छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने वाला फैसला: SC ने रद्द की FIR, नीट 2026 के पीड़ितों को 3 महीने में मिलेगा मुआवजा
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन की एफआईआर रद्द कर दी हैं। साथ ही नीट 2026 के पीड़ित परिवारों के लिए 3 महीने में मुआवजे की नीति बनाने का आदेश दिया है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बेहद राहत भरा फैसला सुनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को तनावमुक्त करने वाले इस फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल किया। हालांकि, सुरक्षा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह भी कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के मुताबिक, दिल्ली में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
छात्रों पर दर्ज 13 एफआईआर रद्द करने पर सुनवाई
नीट (NEET) पेपर लीक के कारण भारी मानसिक तनाव झेल रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज 13 एफआईआर को रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। छात्रों को राहत देने वाली यह मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की थी। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है।
आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर सख्त एक्शन का प्रबंधन
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ एफआईआर पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है ताकि समाज सुरक्षित रहे। जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर बढ़ाने की अनुमति दी गई है उनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने आश्वस्त किया कि आम तौर पर नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
पुलिस ने सुरक्षा मैनेजमेंट के तहत कोर्ट से यह भी कहा कि उसका फैसला सिर्फ इस मामले की परिस्थितियों तक सीमित रहे और भविष्य के मामलों में इसे मिसाल न माना जाए।
तनाव कम करने के लिए 5 राज्यों का बड़ा कदम
छात्रों का मानसिक बोझ कम करने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र (दिल्ली पुलिस) के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किए हैं।
सरकारों ने यह भी पक्का आश्वासन दिया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
तनावमुक्ति की दिशा में CJP ने वापस लिया मार्च
हालात को सामान्य करने और सुनवाई से पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने का सकारात्मक फैसला किया है। पार्टी प्रवक्ता सौरव ने बताया कि केंद्र ने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन देकर उनकी चिंताएं दूर कर दी हैं।
दास ने इस मामले में दोनों पक्षों के वकीलों और अदालत के राहत भरे प्रयासों के लिए उन्हें विशेष धन्यवाद भी दिया।
पीड़ित परिवारों के लिए 3 महीने में मुआवजे की नीति
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे बड़ी टिप्पणी करते हुए सीजेआई (CJI) ने कहा कि जहां तक नीट परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी। कोर्ट ने कहा कि इस नीति को 3 महीने में पूरा कर तुरंत मुआवजा दिया जाए।
संवाद से दूर हो सकता है हर मानसिक तनाव: CJI
सीजेपी के फैसले का स्वागत करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सद्भावना के साथ काम करें तो सभी मुद्दों को एक-एक कर सुलझाया जा सकता है, जिससे तनाव कम होता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे खुले मन से चर्चा के जरिए हल न किया जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि दोनों पक्षों ने रचनात्मक तरीके से काम किया और एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं देखा।
20 जुलाई का वह दिन जब बिगड़े थे सुरक्षा हालात
आपको याद दिला दें कि 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प से हालात बिगड़ गए थे। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था (रेस्क्यू) के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद छात्रों का यह आंदोलन और अधिक उग्र होकर कई शहरों तक फैल गया था। उनकी मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।
यह आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। आखिरकार, प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से सीजेपी की दूसरी मांगें मानने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कर शांति बहाल कर दी गई थी।


