MP Jhadu Gali: देपालपुर। देश के कोने-कोने में सफाई का काम करने वाली झाड़ू कहां से आती है। यह शायद बहुत कम लोगों को पता होगा। मध्यप्रदेश के देपालपुर का एक इलाका, जिसे लोग “झाड़ू वाली गली” भी कहते हैं। इस पूरे देश में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां झाड़ू केवल सफाई का साधन नहीं बल्कि धनतेरस और दीपावली पर पूजन का हिस्सा भी बनती हैं।
पूरे साल चलता है झाड़ू बनाने का काम
देपालपुर की झाड़ू बनाने वाली गली में करीब 50 परिवार पूरे साल सिर्फ झाड़ू बनाने में लगे रहते हैं। यहां महिला, पुरुष और बच्चे सभी इस काम में निपुण हैं। खजूर के पेड़ों की शाखाओं से डाली निकालकर उन्हें साफ किया जाता है। फिर अलग-अलग प्रकार की झाड़ू बनाई जाती हैं।
धनतेरस और दीपावली पर झाड़ू का महत्व
धनतेरस और दीपावली के समय पूरे देश में झाड़ू की सबसे ज्यादा बिक्री होती है। इसे केवल सफाई का साधन ही नहीं बल्कि धन और समृद्धि का प्रतीक मानकर पूजा भी जाता है। यही कारण है कि इस समय देपालपुर से झाड़ू की मांग बढ़ जाती है।
पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर
झाड़ू बनाने वाले परिवार बताते हैं कि यह काम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है। समय और तकनीक बदलते गए, लेकिन देपालपुर में आज भी झाड़ू हाथों से बनाई जाती हैं, जिससे इनका अपना एक खास दर्जा है। इसके अलावा, ये परिवार झाड़ू को दूर-दूर तक सप्लाई करते हैं।
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