CM Dr. Mohan Yadav Exclusive: भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास में सुशासन, पराक्रम और न्याय के सर्वोच्च उदाहरण हैं और उन्हें जन-जन तक पहुंचाना उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर भोपाल में 2 और 3 नवंबर को होने वाले विक्रमादित्य महानाट्य को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष बातचीत में यह बातें कहीं। यह महा नाट्य दिल्ली के लाल किले, हैदराबाद और ग्वालियर में सफल मंचन के बाद अब भोपाल में हो रहा है।
विक्रमादित्य को जनमानस तक लाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का चरित्र दानशीलता और न्यायप्रियता से भरा है। उनके शासन में रामराज्य की झलक मिलती है और देश-दुनिया में उनका व्यक्तित्व बेजोड़ है। इसलिए उन्हें व्यापक रूप से प्रचारित करना उनका संकल्प है।
विक्रमादित्य के नेतृत्व को CM ने बताया प्रेरक
महानाट्य के किस भाग से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। इस प्रश्न पर सीएम ने कहा कि विक्रमादित्य के सुशासन की नीति और जनता से जुड़ाव सबसे प्रेरक है। स्पष्ट नीति, उज्ज्वल चरित्र और विकास का दूरदर्शी मॉडल उनके शासन की पहचान रहा है।
उज्जैन से भावनात्मक जुड़ाव
डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं उज्जैन के हैं जिसे विक्रमादित्य की राजधानी अवंतिका कहा जाता है। विक्रम संवत, कालिदास समारोह और पुरातात्विक विरासत के बीच पले-बढ़े हैं। इसी कारण उन्होंने 2005-06 में विक्रमादित्य शोधपीठ स्थापित कराई और फिर इस महानाट्य की अवधारणा विकसित की।
अभिनय से आयोजन की भूमिका तक
मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआती समय में उन्होंने छोटे किरदार निभाए ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिल सके। अब वे आयोजन में मार्गदर्शन की भूमिका निभा रहे हैं। इस प्रस्तुति में डॉक्टर, इंजीनियर और छात्र सहित 250 से अधिक कलाकार शामिल हैं।
आगे कई शहरों में होगा आयोजन
भोपाल के बाद अब इस नाट्य को जबलपुर, रीवा, इंदौर और अन्य राज्यों में ले जाया जाएगा। सीएम ने कहा कि यह केवल नाट्य नहीं बल्कि सांस्कृतिक अभियान है जिसका उद्देश्य विक्रमादित्य के जीवन और आदर्शों को समाज तक पहुंचाना है।
डिजिटल युग में भी दर्शकों की भारी भीड़ का कारण बताते हुए सीएम ने कहा कि यह नाट्य फिल्म की तरह भव्य है। लाइव घोड़े, तलवारबाजी, धूल और आतिश प्रभाव दर्शकों को विक्रम काल में ले जाते हैं और यह अनुभव जीवनभर याद रहता है।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश
सीएम ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए विक्रमादित्य की सबसे बड़ी सीख निडरता और सत्य-कर्तव्य के प्रति समर्पण है। विक्रम का अर्थ होता है विपरीत परिस्थिति को साध लेना। यही जीवन का आदर्श होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 और 3 नवंबर को भोपाल में आयोजित इस महानाट्य में जनता जरूर शामिल हो। यह केवल अभिनय नहीं बल्कि भावनात्मक सांस्कृतिक पुनर्रचना है जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने योगदान दिया है।
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https://www.youtube.com/watch?v=BiIuNt2eJRo&feature=youtu.be