Kranti Goud Cricket Journey: क्रांति गौड़ का क्रिकेट सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। सागर जिले के क्रिकेट कोच सोनू वाल्मीकि के सामने अचानक ही एक लड़की आई, हाथ में डंडा, नजरों में आत्मविश्वास और दिल में खेल का जुनून। उन्होंने पूछा कि क्रिकेट खेलती हो, तो जवाब मिला कि लड़कों के साथ खेलती हूं। यही आत्मविश्वास क्रांति को जीवन का पहला अवसर दिलाने का कारण बना।
भाई के जूते पहनकर मैदान में उतरी थीं Kranti Goud
टूर्नामेंट में खिलाड़ी कम पड़े थे और क्रांति को टीम में शामिल कर लिया गया। उसके पास ड्रेस नहीं थी। उसने साफ कहा कि भाई के जूते हैं, ड्रेस नहीं। कोच ने कहा कि जूते पहनकर आओ, ड्रेस का इंतजाम हो जाएगा। यही पल उसके क्रिकेट करियर का मोड़ था।
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Kranti Goud ने पहले मैच में ही बनाया इतिहास
गुहारा में खेले गए इस मैच में क्रांति ने अपनी प्रतिभा साबित कर दी। गेंदबाजी में दो महत्वपूर्ण विकेट और बैटिंग में 25 रन। मैदान पर उत्साह देखने लायक था और घोषणा हुई कि मैन ऑफ द मैच क्रांति गौड़ ( Kranti Goud) । दर्शकों ने उसके नाम के नारे लगाए।
इस प्रदर्शन के बाद अफसरों ने उसके सपनों को पंख देते हुए क्रिकेट किट दिलाई और क्रांति सागर आ गई। यहां डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी की क्रिकेट एकेडमी में उसकी असली ट्रेनिंग शुरू हुई।
बुंदेलखंड से वर्ल्ड कप तक का सफर
क्रांति (Kranti Goud) की खासियत बाउंसर और इन-स्विंग गेंदबाजी है। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को इसी गेंद पर आउट कराकर उसने दुनिया को अपना हुनर दिखाया। बालिका अवस्था में प्रदेश स्तर के मैच खेले और फिर राष्ट्रीय टीम तक पहुंची। आज वर्ल्ड कप जीतकर क्रांति ने बुंदेलखंड और देश का मान बढ़ाया है।
कहानी बताती है कि सपनों को पंख लगते हैं, बस साहस और सही अवसर की जरूरत होती है। क्रांति गौड़ ( Kranti Goud) इसका जीवंत उदाहरण हैं।
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