संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित: लोकसभा में सिर्फ 4 मिनट चली कार्यवाही, राज्यसभा में पास हुआ खनन संशोधन विधेयक
संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो गया। लोकसभा की कार्यवाही जहां महज चार मिनट चली, वहीं राज्यसभा में हंगामे के बीच खनन संशोधन विधेयक को पारित कर दिया गया।
नई दिल्ली में शुक्रवार को संसद का मानसून सत्र, भारी हंगामे और हर तरह के गतिरोध के बीच , आखिरकार अनिश्चितकाल के लिए खत्म हो गया। आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहे। राष्ट्रगीत की धुन शुरू होते ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को तुरन्त अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इस दौरान लोकसभा में कामकाज बस चार मिनट से भी कम, चल सका; जबकि ऊपरी सदन यानी राज्यसभा की कार्यवाही क़रीब एक घंटे तक चलती रही।
खनन विधेयक को हरी झंडी, अब राज्यों को केंद्र की मंजूरी लेनी होगी
राज्यसभा में उठते हंगामे के बीच विधायी प्रावधानों को आगे बढ़ाते हुए खनन कानून में बदलाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को ध्वनिमत से पास कर दिया गया। इस नए विधेयक में ठोस बदलाव जोड़े गए हैं, जिनके मुताबिक अब राज्यों द्वारा खनिज और खदानों पर, किसी भी तरह का अतिरिक्त कर, शुल्क (ड्यूटी) या सेस लगाने से पहले केंद्र सरकार की औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
लोकसभा में छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज के मुद्दे पर अटका रहा कामकाज
20 जुलाई से शुरू हुए इस पूरे मानसून सत्र में लोकसभा की तस्वीर विपक्षी दलों के लगातार विरोध से लगभग रूकी सी रही। विपक्ष बार बार यह कहता रहा कि हाल के दिनों में छात्र आंदोलन के समय संसद मार्च पर हुए लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल की बात स्पष्ट की जाए। विपक्षी मांग यह रही कि गृहमंत्री अमित शाह यह साफ करें कि ये आदेश आखिर किसके जरिए दिए गए थे। बुधवार को गृहमंत्री शाह ने यह भी कहा था कि अगर विपक्ष सदन चलने दे तो वे हर सवाल का जवाब देने तैयार हैं, पर सत्र के आखिरी दिन पर भी लोकसभा में इस मुद्दे पर कोई सार्थक चर्चा नहीं हो पाई।
मल्लिकार्जुन खरगे के 'शुद्धिकरण' बयान पर सदन में तीखा बवाल
सत्र के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा उठाया गया एक और विषय, सदन में राजनीतिक तापमान ऊपर ले गया। खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपने एक कार्यक्रम के बाद, सभास्थल के कथित 'शुद्धिकरण' और हवन कराए जाने का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर दलित समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए सवाल किया कि उनके कार्यक्रम के बाद, ऐसी प्रक्रिया करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस बयान को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराएगी, और इस संवेदनशील विषय को लेकर किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए।
सत्र के आंकड़े और आगे के राजनीतिक कयास
सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, राज्यसभा इस मानसून सत्र में कुल 37 घंटे और 49 मिनट तक ही चली। सत्र के औपचारिक समापन के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बढ़ रही है कि आगे चलकर एक 'विशेष सत्र' बुलाया जा सकता है। साथ ही सत्र समाप्त होने के बाद, कई प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से औपचारिक मुलाकात की खबरें भी सामने आई हैं।
