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MP News: रेप केस में डीएनए रिपोर्ट छिपाने पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश

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MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की पीठ ने कहा कि पुलिस ने डीएनए सैंपल लेकर भी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की, जो न्यायिक प्रक्रिया में बड़ी चूक है।

कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि नर्मदापुरम के तत्कालीन एसपी और महिला जांच अधिकारी की भूमिका की जांच कर 30 दिनों में रिपोर्ट दें। इसी आधार पर आरोपी को जमानत दी गई।

क्या है पूरा मामला

सिवनी मालवा निवासी राहुल कुछबंधिया को ट्रायल कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की और कहा कि उसका डीएनए सैंपल लिया गया था, लेकिन रिपोर्ट कभी पेश ही नहीं की गई। हाईकोर्ट ने इस तर्क को गंभीर माना और कहा कि ट्रायल कोर्ट ने भी इस कमी को दर्ज किया था। रिपोर्ट न आना न्याय को प्रभावित करता है। इसलिए आरोपी को राहत दी गई।

जांच अधिकारी पर शक

कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी वैशाली उइके ने किसी दबाव या साजिश के तहत रिपोर्ट को छिपाया। साथ ही तत्कालीन नर्मदापुरम एसपी पर भी सवाल उठाए गए कि उन्होंने डीएनए सैंपल भेजने से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच क्यों नहीं की। कोर्ट ने कहा कि चाहे अधिकारी अब कहीं भी तैनात हों, जांच अनिवार्य है।

पहले भी पुलिस पर फटकार

हाईकोर्ट ने इससे पहले भी कई मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

• कटनी में वीडियो क्लिप छुपाने पर अफसर की जांच के आदेश
• नरसिंहपुर में डीएनए रिपोर्ट मेल न होने पर आरोपी को बरी

सुप्रीम कोर्ट ने भी मंदसौर गैंगरेप मामले में कहा था कि केवल डीएनए पर्याप्त नहीं, विशेषज्ञ बयान भी जरूरी हैं।

फॉरेंसिक लापरवाही पर चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि फॉरेंसिक साक्ष्य अपराध सिद्ध करने की रीढ़ हैं। रिपोर्ट समय पर न आने से निर्दोष जेल में रह जाते हैं और दोषी बच सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि सबूतों से छेड़छाड़ न्याय व्यवस्था का अपमान है।

आगे की कार्रवाई

अब डीजीपी विशेष टीम बनाकर जांच करेंगे। नर्मदापुरम के पूर्व एसपी और वैशाली उइके पर विभागीय एक्शन या कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई संभव है। आरोपी राहुल को जमानत दी गई है और उसे कोर्ट में नियमित हाजिर रहने की शर्त लगाई गई है। पीड़िता के वकील ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि सबूत छुपाना पीड़ितों के साथ अन्याय है। राज्य सरकार ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

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