MP में रोजगार की बड़ी सौगात! जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर से पैदा होंगे 6 लाख नए जॉब्स, कैबिनेट की मिली मंजूरी
कॉरिडोर के हब में बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ श्रमिक आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल केंद्र की योजना है।

जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के औद्योगिक हब्स में श्रमिकों के लिए रहने की व्यवस्था भी… और साथ ही अस्पताल, स्कूल, कौशल विकास केंद्र, और हरित क्षेत्र वाली चीज़ें वगैरह भी जोड़ने की योजना है। मतलब हब सिर्फ फैक्ट्रियों का नाम नहीं रहेगा, बल्कि कुछ हद तक एक औद्योगिक टाउनशिप टाइप तैयार होंगे, जहां काम के साथ जरूरत की सुविधाएं भी पास पड़ें। गुरुवार, 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में कॉरिडोर के लिए स्पेशल परपज़ कंपनी यानी SPV को मंजूरी मिल गई है।
हब में किन बेसिक चीज़ों का इंतजाम होगा
पहले फेज में करीब 10 हजार एकड़ में, तीन से पांच प्राथमिक औद्योगिक हब बनाने का खाका है। साथ में उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज, और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी… ताकि सेटअप जल्दी और ठीक से चल पाए।
कौन देखेगा सारा काम
इस नई कंपनी का मुख्य रोल हब के लिए जमीन, बुनियादी सुविधाओं, और निवेश की व्यवस्था संभालना होगा। सड़क वगैरह का काम, संबंधित एजेंसियां ही देखेंगी। प्रस्तावित कंपनी का नाम है 'जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड'। यह पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में होगी , और राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी देगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली गवर्निंग काउंसिल इसके कामकाज पर निगरानी रखेगी।
सात जिलों में अलग-अलग फोकस वाले उद्योग
यह योजना जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर तक फैली है। जबलपुर में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और एयरोस्पेस की सहायक इकाइयां, और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियां रहने की उम्मीद है। नरसिंहपुर और रायसेन में खाद्य प्रसंस्करण, फूड पार्क, और वेयरहाउसिंग पर जोर होगा, ताकि किसानों के लिए उपज का भंडारण और विपणन, दोनों में सुविधा बढ़ सके। भोपाल में IT, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, और नॉलेज सर्विसेज को बढ़ावा देने की बात है। सीहोर और देवास में भी खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, और मैन्युफैक्चरिंग के मौके तलाशे जाएंगे। इंदौर में IT, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र पर फोकस रहेगा, और इसे इंदौर–देवास–पीथमपुर के मौजूदा औद्योगिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि तालमेल बना रहे।
निवेश और रोजगार का अनुमान क्या है
सरकार का लक्ष्य इस परियोजना से बड़ा औद्योगिक निवेश लाना और रोजगार के नए रास्ते खोलना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश, और करीब तीन लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। शुरुआती आकलन में करीब 1 लाख प्रत्यक्ष रोजगार और 2 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान बताया गया है। लंबी अवधि में, तीन साल के भीतर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश और 6 लाख से ज्यादा रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। ये अनुमान शुरुआती हैं , बाद में DPR तैयार होने के बाद, और निवेशकों के साथ चर्चा के बाद वास्तविक आंकड़े साफ हो पाएंगे।
आगे की समय-सारणी
अब सरकार के अनुसार अगले 30 दिनों में कंपनी बन जाने का लक्ष्य है। छह महीने में GIS मैपिंग और लैंड बैंक तैयार करने की योजना रखी गई है, और 12 महीने में प्राथमिक हब का मास्टर प्लान और DPR तैयार होने की बात कही गई है। तकनीकी अध्ययन छह से नौ महीने में पूरा होगा, उसके बाद बुनियादी सुविधाओं का विकास और जमीन आवंटन का काम तेज होगा। हब की लोकेशन, जमीन की उपलब्धता, पानी, बिजली, सड़क, कनेक्टिविटी, और निवेशकों की मांग जैसी चीज़ें देखकर तय की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे महाकौशल समेत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उद्योगों को गति मिलेगी, और रोजगार के नए मौके मिलेंगे।


