Pakistan Security Bulletin: स्वात और सुराब बम धमाकों में दर्जनों मौतें, अपने ही देश में खून-खराबे के बीच शहबाज की भारत को गीदड़भभकी
2 अगस्त को स्वात में हुए आत्मघाती हमले (17 मृत, 34 घायल) और 12 अगस्त को सुराब बम ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान का सुरक्षा ढांचा चरमरा गया है। वहीं पहलगाम में 26 मौतों के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि रोके जाने से तिलमिलाए शहबाज शरीफ अब धमकियां दे रहे हैं।
पाकिस्तान के अलग अलग हिस्सों में इन दिनों खून खराबे, बम धमाकों और मौतों का वो खौफनाक सीन सामने आ रहा है कि जैसे कोई बुरा सपना चल रहा हो. स्वास्थ्य और सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार बढ़ते मृतकों के आंकड़े किसी डरावने किस्से से कम नहीं हैं। सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली बात खैबर पख्तूनख्वा के स्वात इलाके में 2 अगस्त को सामने आई, यहाँ काबल पुलिस स्टेशन के पास एक बड़ा आत्मघाती धमाका हुआ था, और मेडिकल रिपोर्ट व सुरक्षा दावों के मुताबिक कम से कम 17 लोगों की जान चली गई, जबकि 34 लोग बुरी तरह घायल हुए. मृतकों और घायलों में पुलिसकर्मियों के साथ ही काफी संख्या में आम नागरिक भी थे, जो उस वक्त इलाके में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के विरोध में सड़क पर मौजूद थे.
बलूचिस्तान में भी, सुराब इलाके में 12 अगस्त को कार बम फट गया
सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच खींचतान के बीच बलूचिस्तान में लाशें भी बिछती जा रही हैं. 12 अगस्त को पाकिस्तानी सेना ने एक सुरक्षा अभियान के दौरान 10 आतंकवादियों को ढेर कर देने की आधिकारिक पुष्टि की, लेकिन उसी दिन सुराब में कार बम समय से पहले ही धमाके के साथ उछल पड़ा. इस ब्लास्ट की जगह से 3 निर्दोष नागरिकों के साथ 8 हथियारबंद लोगों के क्षत विक्षत शव बरामद हुए. सेना की इस कार्रवाई के साथ-साथ बढ़ती मौतों के बीच वहां मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी तेजी से उठ रहे हैं.
पहलगाम हमला 26 मौतें, और फिर भारत का कड़ा फैसला
आतंकवाद से होने वाली मौतों का ये सिलसिला भारत के धैर्य की परीक्षा भी बन चुका है. 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई. इतने बड़े स्तर की तबाही के बाद भारत की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने 23 अप्रैल को आपात बैठक की. उसी दौरान जानमाल की सुरक्षा को सबसे ऊपर रख कर सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का फैसला लिया गया। भारत ने साफ कर दिया कि 1960 की संधि वाले पुराने दौर का अंत हो चुका है, और सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कदम ही अब एकमात्र रास्ता है.
PoJK में सुरक्षा प्रबंधन फिसला, चुनाव टले हुए
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (PoJK) में भी सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हाल काफी बिगड़ा हुआ दिखता है. Joint Awami Action Committee (JAAC) और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किए. जुलाई के आखिरी दिनों में हुई इन झड़पों में कई लोग घायल भी हुए. स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को इंटरनेट सेवाएं रोकनी पड़ीं और आवाजाही पर भारी प्रतिबंध लगाने पड़े. फिर अगस्त के अंतिम चरण के चुनाव भी सुरक्षा कारणों से टालने पड़े, जो प्रशासन की बड़ी चूक या नाकामी को साफ तौर पर उजागर करता है.
लाशों के ढेर पर शहबाज शरीफ का ‘वाटर’ एजेंडा
एक तरफ देश भर में बम धमाकों का माहौल, 14 अगस्त को बलूच राष्ट्रवादियों की ओर से ‘ब्लैक डे’ मनाने की अपील (काले झंडे और काली पट्टी के साथ), और दूसरी तरफ पूर्व पीएम इमरान खान का जेल में होना—इनसे राजनीतिक और सुरक्षा संकट और ज्यादा उलझता जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ, इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 14 अगस्त से पहले सिंधु जल संधि को अपनी ‘रेड लाइन’ बताकर भारत को धमकियां दे रहे हैं. शरीफ का दावा है कि पानी की एक एक बूंद बहुत अहम है, और उनके मुताबिक भारत ने शांति के खिलाफ कदम उठाया है. लेकिन स्वात से लेकर सुराब तक मरने वालों के जो आंकड़े सामने आते हैं वो ये दिखा देते हैं कि पाकिस्तान की असली समस्या सीमा पार नहीं, बल्कि देश के ही भीतर है.
