खंडेलवाल से मिले मिश्रा, भाजपा संगठन में अब चर्चा थोड़ा बढ़ी, यानी माहौल सा बदल रहा है।
पार्टी संगठन के भीतर मिश्रा की भेंट सामान्य संवाद या कोई संकेत? BJP में उठते सवाल और खंडेलवाल से जुड़ा पूरा मामला।

नरोत्तम मिश्रा और हेमंत खंडेलवाल की मुलाकात के बाद पार्टी के आस-पास सवाल उठे हैं, पर चर्चा के मुद्दों की औपचारिक जानकारी बाहर नहीं आई। दोनों नेताओं ने भी इस पर अपनी बात नहीं रखी है।
संगठन चला रहे खंडेलवाल और अनुभवी मिश्रा
पार्टी की प्रदेश इकाई खंडेलवाल के जिम्मे है, जबकि मिश्रा गृह विभाग की जिम्मेदारी देख चुके हैं और भाजपा के चर्चित वरिष्ठ नेताओं में हैं। ऐसे में कई बार हुई इन भेंटों को राजनीतिक कोण से देखा जा रहा है।
भेंट का मकसद: संवाद या संकेत?
सवाल यह है कि इसके पीछे कोई विशेष राजनीतिक कारण है या पार्टी के अंदर का रोजमर्रा का संवाद। सियासी जानकारों के अनुसार सियासत में कोई भी बात बेवजह नहीं होती, इसलिए ऐसी भेंटों में बड़े इशारे हो सकते हैं। दतिया उपचुनाव में मिश्रा का टिकट कटा, फिर भी उन्हें प्रदेश की राजनीति का बड़ा अनुभवी खिलाड़ी माना जाता है और जानकारों के बीच उन्हें किनारे पड़ा नेता नहीं समझा जाता। इसी कारण अटकलें गहराई हैं।
आगे की तस्वीर कब साफ होगी
आने वाले राजनीतिक कदमों पर सबकी नजर टिकी है। भेंट में संगठन से जुड़ा कोई मुद्दा था या यह साधारण राजनीतिक बातचीत थी, यह औपचारिक सूचना मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा। इतना जरूर है कि इस मुलाकात से मध्य प्रदेश भाजपा में चर्चा बढ़ गई है।



