MP Carbide Gun: ग्वालियर। दीपावली के बाद कार्बाइड गन (देशी पटाखा गन) से आंखों में गंभीर चोट के कई मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 48 घंटे में कुल 36 मरीज जेएएच, जिला अस्पताल मुरार, बिड़ला और रतन/रजन ज्योति नेत्रालय सहित विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए हैं।
बुधवार को 19 और गुरुवार को 17 नए केस दर्ज किए गए। इनमें आठ रोगियों की आंख की स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है और कुछ के कॉर्निया गंभीर रूप से प्रभावित होकर सफेद पड़ गए हैं।
घायल मरीजों का ऑपरेशन
इनमें से जिन आठ रोगियों की कॉर्निया पर चोट ज्यादा गंभीर थी, उनका आपरेशन कर इलाज किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि आंखों की रोशनी कितनी लौटेगी, यह फिलहाल कहना मुश्किल है। कम से कम सात दिन बाद ही स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकेगा। कुछ मामलों में मरीजों की आंखों की रोशनी लगभग चली जाने की रिपोर्टें भी हैं। कई मामलों में कॉर्निया का स्थायी नुकसान होने का खतरा है।
कलेक्टर के आदेश पर धारा 163 लागू कर कार्बाइड गन के क्रय‑विक्रय व उपयोग पर रोक लगाई गई। आदेश के बाद इंदरगंज थाना क्षेत्र के झाड़ू वाला मोहल्ले में जांच की गई, जहां पुलिस ने शाहिद अली नामक युवक को कार्बाइड गन बेचते हुए पकड़ा और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया।
क्यों खतरनाक है कार्बाइड गन
बाजार में 100–200 रुपए की यह सस्ती देसी गन कैल्शियम कार्बाइड से भरी होती है। पानी से संपर्क में आने पर कैल्शियम कार्बाइड एसीटिलीन गैस बनाता है, जो तेज उर्जा के साथ जलकर विस्फोट जैसा प्रभाव देता है। आँख, त्वचा और चेहरे पर कुछ सेकंड में भयानक झुलसन हो जाती है। इसी कारण लगातार कई जिलों में आंखों के गंभीर केस सामने आ रहे हैं।
क्या करें और क्या न करें
डॉ. रौनक अग्रवाल ने बताया कि अगर किसी की आंख कार्बाइड गन के कारण प्रभावित हो गई है तो उसे हाथ से रगड़ना या खुद से साफ करने की कोशिश बिल्कुल न करें। आंख रगड़ने पर कार्बाइड के कण अंदर चले जाते हैं। नुकसान स्थायी हो सकता है। घायल पाए जाने पर तुरंत निकटतम अस्पताल में ले जाकर विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। कई मामलों में इमरजेंसी सर्जरी ही सुरक्षित विकल्प रहती है।
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