भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर राम मंदिर चंदा अभियान को लेकर चर्चा में हैं। साल 2021 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा संग्रह के दौरान हुई कथित सांप्रदायिक घटनाओं पर उन्होंने इंदौर हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। अब इस मामले की सुनवाई दोबारा शुरू होने जा रही है।
27 नवंबर को कोर्ट में पेश होंगे दिग्विजय सिंह
सोमवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील रविंद्र छाबड़ा ने कोर्ट को बताया कि दिग्विजय सिंह स्वयं कुछ अहम तथ्य रखना चाहते हैं। इस पर हाई कोर्ट ने उन्हें 27 नवंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने की अनुमति दी।
पिछली सुनवाई में वे कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन बात रखने का अवसर नहीं मिला था। अब इस तारीख को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता है कि वे कौन-से नए तथ्य पेश करेंगे।
2021 की याचिका में लगाए थे गंभीर आरोप
दिग्विजय सिंह ने 2021 में दायर याचिका में कहा था कि राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए गए चंदा अभियान के दौरान कई जिलों (इंदौर, उज्जैन और मंदसौर) में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा और हिंसा हुई।
उन्होंने आरोप लगाया था कि मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया, जबकि इंटेलिजेंस एजेंसियों के पास पहले से ऐसे इनपुट मौजूद थे। बावजूद इसके सरकार ने रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
Read more: 13 साल से सस्पेंड थे Kranti Gaur के पिता, CM ने मंच से कर दिया बड़ा ऐलान
चंदा अभियान पर पारदर्शिता की मांग
याचिका में यह भी कहा गया था कि चंदा संग्रह पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए और किसी पर दबाव नहीं डाला जाए। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद से पुराने चंदे का हिसाब-किताब सार्वजनिक करने की मांग की थी।
सिंह ने 2021 में राम मंदिर ट्रस्ट को 1 लाख 11 हजार 111 रुपये का चेक भेजा था, साथ ही एक पत्र में अपील की थी कि चंदा अभियान में भड़काऊ नारे या हथियारों का प्रदर्शन न हो।
दिग्विजय सिंह ने कई बार कहा है कि वह राम भक्त हैं और मंदिर निर्माण के समर्थक हैं, लेकिन उनका मानना है कि यह काम सौहार्द और सामाजिक एकता के साथ होना चाहिए।
Read More: इंदौर में जन्म लेगा देश का पहला Black Tiger
उन्होंने कहा था, “राम मंदिर सभी का है और इसका निर्माण सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए होना चाहिए।” दिग्विजय के घर में 400 साल पुराना राम मंदिर भी मौजूद है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन कुछ नेताओं में शामिल हैं, जो राम मंदिर मुद्दे पर खुलकर बोलते हैं।
विपक्ष इसे सांप्रदायिक सद्भाव का मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष कहता है कि चंदा अभियान पूरी तरह स्वैच्छिक था। अब सबकी निगाहें 27 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब दिग्विजय कोर्ट में अपने नए तथ्य रखेंगे।
Read More: मुरैना नगर पालिका में झाड़ू लगाने को लेकर विवाद