ग्वालियर: शीतला माता मंदिर सड़क हादसे पर हाई कोर्ट सख्त, मुख्य सचिव-DGP समेत 10 पक्षकारों को नोटिस
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर मार्ग पर हुए हादसे में 16 लोगों की मौत और 41 के घायल होने के बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अदालत ने मुख्य सचिव, DGP समेत 10 पक्षकारों से जवाब मांगा है।

Gwalior Temple Accident: ग्वालियर में शीतला माता मंदिर मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। हादसे में 16 लोगों की मौत और 41 लोगों के घायल होने के मामले में अदालत ने मुख्य सचिव, DGP और गृह, परिवहन व राजस्व विभाग के प्रमुख सचिवों समेत 10 पक्षकारों से जवाब मांगा है। याचिका में हादसे की जांच, धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में संभावित चूक की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
हादसे के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर मार्ग पर 17-18 अक्टूबर की दरमियानी रात धान से भरा एक ट्रक अनियंत्रित हो गया था। ट्रक ने मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और सड़क किनारे मौजूद दुकानदारों को टक्कर मार दी थी। इसके बाद वह मंदिर के प्रवेश क्षेत्र से जा टकराया। इस मामले में अधिवक्ता अभिषेक जाट ने जनहित याचिका दायर की। सोमवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों सहित 10 पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
भारी वाहनों पर रोक थी, फिर कैसे पहुंचा ट्रक?
याचिका में सवाल उठाया गया है कि नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था, तो ट्रक उस रास्ते पर कैसे पहुंच गया। याचिकाकर्ता ने बैरिकेडिंग और पुलिस चेकपॉइंट की व्यवस्था के बावजूद ट्रक के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की जांच कराने की मांग की है।
याचिका के मुताबिक, ट्रक चीनौर की ओर से सातऊ गांव स्थित मंदिर मार्ग पर नीचे उतरते समय अनियंत्रित हुआ था। हादसे में 16 लोगों की जान गई और 41 लोग घायल हुए। अब यह पता लगाने की मांग की गई है कि उस रात यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई थी या नहीं।
Google Maps और ब्रेक फेल होने के दावों की जांच
याचिका में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए ट्रक के Google Maps के सुझाए रास्ते से आने और ब्रेक फेल होने के दावों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन दावों को हादसे का अंतिम कारण नहीं बताया गया है। याचिकाकर्ता ने ट्रक की तकनीकी जांच रिपोर्ट, उसके निर्धारित और वास्तविक मार्ग तथा दुर्घटना के कारणों की साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की है।
FIR से लेकर CCTV फुटेज तक मांगा रिकॉर्ड
जनहित याचिका में हादसे से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा अदालत के सामने पेश करने की मांग की गई है। इनमें FIR, जांच की स्थिति, भारी वाहनों पर प्रतिबंध के आदेश, ट्रैफिक डायवर्जन प्लान, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी का रिकॉर्ड, वायरलेस संदेश और CCTV फुटेज शामिल हैं। इसके साथ ही ट्रक की मैकेनिकल जांच रिपोर्ट, राहत-बचाव और चिकित्सा सहायता से जुड़े दस्तावेज तथा हादसे के बाद हुई प्रशासनिक जांच का रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
मंदिर मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग
याचिका में शीतला माता मंदिर और वहां पहुंचने वाले मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है। इसमें श्रद्धालुओं और वाहनों के लिए अलग-अलग रास्ते, मजबूत बैरिकेडिंग, भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी रोक, पर्याप्त पुलिस बल और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब संबंधित पक्षों के जवाब और मामले की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।




