भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थियों के अनशन से बिगड़ी तबीयत: पद बढ़ाने की मांग पर अड़े, विभाग का इनकार
भोपाल में शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि की मांग को लेकर अनशन पर बैठे तीन अभ्यर्थियों की शारीरिक स्थिति नाजुक बनी हुई है। उधर, शिक्षा विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए पद बढ़ाने से साफ मना कर दिया है।

भोपाल के धरना स्थल पर पिछले कई दिनों से आंदोलनरत शिक्षक अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक स्थिति बन गई है, जहां अनशन पर बैठे तीन युवाओं की तबीयत लगातार गिर रही है। इस गंभीर मानवीय स्थिति के बीच शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट कर दिया है कि वह पदों की संख्या बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं कर सकता। विभाग का कहना है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पदों की संख्या में फेरबदल नहीं किया जा सकता। रिक्तियों को केवल आगामी नई भर्ती के माध्यम से ही भरा जा सकेगा, पुरानी प्रक्रिया में पद नहीं जोड़े जा सकते।
भर्ती नियमों और आरक्षित पदों का प्रशासनिक प्रबंधन
प्रशासनिक और भर्ती प्रबंधन के नियमों का हवाला देते हुए शिक्षा विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग का कहना है कि अनुसूचित जाति और जनजाति संवर्ग के पात्र उम्मीदवार न मिलने के कारण ये पद बैकलॉग में सुरक्षित हैं। इन आरक्षित पदों को नियमानुसार सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों से नहीं भरा जा सकता। विभाग ने यह भी रेखांकित किया कि रिक्तियों पर भर्ती न करने का आरोप निराधार है और प्रदर्शन स्थल पर चयनित अभ्यर्थियों के बैठने का दावा भी गलत है।
मैनपावर प्लानिंग पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की राय
शिक्षा व्यवस्था के प्रबंधन पर बात करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सभी रिक्त पदों को एक साथ भर पाना प्रशासनिक रूप से संभव नहीं है। वर्तमान में स्कूलों में 70 हजार अतिथि शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सभी व्यवस्थाओं को स्थायी पद मान लेना सही नहीं होगा। भर्ती में बैकलॉग और ओबीसी आरक्षण के नियमों का संतुलित प्रबंधन जरूरी है, यद्यपि मुख्यमंत्री का प्रयास है कि प्राथमिक आवश्यकताओं के अनुसार पदों को भरा जाए।
मेडिकल इमरजेंसी की ओर बढ़ता अनशन और सियासी हलचल
धरना स्थल पर मेडिकल स्थिति लगातार संवेदनशील होती जा रही है, क्योंकि कई दिनों से जारी प्रदर्शन के बीच तीन अभ्यर्थी लगातार अनशन पर हैं और उनके वाइटल्स प्रभावित हो रहे हैं। आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि परिवारों की सहमति और भविष्य की चिंता के चलते वे आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं। उधर, बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अभ्यर्थियों के पक्ष में खड़े होते हुए कहा कि युवाओं की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और सरकार को हठ छोड़कर उनकी जान व भविष्य की रक्षा करनी चाहिए।
