MP High Court : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर क्षेत्र में चल रही शराब दुकानों पर कड़ा रुख दिखाया है। अदालत ने केंद्र के सड़क परिवहन मंत्रालय, राज्य के आबकारी आयुक्त और आबकारी सचिव को नोटिस जारी किए हैं।
कोर्ट ने इन दुकानों को तुरंत बंद करने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दो सप्ताह में विस्तृत जवाब भी मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश की अनदेखी पर अदालत ने नाराजगी जताई है।
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सड़क किनारे शराब पीते लोग बढ़ा रहे खतरा
यह मामला भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता राशिद नूर खान द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में हाईवे के पास शराब दुकानों पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, फिर भी कई दुकानें अभी भी खुले हैं।
दुकानों के बाहर खड़े लोग शराब पीते दिखते हैं, जिससे ट्रक चालकों और यात्रियों में नशे की हालत में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है और जनता की सुरक्षा खतरे में है।
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सरकार का पुराना आदेश भी आया सामने
याचिकाकर्ता के वकील आर्यन उरमलिया ने सुनवाई के दौरान फोटो और दस्तावेज पेश किए। इनसे पता चलता है कि कई दुकानें सीधे राजमार्ग से जुड़ी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने 1 जून 2017 को आदेश जारी कर हाईवे पर शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद 2025-26 की नई आबकारी नीति में कई दुकानों को फिर से चलने की अनुमति दे दी गई और कुछ नई दुकानों का आवंटन भी हाईवे के पास कर दिया गया।
अदालत ने सभी पक्षों को दिया नोटिस
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सच्चदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई पूरी की। अदालत ने सभी संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
हाईकोर्ट का यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब केंद्र और राज्य सरकार का जवाब तय करेगा कि आगे क्या कार्रवाई होगी।
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