Jantar Mantar Violence: 'जब मेरे पापा घर आए, तो उनकी वर्दी खून से लाल थी'; CJP प्रोटेस्ट में जख्मी हुए पुलिसकर्मी की बेटी ने क्या कहा?
Jantar Mantar Violence: जंतर-मंतर हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिवार सामने आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पत्थरबाजी और हमले का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों के लिए इंसाफ की मांग की।
नई दिल्ली। CJP के प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा में कई लोगों को गंभीर चोंटे आयी। एक तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को लाठी पड़ी। वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में पुलिसर्मी भी जख्मी हुए। अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवार सामने आए हैं।
हालही में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उस दिन की पूरी घटना बताई और पुलिसकर्मियों के लिए इंसाफ की मांग की। परिजनों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए। भीड़ ने पुलिस पर पत्थर, गमले, जूते-चप्पल फेंके, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस हिंसा में 5 IPS अधिकारियों समेत 180 पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। वहीं करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे।
बीटा बोला - पापा कहते थे, ये अब छात्रों का प्रदर्शन नहीं रहा
घायल सब-इंस्पेक्टर के बेटे कुंजल ने बताया कि उनके पिता जंतर-मंतर पर फ्रंट लाइन बैरिकेड पर तैनात थे। वह अक्सर घर आकर कहते थे कि अब यह प्रदर्शन सिर्फ छात्रों का नहीं लग रहा, इसमें कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं।
कुंजल ने कहा कि अगले ही दिन उनके पिता हिंसा में घायल हो गए। जब उन्होंने उन्हें देखा तो उनकी वर्दी खून से लाल थी। इसके बावजूद उनके पिता ने सिर्फ इतना कहा, बेटा, कोई बात नहीं... चोट लगती रहती है। जबकि उनके सिर में चार टांके लगे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर पुलिस को ही गलत ठहराया जा रहा है, जबकि घायल होने वाले पुलिसकर्मियों की बात कोई नहीं सुन रहा। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया ताकि पुलिसकर्मियों का पक्ष भी सामने आ सके।
हेलमेट टूट गया, पत्थर सिर पर लगता तो...
घायल एएसआई की पत्नी सीमा ने भी उस दिन का दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को उनके पति ड्यूटी के लिए सुबह जल्दी निकल गए थे। दिन में उन्होंने फोन कर बताया था कि भीड़ बढ़ रही है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे हैं।
शाम को जब उन्होंने फोन किया तो पता चला कि उनके पति इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हैं। सीमा का कहना है भीड़ ने पुलिस पर पत्थर, गमले और जूते-चप्पलों से हमला किया। उनके पति का हेलमेट पूरी तरह टूट गया। उन्होंने कहा, अगर पत्थर सीधे सिर पर लग जाता, तो शायद वो आज हमारे बीच नहीं होते।
संसद में उठा पुलिसकर्मियों का मुद्दा
घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने सरकार और सांसदों से मांग की कि संसद में सिर्फ प्रदर्शनकारियों की नहीं, बल्कि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की भी बात होनी चाहिए। उनका कहना है कि पुलिस संसद और लोगों की सुरक्षा के लिए खड़ी रहती है, इसलिए उनके दर्द और बलिदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।


