ग्वालियर में सड़क की गुणवत्ता मामले में हाई कोर्ट सख्त, चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना नोटिस; 2 दिन में मांगा जवाब
ग्वालियर में एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री तक बनी सड़क की गुणवत्ता पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई। चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा गया है।

Gwalior News: ग्वालियर में एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री तक बनी सड़क की गुणवत्ता को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। सड़क निर्माण से जुड़ी लैब रिपोर्ट में सामग्री के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात सामने आई है। सुनवाई के दौरान सड़क की मूल सरकारी फाइल उप अभियंता के घर पर रखे होने का मामला भी सामने आया। अदालत ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर और प्रभारी सब-इंजीनियर को नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित बताई गई है।
मूल सरकारी फाइल सब-इंजीनियर के घर पर मिलने से कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण से जुड़े मूल रिकॉर्ड को लेकर अधिकारियों से सवाल किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ इंजीनियर वी.के. अरख ने शुरुआत में बताया कि मूल रिकॉर्ड विभागीय कार्यालय में रखा है। हालांकि, बाद में सामने आया कि सड़क निर्माण से संबंधित मूल फाइल प्रभारी सब-इंजीनियर दीपक गुप्ता के घर पर रखी हुई थी। इस जानकारी पर अदालत ने नाराजगी जताई। अदालत ने रिकॉर्ड के रखरखाव और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान अधिकारियों के बीच समन्वय और जवाबदेही को लेकर भी कड़ी टिप्पणियां की गईं। इसके बाद मूल फाइल और तीन मेजरमेंट बुक अदालत में पेश की गईं। रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन्हें सीलबंद कर सरकारी वकील की सुरक्षित अभिरक्षा में रखने के निर्देश दिए गए।
पुलिस पर डाला था सड़क खराब होने का दोष
सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से दलील दी गई कि सड़क निर्माण के बाद कुछ समय तक यातायात बंद रखा जाना चाहिए था। अधिकारियों की ओर से कहा गया कि पुलिस प्रशासन ने दो-तीन दिन में ही वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी, जिससे सड़क को नुकसान पहुंचा। हालांकि, सुनवाई में लोक निर्माण विभाग की थाटीपुर स्थित प्रयोगशाला की रिपोर्ट का मुद्दा भी उठा। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इससे सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए। अदालत ने यह भी पूछा कि बिल पास होने से पहले जांच के लिए भेजे गए नमूने सड़क के किस हिस्से से लिए गए थे।जानकारी के अनुसार, नमूने लिए जाने के सटीक स्थान को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका और लैब रिपोर्ट में भी इस स्थान का उल्लेख स्पष्ट नहीं था।
चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को नोटिस
सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी रिकॉर्ड को लेकर सामने आए तथ्यों पर हाईकोर्ट ने PWD के चीफ इंजीनियर वी.के. अरख और प्रभारी सब-इंजीनियर दीपक गुप्ता को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से दो दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। अदालत की सख्ती के बाद अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। मामले में सरकारी दस्तावेजों की उपलब्धता, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका अहम मुद्दे बने हुए हैं।
₹26.53 करोड़ की एन्युटी FDR पर रोक जारी
इस मामले से जुड़ी पिछली कार्यवाही में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद करीब 26.53 करोड़ रुपये की एन्युटी से संबंधित FDR पर रोक लगाई गई थी। जानकारी के अनुसार, यह रोक अभी जारी है। सड़क के नमूनों की जांच रिपोर्ट और निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर अदालत पहले भी संबंधित विभागों से जवाब मांग चुकी है। अब अधिकारियों के जवाब और रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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