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Bandhavgarh Tiger Reserve: बांधवगढ़ में मादा हाथियों पर लगेगा रेडियो कॉलर, मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए कदम

Bandhavgarh Tiger Reserve:

Bandhavgarh Tiger Reserve: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अब झुंडों की प्रमुख मादा हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य उनकी मूवमेंट ट्रैक करना और आसपास के गांवों को समय रहते अलर्ट देना है ताकि मानव-हाथी संघर्ष के मामलों में कमी लाई जा सके।

रिजर्व में 60 से अधिक हाथी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रकाश कुमार वर्मा के अनुसार, क्षेत्र में लगभग 60 से 65 हाथी हैं। ये हाथी अलग-अलग झुंडों में रहते हैं और हर झुंड का नेतृत्व एक मादा हाथी करती है। प्रमुख मादा हाथी हमेशा अन्य हाथियों से घिरी रहती है, इसी कारण उसे कॉलर लगाना जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

नर हाथियों पर पहले सफल ट्रायल

रिजर्व प्रबंधन ने इससे पहले संघर्ष-प्रवण श्रेणी वाले तीन नर हाथियों पर सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर लगाए थे। अब इस तकनीक का विस्तार करते हुए, दो पशु चिकित्सकों को असम और दक्षिण भारत भेजा जाएगा ताकि वे वहां इस्तेमाल की जा रही मादा हाथियों को टैग करने की विशेषज्ञ तकनीक सीख सकें।

छत्तीसगढ़ से आए हाथियों की बड़ी संख्या

बांधवगढ़ में फिलहाल सबसे बड़ी संख्या उन हाथियों की है, जो वर्षों पहले छत्तीसगढ़ क्षेत्र से आए थे और अब यहीं स्थायी रूप से रह रहे हैं। पिछले वर्ष बांधवगढ़ क्षेत्र में कोडू फसल में फफूंद लगने से ग्यारह हाथियों की मौत हो गई थी। इस बार वन विभाग पहले से सक्रिय मोड में है।

फसल संक्रमण रोकने के लिए 25 टीमें बनाई गई हैं। कृषि और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मदद से यह टीमें आसपास के गांवों और खेतों का निरीक्षण कर रही हैं। अब तक किसी फसल में संक्रमण नहीं मिला है।

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