नेपाल बाढ़ रेस्क्यू बुलेटिन: 178 की मौत, 116 सुरक्षित निकाले गए, 10 टन दवाएं लेकर पहुंचा भारत
नेपाल में बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद बड़े पैमाने पर मेडिकल और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। 178 लोगों की मौत के बीच 116 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ने 10 टन जीवनरक्षक दवाएं और राहत सामग्री भेजी है।

नेपाल और तिब्बत के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य और बचाव दलों ने अपना रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। भयंकर बाढ़ के कारण अब तक कुल 178 लोगों के हताहत होने की पुष्टि हुई है, जिनमें नेपाल के 165 और तिब्बत के 3 मृतक शामिल हैं। इसके साथ ही 1,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए मलबे और पानी के बीच सघन सर्च अभियान जारी है।
ल्हेंदे खोला नदी में विशाल लैंडस्लाइड से टूटा पहाड़
बुधवार की सुबह 8:37 बजे काठमांडू के उत्तरी हिस्से में तेज झटके के साथ पहाड़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढह गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने प्रारंभिक रीडिंग में इसे 4.4 तीव्रता का झटका बताया था। पहाड़ से भारी बर्फ, चट्टानें और मलबा ल्हेंदे खोला नदी में गिरा, जो आगे चलकर भोटेकोशी नदी में मिलती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि किसी हैंगिंग ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने से यह जलप्रलय आया, जिसके वैज्ञानिक कारणों की पुष्टि में हफ्तों का समय लगेगा।
5.2 तीव्रता के बराबर लैंडस्लाइड का गतिज प्रभाव
USGS के अनुसार, यह घटना किसी आंतरिक भूगर्भीय भूकंप के कारण नहीं हुई थी, बल्कि ढलान से गिरे मलबे के अत्यधिक द्रव्यमान ने सतह पर 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर तीव्र कंपन पैदा किया। इस भारी गतिज ऊर्जा ने नदी के बहाव को अवरुद्ध कर निचले इलाकों में अचानक जलप्लावन की स्थिति उत्पन्न कर दी।
300 भारतीयों के लापता होने से मेडिकल टीमों की चिंता बढ़ी
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने पुष्टि की है कि रसुवा और आसपास के इलाकों में 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक लापता हैं। नेपाल में कुल 165 मौतों की आधिकारिक पुष्टि के साथ ही लापता पर्यटकों और नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है।
तिब्बत में 558 लोग लापता, आपदा स्रोत पर राहत कार्य
तिब्बत क्षेत्र में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां चीनी मीडिया के अनुसार 558 लोग लापता दर्ज किए गए हैं। चूंकि पानी और मलबे का बहाव तिब्बत की ऊपरी घाटियों से शुरू हुआ था, इसलिए पूरे नदी बेसिन में स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
21 भारतीयों समेत 116 लोगों का सफल रेस्क्यू, 7 टनल से बचाए गए
नेपाली सेना और राहत बलों ने रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों को जीवित और सुरक्षित रेस्क्यू करने में सफलता प्राप्त की है। इनमें 21 भारतीय और 95 नेपाली नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा एक निर्माणाधीन टनल में फंसे 7 नेपाली नागरिकों को भी प्राथमिक उपचार के साथ सुरक्षित निकाल लिया गया है।
बिहार के सीमावर्ती जिलों में मेडिकल अलर्ट, 3 मीटर वेव की आशंका
नेपाल के त्रिशूली नदी मार्ग से गंडक में आ रहे अतिरिक्त जलप्रवाह के कारण बिहार के स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने की संभावना को देखते हुए पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में फील्ड अस्पतालों को सक्रिय कर दिया गया है। सीतामढ़ी, शिवहर और यूपी के महाराजगंज व कुशीनगर में भी मेडिकल टीमें तैयार हैं।
भारत ने भेजी 10 टन आवश्यक दवाएं और मानवीय सहायता
आपदा के तुरंत बाद भारत सरकार ने नेपाल के लिए 10 टन आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयां और मानवीय राहत सामग्री भेजी है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बयान जारी कर बताया कि यह मेडिकल और लॉजिस्टिक मदद बाढ़ प्रभावित इलाकों में घायलों के उपचार और महामारी की रोकथाम में काम आएगी। भारत ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना भी व्यक्त की है।
आपातकालीन संपर्क और चिकित्सा सहायता हेल्पलाइन
बीजिंग और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावासों ने आपदा में फंसे नागरिकों के लिए आपातकालीन सहायता लाइनें खोल दी हैं। तिब्बत सीमा पर फंसे लोग मौके पर चीनी अधिकारियों के नंबर 0086 139 8999 0012, बीजिंग दूतावास के व्हाट्सएप नंबर 0086 185 1428 4905 या काठमांडू मिशन के नंबरों +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
चेतावनी तंत्र पर चीनी दूतावास का स्पष्टीकरण
बाढ़ की पूर्व सूचना न मिलने के संबंध में उठे सवालों पर नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने स्थिति स्पष्ट की है। दूतावास ने कहा कि सूचना छिपाने के दावे गलत हैं और दोनों देशों के बीच मौसम और जलस्तर से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़ों का आदान-प्रदान तय प्रोटोकॉल के अनुसार ही हुआ है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच राहत प्रबंधन पर मंथन
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह को निर्देश दिया है कि घायलों के तत्काल इलाज, सुरक्षित पुनर्वास और भोजन प्रबंधन के लिए राज्य के सभी संसाधनों को झोंक दिया जाए। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि अस्पताल और राहत शिविर पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और सेना की मेडिकल विंग लगातार ग्राउंड पर तैनात है।


