भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थियों का आंदोलन: 42 घंटे से निर्जला अनशन पर बैठे नरेंद्र राजपूत
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के धरने के बीच ब्यावरा के नरेंद्र राजपूत का 42 घंटे से निर्जला अनशन जारी है। अभ्यर्थी दूसरी काउंसलिंग और वर्ग-3 में 25 हजार पद करने की मांग कर रहे हैं।
भोपाल के नीलम पार्क में धरने पर बैठे शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों के बीच स्वास्थ्य और आपातकालीन स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती के वेटिंग अभ्यर्थी दूसरी काउंसलिंग और खाली पदों पर बहाली की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत 21 अगस्त की मध्यरात्रि से बिना अन्न-जल ग्रहण किए आमरण अनशन पर हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य लगातार गंभीर होता जा रहा है, लेकिन वे मांगें पूरी होने तक हटने को तैयार नहीं हैं।
24 से 26 अगस्त तक चलेगा धरना, स्वास्थ्य पर निगरानी की जरूरत
वेटिंग शिक्षक संघ, वर्ग-1 भर्ती 2023 के तत्वावधान में अभ्यर्थियों ने 24 से 26 अगस्त तक तीन दिवसीय धरने का प्रबंधन किया है। यह प्रदर्शन अंबेडकर पार्क, टीटी नगर और नीलम पार्क में आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी प्रशासनिक अमले से गुहार लगा रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया की आगामी चरणबद्ध कार्रवाई को बिना किसी विलंब के आगे बढ़ाया जाए ताकि तनावपूर्ण स्थिति समाप्त हो सके।
3 साल से मानसिक तनाव झेल रहे चयनित उम्मीदवार
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को शुरू हुए तीन साल से अधिक समय बीत जाने के कारण उम्मीदवार गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। परीक्षा और चयन के सारे कठिन चरण पार करने के बाद भी दूसरी काउंसलिंग न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में रिक्तियों की उपलब्धता के बावजूद युवाओं को नियुक्ति न देना उनके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
25 हजार प्राथमिक और 3 हजार माध्यमिक पदों की स्वास्थ्यकर मांग
शिक्षक अभ्यर्थियों की मांग है कि प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 में पदों की संख्या को बढ़ाकर 25 हजार किया जाए और माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 में कम से कम 3 हजार नए पद जोड़े जाएं। अभ्यर्थियों का मानना है कि इन पदों की वृद्धि से वर्षों से मानसिक और आर्थिक संघर्ष झेल रहे हजारों योग्य उम्मीदवारों को सुरक्षित रोजगार मिल सकेगा और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी।
21 अगस्त की रात से अन्न-जल त्याग, 42 घंटे का अनशन पूरा
अनशनकारी नरेंद्र राजपूत की स्थिति पर हर किसी की नजर बनी हुई है, जिन्होंने पिछले 42 घंटे से कुछ भी नहीं खाया-पिया है। 21 अगस्त रात 12 बजे से निर्जला अनशन कर रहे नरेंद्र का कहना है कि यह शारीरिक कष्ट वे अपने उन सभी शिक्षक साथियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सह रहे हैं, जो वर्षों से भर्ती का इंतजार करते-करते हताश हो चुके हैं।
बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद प्रबंधन स्तर पर कोई हल नहीं
अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य और मानसिक शांति को दांव पर लगाकर पूर्व में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे और संवाद के रास्ते तलाशे। हर बार अधिकारियों द्वारा केवल मौखिक आश्वासन दिए गए, लेकिन दूसरी काउंसलिंग या पदों की संख्या बढ़ाने पर कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ। इसी विफलता के कारण उन्हें पुनः अनशन और धरने का सहारा लेना पड़ा है।
शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने का संकल्प
अनशन पर बैठे नरेंद्र राजपूत ने कहा कि उनका उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना या आंदोलन को उग्र बनाना बिल्कुल नहीं है। वे पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी जीवन रक्षा और रोजगार की गुहार सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत से परीक्षा पास करने वाले युवाओं को खाली पदों पर नियुक्ति देकर सरकार को इस मानवीय संकट का समाधान निकालना चाहिए।

