MP BJP Organization Review: दतिया हार के बाद दिल्ली में नेताओं की बैठकें तेज, संगठन में बदलाव पर नजर
दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मध्यप्रदेश भाजपा संगठन की समीक्षा तेज है। दिल्ली में बड़े नेताओं की मुलाकातें चर्चा में हैं।
भोपाल दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मध्यप्रदेश के संगठन को लेकर दिल्ली में मंथन, सच में तेज हो गया है। केंद्रीय नेतृत्व लगातार प्रदेश के संगठन और हालिया चुनावी प्रदर्शन का फीडबैक ले रहा है, और ये सिलसिला धीरे धीरे, पर पक्का बैठ रहा है। दिल्ली में मध्यप्रदेश के कई बड़े चेहरे, अलग अलग समय पर मिलते देखे जा रहे हैं, और इसे लेकर चर्चा ये है कि बैठकों को संगठन की मौजूदा हालत चुनावी चाल और लगातार सामने आ रही दिक्कतों से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया की हार के बाद अब ये सवाल उठ रहे हैं कि चुनाव दर चुनाव, भाजपा के प्रदर्शन में आखिर , कहीं न कहीं चूक हो रही है कहाँ।
दिल्ली में बड़े नेताओं की मुलाकातें
दिल्ली में मध्यप्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकातें चर्चा में बनी हुई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई, वहीं कैलाश विजयवर्गीय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की बात कही जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की नितिन नवीन के साथ बैठक हुई है। वीडी शर्मा की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की चर्चा भी चल रही है। इसके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया और नितिन नवीन की मुलाकात , तथा रजनीश अग्रवाल और अश्विनी वैष्णव की बैठक भी राजनीतिक गलियारों में इधर उधर घूम रही है।
चुनावी प्रदर्शन पर उठ रहे सवाल
मध्य प्रदेश में हाल के नतीजों ने भाजपा की संगठनात्मक रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विजयपुर के बाद दतिया की हार ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। इससे पहले बुधनी में भी भाजपा की जीत का अंतर ऐसा नहीं था कि सब कुछ साफ दिख जाए, अंतर काफ़ी कम रहा था। बुधनी में करीब एक लाख मतों की बढ़त घटकर लगभग 10 हजार के आसपास पहुंच गई थी। अमरवाड़ा में भी भाजपा को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बाद अब संगठन की चुनावी तैयारी और बूथ स्तर वाली योजना को लेकर समीक्षा की बातें तेज हो गई हैं।
बूथ मैनेजमेंट भी समीक्षा के दायरे में
रजनीश अग्रवाल ने 2023 के विधानसभा चुनाव में बूथ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाली थी। वहीं अश्विनी वैष्णव उस चुनाव में सह प्रभारी की भूमिका में थे। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को चुनावी संगठन और पुराने चुनावी अनुभवों के संदर्भ में देखा जा रहा है। लेकिन ये भी कि इन मुलाकातों का असली एजेंडा क्या था, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल नहीं आई है। इसलिए राजनीतिक हलकों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं, और कुछ लोग इसे रणनीतिक संकेत भी मान रहे हैं।
क्या मध्य प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े बदलाव होंगे?
दतिया की हार के बाद सबसे बड़ा सवाल ये बन गया है कि मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में संभावित फेरबदल होंगे या नहीं। संगठन की कार्यप्रणाली, बूथ मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति को लेकर फीडबैक लेने की बातें सामने आ रही हैं। अभी ये तय नहीं है कि दिल्ली में चल रही इन मुलाकातों और समीक्षा का असर संगठनात्मक स्तर पर किसी बड़े बदलाव की शक्ल में आएगा भी, या बस रिपोर्ट तक सीमित रहेगा। अब देखना ये होगा कि दतिया की हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व की समीक्षा का असर मध्यप्रदेश भाजपा संगठन पर , किस तरह से और कितनी जल्दी , पड़ता है।
