CENTRAL BUDGET 2026: मध्यप्रदेश। केंद्रीय बजट 2026 में मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को मिलने वाले करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा 7.86 प्रतिशत से घटाकर 7.34 प्रतिशत कर दिया है। इसके चलते प्रदेश को अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक हर साल औसतन 7500 करोड़ रुपये कम मिलने का अनुमान है।

इस कटौती का असर सिर्फ आने वाले वर्षों तक सीमित नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भी अनुमानों में संशोधन किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था, अब यह घटकर 1,09,348 करोड़ रुपये रह गया है। यानी इस साल ही प्रदेश को करीब 2314 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा।
टैक्स में कमी, लेकिन पूंजीगत खर्च से राहत की उम्मीद
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स हिस्सेदारी घटने के बावजूद बजट में किए गए कैपिटल एक्सपेंडिचर के प्रावधान मध्य प्रदेश के लिए राहत बन सकते हैं। केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में राज्य को इस बार करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपये की विशेष पूंजीगत सहायता का ऐलान किया गया है। इस श्रेणी में आने वाले मध्य प्रदेश के करीब 10 शहरों को इसका लाभ मिल सकता है।

10 शहरों के विकास को मिल सकता है 5000 करोड़ तक का फंड
वित्तीय जानकारों के अनुसार, इस फंड से भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7000 करोड़ रुपये तक, जबकि अन्य शहरों को 5000 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही देश में प्रस्तावित 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप में से एक भोपाल को मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। भोपाल के भौंरी क्षेत्र में राज्य सरकार पहले से ही एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है, जिसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप का रूप दिया जा सकता है।
सिंहस्थ 2028 के लिए पैकेज नहीं मिला
हालांकि बजट से कुछ उम्मीदें जगी हैं, लेकिन सिंहस्थ कुंभ 2028 के आयोजन के लिए मध्य प्रदेश द्वारा मांगे गए 20,000 करोड़ रुपये के स्पेशल पैकेज को लेकर केंद्र सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। इसे राज्य के लिए एक बड़ी निराशा के रूप में देखा जा रहा है।
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शहरी निकायों और सामाजिक योजनाओं पर फोकस
बजट में शहरी विकास को लेकर भी अहम प्रावधान किए गए हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े नगर निगम अब अमृत बॉन्ड के जरिए 1000 करोड़ रुपये तक जुटा सकेंगे, जिस पर केंद्र से अतिरिक्त सहायता मिलेगी।
इसके अलावा अमृत 2.0 योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 7022 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनका फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में कोलार और बैरागढ़ क्षेत्रों में नई सीवेज परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
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महिला, किसान और छात्राओं के लिए घोषणाएं
महिला सशक्तीकरण के लिए बजट में ‘शी-मार्ट’ योजना की घोषणा की गई है, जिससे मध्य प्रदेश की 16 लाख से अधिक महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं 75 लाख छोटे और सीमांत किसानों के लिए ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि मिशन और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने की योजना है।
शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार ने राज्य के 55 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण के लिए सहायता देने का ऐलान किया है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी 52 जिला अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योग से रोजगार की उम्मीद
वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पीएम मित्र पार्क को लेकर भी बजट में समर्थन दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, इससे राज्य में करीब 3 लाख लोगों को रोजगार और 6 लाख किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।