BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026: संग्रहालयों के डिजिटलीकरण और दस्तावेजी विरासत के संरक्षण के लिए तैयार हुआ वैश्विक खाका
भोपाल BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 के समापन पर 'भोपाल घोषणा' पत्र को अपनाया गया। इसके तहत संग्रहालयों व अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण तथा चोरी हुई धरोहरों की AI से खोज पर सहमति बनी।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चार दिवसीय BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का शनिवार को आधिकारिक रूप से समापन हो गया। सम्मेलन के समापन दिवस पर आयोजित संस्कृति मंत्रियों की बैठक में सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा' को अपनाया गया। इस घोषणा पत्र का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करना तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों के Digitization और संरक्षण में विशेषज्ञता साझा करना है, ताकि पीढ़ियों से चली आ रही दस्तावेजी व सांस्कृतिक विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
पारंपरिक ज्ञान, लोक कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का संरक्षण
भोपाल घोषणा पत्र में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, लोक ज्ञान, कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। सम्मेलन के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि तीव्र आधुनिकता के बीच पारंपरिक विरासतों को सहेजने के लिए BRICS राष्ट्र मिलकर काम करेंगे। इसके साथ ही, 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' विषय पर आधारित इस 11वें BRICS संस्कृति ट्रैक सम्मेलन में सांस्कृतिक सहयोग के लिए पहली बार स्पष्ट, समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
चोरी हुई धरोहरों की ट्रैकिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल
घोषणा पत्र में विदेशों में अवैध रूप से पहुंचाई गई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदाओं को उनके मूल देश तक वापस लाने के तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया। इसके लिए ऐतिहासिक वस्तुओं के उद्गम की पहचान और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, ऐसी धरोहरों की खोज और ट्रैकिंग प्रक्रिया को तेज व सटीक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों के प्रयोग पर विचार करने की बात कही गई है।
क्रिएटिव इकोनॉमी, AI कॉपीराइट और भारतीय पायलट पहल
सांस्कृतिक क्षेत्र को आधुनिक अर्थशास्त्र से जोड़ते हुए 'क्रिएटिव इकोनॉमी' और रचनात्मक उद्योगों के विस्तार पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कलाकारों को डिजिटल वैश्विक बाजार तक पहुंच दिलाने और AI प्लेटफॉर्म्स में कॉपीराइट वाली रचनाओं के पारदर्शी उपयोग हेतु नियम बनाने पर जोर दिया गया। इस दिशा में भारत ने 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' (Voluntary Artist Registry) की एक पायलट पहल शुरू करने की घोषणा की, जिसका मकसद BRICS देशों के कलाकारों को एक नेटवर्क से जोड़ना है।
भारत की अध्यक्षता में बहुस्तरीय बैठकों का क्रम
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में संचालित यह संस्कृति ट्रैक चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ा। इसकी शुरुआत अप्रैल में आयोजित ऑनलाइन बैठक से हुई, जिसके बाद वाराणसी (4-5 जून) और भोपाल (5-6 अगस्त) में कार्य समूह की बैठकें हुईं। 8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की अंतिम बैठक के साथ यह प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसमें द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से आपसी साझेदारी के नए द्वार खुले।
14 देशों के 55 प्रतिनिधियों का जमावड़ा
इस वैश्विक आयोजन में कुल 14 देशों ने भाग लिया, जिसमें 10 BRICS सदस्य देश (भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र [ऑनलाइन], इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई) और 4 साझेदार देश (बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान, थाईलैंड) शामिल थे। कुल 55 प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।
सांची का बौद्ध इतिहास, भीमबेटका शैल कला और स्थानीय खानपान
सम्मेलन में आए विदेशी प्रतिनिधियों को सांची स्तूप का गाइडेड टूर कराया गया, जहां उन्होंने चेतियागिरी मंदिर के दर्शन किए तथा 3D प्रोजेक्शन मैपिंग व लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से बौद्ध स्थापत्य कला को समझा। अतिथियों के लिए प्रागैतिहासिक रॉक आर्ट स्थल भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की भी व्यवस्था की गई। इसके अलावा, मेहमानों को दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित मध्य प्रदेशी व्यंजनों का स्वाद चखाया गया।
