कॉर्पोरेट जगत के बजट पर असर: H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर फीस का नया प्रस्ताव
अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट हायरिंग और टैलेंट मैनेजमेंट पर बड़ा वित्तीय असर पड़ने वाला है। अमेरिका ने नए H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर की फीस का प्रस्ताव रखा है, जिससे कंपनियों के भर्ती बजट में भारी उछाल आएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैलेंट मैनेजमेंट और मानव संसाधन का प्रबंधन करने वाली अमेरिकी कंपनियों के सामने एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने विदेशी कर्मचारियों के नए H-1B वीजा आवेदन के लिए 1,03,265 डॉलर (लगभग 99 लाख भारतीय रुपये) की अभूतपूर्व फीस का प्रस्ताव पेश किया है। इस भारी वित्तीय भार के चलते उन सभी कंपनियों के लिए विदेशों से अनुभवी और कुशल प्रोफेशनल्स को अमेरिका बुलाना आर्थिक रूप से बहुत कठिन हो जाएगा।
एचआर बजट पर 98.86 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ
इस नए वित्तीय नियम के अनुसार, अमेरिकी कंपनियों को बाहर से किसी भी नए कर्मचारी को H-1B वीजा पर हायर करने पर 1,03,265 डॉलर यानी लगभग 98.86 लाख रुपये की अतिरिक्त लागत झेलनी पड़ेगी। कॉर्पोरेट सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इतना बड़ा खर्च कंपनियों के सालाना बजट और हायरिंग प्लानिंग को पूरी तरह हिला देगा, खासकर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में जहां बाहरी विशेषज्ञों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
टैलेंट पूल में 70% भारतीय, हायरिंग मैनेजमेंट में आएगी दिक्कत
ग्लोबल वर्कफोर्स के आंकड़ों को देखें तो H-1B वीजा पर काम करने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। वित्त वर्ष 2025 में कुल H-1B वर्कफोर्स का लगभग 70 फीसदी हिस्सा अकेले भारतीय प्रोफेशनल्स का था, जबकि चीनी नागरिक 12 प्रतिशत पर थे। इस अत्यधिक फीस की वजह से कंपनियों को अपनी रिक्रूटमेंट रणनीति बदलनी पड़ सकती है, जिससे भारतीय टैलेंट के लिए अमेरिकी कंपनियों से सीधे ऑफर पाना बेहद पेचीदा हो जाएगा।
पहले से मौजूद छात्रों और वीजा एक्सटेंशन को दी गई राहत
हालांकि, कंपनियों के लिए राहत भरी खबर यह है कि यह नया वित्तीय नियम सभी श्रेणियों पर एक समान लागू नहीं होगा। अमेरिका में पहले से छात्र वीजा पर रहकर डिग्री पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को H-1B में बदलते समय इस भारी शुल्क से छूट मिलने की व्यवस्था है। इसी तरह जो कर्मचारी पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं और वीजा रिन्यूवल करा रहे हैं, उन पर भी यह नया भार नहीं पड़ेगा।
30 दिनों का पब्लिक कमेंट पीरियड, पहले 2-5 हजार डॉलर थी लागत
कंपनियों के कानूनी प्रबंधन के लिहाज से यह जानना जरूरी है कि पूर्व में 1 लाख डॉलर की फीस का फैसला अमेरिकी अदालत के स्टे के चलते कानूनी विवाद में फंसा हुआ है। इसीलिए अब सरकार ने इस नए प्रस्ताव पर 30 दिनों का पब्लिक कंसल्टेशन समय रखा है ताकि सुझाव लिए जा सकें। जहां पहले H-1B की पूरी प्रशासनिक फीस केवल 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच बैठती थी, वहीं अब 99 लाख की यह नई लागत बहुत बड़ा बदलाव साबित होगी।

