CM Mohan Yadav: CM मोहन यादव का मास्टरस्ट्रोक! UCC बिल को कैबिनेट की मंजूरी, अब विधानसभा की बारी
CM Mohan Yadav: CM मोहन यादव आज विधानसभा में UCC बिल पेश कर सकते हैं। जानें शादी, तलाक, लिव-इन और संपत्ति के नियमों में क्या बदलाव होंगे।
CM Mohan Yadav: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश आज एक बड़े कानूनी बदलाव की ओर बढ़ सकता है। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक सदन में पेश कर सकती है।
इससे पहले जगदीशपुर में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में UCC बिल 2026 को मंजूरी दे दी गई थी।
CM मोहन यादव बोले- सभी नागरिकों के लिए होगा समान कानून
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि UCC किसी धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार देने वाला कानून है। उन्होंने कहा, यह कानून राम, रहीम, रवींद्र और रॉबिन सभी को समान अधिकार देगा।
उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
UCC लागू होने पर क्या-क्या बदलेगा?
मुख्यमंत्री के मुताबिक, UCC लागू होने के बाद राज्य में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
एक समय में सिर्फ एक ही शादी कानूनी रूप से मान्य होगी।
तीन तलाक पूरी तरह गैर-कानूनी माना जाएगा।
शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
बेटों और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।
बच्चे की संपत्ति में माता-पिता का भी बराबर अधिकार होगा।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि UCC को लेकर राज्य स्तर पर व्यापक चर्चा कराई गई थी और सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी दल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि समझ नहीं आता कि कांग्रेस को हिंदू-मुस्लिम वोटों की राजनीति में क्या दिखाई देता है।
93 फीसदी लोगों ने किया समर्थन का दावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि UCC को लेकर प्रदेशभर में लोगों की राय ली गई। सरकार के अनुसार, करीब 93 फीसदी लोगों ने UCC का समर्थन किया। वहीं 80 फीसदी से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने भी इस कानून के पक्ष में अपनी राय दी। सरकार का दावा है कि तीन करोड़ से ज्यादा SMS के जरिए लोगों से सुझाव लिए गए।
आदिवासी समुदाय को मिलेगी छूट
सरकार ने साफ किया है कि अनुसूचित जनजातियों को UCC के कुछ प्रावधानों से बाहर रखा जाएगा। भील, गोंड, बैगा, सहरिया, कोरकू और भारिया जैसे जनजातीय समुदाय पहले की तरह अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था के अनुसार जीवन जी सकेंगे।
