Bofors Case Final Verdict: 1986 से 2026 तक… जानें बोफोर्स घोटाले की पूरी टाइमलाइन
1986 के रक्षा सौदे से 2026 के सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक, जानें बोफोर्स घोटाले की पूरी टाइमलाइन और कानूनी सफर।
नई दिल्ली, देश के सबसे ज्यादा चर्चित रक्षा सौदों वाला बोफोर्स घोटाला आखिरकार यहीं रुक गया… यानी कानूनी तौर पर, पूरी कहानी का एंड। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बची हुई आखिरी याचिका भी खारिज कर दी है, और बस यहीं के साथ करीब 40 साल से लटका बोफोर्स केस न्यायिक रूप से पूरी तरह खत्म माना जा रहा है। यह फैसला 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ आई अपील पर आया था, जिसमें हिंदुजा ब्रदर्स और बोफोर्स कंपनी को राहत दी गई थी, वो राहत जिसके बाद सारा विवाद और लंबा हो गया।
1986 से शुरू, विवाद की गांठ ऐसे खुलती गई
बोफोर्स मामले की शुरुआत 24 मार्च 1986 को हुई थी। भारत सरकार ने स्वीडन की कंपनी एबी बोफोर्स के साथ 155 मिमी हॉवित्जर तोपों की खरीद का समझौता किया। फिर एक साल बाद, अप्रैल 1987 में स्वीडिश रेडियो की रिपोर्ट सामने आई। उसमें कथित तौर पर कमीशन देने जैसे आरोपों की बात थी, और उसके बाद मामला राष्ट्रीय राजनीति में हलचल भी, और न्यायिक प्रक्रिया में भी बड़े सवाल बनकर फैल गया।
जांच चली, दलीलें हुई, कार्रवाई भी होती रही
जनवरी 1990 में CBI ने FIR दर्ज करके जांच शुरू की। इसके बाद 1999 और 2000 के बीच चार्जशीट दायर की गई। फरवरी 2004 में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आपराधिक साजिश के आरोपों से मुक्त कर दिया। इसके बाद, मई 2005 में हाईकोर्ट ने हिंदुजा ब्रदर्स और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी रद्द कर दी, बस फिर भी कुछ कानूनी प्रक्रियाएं चलती रहीं। वर्ष 2011 में ओत्तावियो क्वात्रोची को राहत मिली, और 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की एक अपील खारिज कर दी।
फिर 2026 में आके आखिरी मुहर
अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी आखिरी याचिका भी नकार दी। अदालत का कहना था कि अब इस मामले में आगे सुनवाई की जरूरत या औचित्य नहीं बचा है। इसी के साथ बोफोर्स घोटाले से संबंधित सारी लंबित कानूनी औपचारिकताएं समाप्त हो गईं, और करीब चार दशक पुराने इस बहुचर्चित मामले का न्यायिक अंत हो गया।
भारतीय राजनीति में ये अध्याय यूं ही दर्ज रहेगा
बोफोर्स विवाद ने कई सालों तक भारतीय राजनीति को प्रभावित किया। यह राष्ट्रीय चुनावों का एक अहम मुद्दा रहा, जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल भी उठे, और अदालतों में सुनवाई की लंबी कतार भी चलती रही। अब जब कानूनी प्रक्रिया खत्म हो चुकी है, तब भी बोफोर्स मामला भारतीय राजनीतिक और न्यायिक इतिहास के सबसे चर्चा में रहने वाले प्रसंगों में, एक स्थायी अध्याय की तरह बना रहेगा।
