमंत्री को महासभा 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। जिसमें आरक्षण मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए अनुभवी वकीलों, संविधान विशेषज्ञों और आरक्षण से जुड़े मामलों के जानकारों की टीम बनाने का सुझाव दिया है। संगठन ने 50% आरक्षण सीमा और विशेष परिस्थितियों में आरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की समीक्षा कराने की मांग भी की। मांगपत्र में इंद्रा साहनी और लक्ष्मणराव पाटिल फैसलों के संदर्भ में मध्य प्रदेश की सामाजिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों का अध्ययन कराने की बात भी शामिल है।
सर्वे, रिपोर्ट की समीक्षा और नोडल अधिकारी की मांग
वहीं, महासभा ने OBC समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत सर्वे कराने की मांग रखी है। इसमें शिक्षा, सरकारी सेवाओं, रोजगार और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में मौजूद अंतर का आकलन करने का सुझाव दिया गया है।
संगठन ने 2023 की बंसल आयोग रिपोर्ट की स्वतंत्र विशेषज्ञों से समीक्षा कराने, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श लेने और MPPSC तथा कर्मचारी चयन मंडल में प्रभावित पदों की स्थिति की जांच करने की मांग भी की है। इसके अलावा, लंबित नियुक्तियों और कानूनी प्रक्रिया के बीच समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया है।


