बालाघाट में बच्चों की जान लेने वाले कुपोषण और बीमारियों पर वार, 20 नए आरोग्य मंदिरों के साथ स्वास्थ्य पर होगा बड़ा फोकस
कुपोषण और संक्रमण से बच्चों की जान जाने के बाद बालाघाट के पांच ब्लॉकों में स्वास्थ्य और जीवन रक्षक बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की कवायद तेज हुई।

मासूमों की मौतों के बाद जागा स्वास्थ्य और प्रशासनिक अमला
बालाघाट के सुदूर आदिवासी अंचलों में कुपोषण और संक्रामक बीमारियों की चपेट में आकर बच्चों के दम तोड़ने की दर्दनाक घटनाओं ने स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी थी। इस मानवीय त्रासदी के बाद अब शासन ने मरीजों की सुरक्षा और जीवन रक्षक सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जिले के पांच गंभीर रूप से प्रभावित विकासखंडों किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा में 400 करोड़ रुपये के 1,500 जीवनोपयोगी विकास कार्यों को साल भर में अमलीजामा पहनाया जाएगा, ताकि समय पर एंबुलेंस पहुंचे और बच्चों को शुद्ध पानी व इलाज मिल सके।
मेडिकल और राहत प्रबंधन की सीधी निगरानी उच्च स्तर पर
स्वास्थ्य और राहत प्रबंधन में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल खुद समीक्षा कर रहे हैं और उन्होंने इस आपात प्लान को अपनी औपचारिक सहमति दे दी है। इसके साथ ही फील्ड स्तर पर जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सभी विभागों का समन्वय कर रहे हैं। इस स्वास्थ्य व विकास अभियान में स्वास्थ्य, महिला बाल विकास और पीएचई समेत कुल 13 विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
आपातकालीन संपर्क के लिए सड़कें और पुल-पुलिया प्राथमिकता
इलाज के अभाव में मौत की बड़ी वजह गांवों तक पक्की सड़कों का न होना रही है, जिसे दूर करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सबसे ज्यादा बजट खर्च करेगा। कुल 268.94 करोड़ रुपये से 151 पक्की और सीसी सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। इसके साथ ही बरसात में संपर्क न टूटे, इसके लिए 34.02 करोड़ रुपये से 69 पुलिया और कल्वर्ट बनाए जाएंगे, जबकि जल संरक्षण के लिए 35.97 करोड़ रुपये से 60 स्टॉप डैम तैयार किए जाएंगे।
20 नए आयुष्मान केंद्र और सौर ऊर्जा से बिजली बैकअप
आदिवासी इलाकों में प्राथमिक चिकित्सा का दायरा बढ़ाते हुए 20 से अधिक नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर तुरंत स्थापित किए जाएंगे। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व उपस्वास्थ्य केंद्रों के जर्जर भवनों की जगह नए सर्वसुविधायुक्त भवन बनाए जाएंगे। ग्रामीण अस्पतालों में बिजली गुल होने से इलाज न रुके, इसके लिए सभी केंद्रों को सोलर पैनल की मदद से अटूट बिजली आपूर्ति से जोड़ा जा रहा है।
मौत के साए में रहे बैगा गांवों में शुद्ध पानी और पोषण की दस्तक
कुपोषण के कहर से सबसे ज्यादा प्रभावित डोंगरगांव, बोंदारी, कोरका, कोंडेकसा, मछरदा और मातला जैसे बैगा व गोंड बहुल गांवों में मेडिकल टीमों और पोषण योजनाओं का विशेष डेरा रहेगा। बीमारियों की जड़ दूषित पानी को खत्म करने का काम लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को सौंपा गया है। लांजी व किरनापुर में नल-जल योजना पूरी हो चुकी है, जबकि मापदंड पूरे न करने वाले दुर्गम टोलों में सुरक्षित पेयजल के वैकल्पिक उपाय तत्काल लागू किए जा रहे हैं।




