Cyber Crime News: ग्वालियर में निवेश के नाम पर 1.63 करोड़ की साइबर ठगी, म्यूल खातों का नेटवर्क चलाने वाला आरोपी गिरफ्तार
Cyber Crime News: ग्वालियर में निवेश के नाम पर 1.63 करोड़ की साइबर ठगी में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ। पुलिस ने म्यूल खातों से जुड़े नेटवर्क का खुलासा कर कई बैंकिंग दस्तावेज और कार्ड जब्त किए।
Cyber Crime News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में निवेश के नाम पर 1 करोड़ 63 लाख रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी के मामले में साइबर क्राइम विंग को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान आरोपी के पास से बड़ी संख्या में डेबिट और क्रेडिट कार्ड, चेकबुक, पासबुक और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
निवेश के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी
पुलिस के अनुसार रामदास घाटी निवासी मनीष जैन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 22 अप्रैल से 20 जुलाई 2026 के बीच निवेश के नाम पर उनके साथ 1 करोड़ 63 लाख 19 हजार 900 रुपये की धोखाधड़ी की गई। शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम विंग ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क आया सामने
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी वाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए ऐसे समूहों से जुड़ा था, जहां साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों की खरीद-फरोख्त की जाती थी। साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को अलग-अलग जगह ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
31 लाख रुपये एक करंट खाते में पहुंचे
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की कुल रकम में से करीब 31 लाख रुपये एक करंट खाते में पहुंचे थे। यह खाता मुंबई स्थित बमराई ग्लोबल टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित बताया गया। इसी फर्म से जुड़े आरोपी तक पहुंचकर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
कार्ड, चेकबुक और मोबाइल जब्त
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 26 डेबिट और प्रीपेड कार्ड, पांच क्रेडिट कार्ड, पांच चेकबुक और पांच पासबुक जब्त की हैं। इसके अलावा पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
दोस्त के कहने पर खुलवाए थे खाते
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने अपने एक दोस्त के कहने पर फर्म खुलवाई थी। इसके बाद उसके नाम से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाकर दोस्त को उपलब्ध कराए गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया।
नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश
पुलिस अब वाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही ठगी की रकम कहां-कहां ट्रांसफर हुई और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।


